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असम: परिवार से दूर रहकर दूसरे के घर में 'झाड़ू-पोछा' करती थी, अब इस बच्ची का जला हुआ शव मिला

असम राज्य में एक ज़िला है नागांव. यहां राहा नाम का एक टाउन है. 22 अप्रैल 2021 की बात है. इस टाउन में 12 साल की एक लड़की का शव मिला. जो कि बुरी तरह से जल चुका था. ये लड़की राहा के ही एक घर में डोमेस्किट हेल्प का काम करती थी. मूल रूप से कार्बी आंगलोंग ज़िले की रहने वाली थी. राहा में जिनके घर काम करती उन्हीं लोगों ने 22 अप्रैल को बच्ची के पैरेंट्स को कॉल करके जानकारी दी कि उनकी बेटी की मौत हो चुकी है. अब असम के कई सारे लोग इस बच्ची के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं. सोशल मीडिया पर बच्ची के लिए कई सारे हैशटैग भी ट्रेंड कर रहे हैं. क्या है ये पूरा मामला? अभी तक क्या जानकारी सामने आई है? आरोपी कौन हैं? सारे सवालों के जवाब एक-एक करके आपको देंगे.

क्या है मामला?

सोशल मीडिया पर इस बच्ची के लिए सबसे ज्यादा अगर कोई आवाज़ उठा रहा है, तो वो है कारबी स्टूडेंट्स असोसिएशन, यानी KSA. हमने इस घटना को ठीक से जानने के लिए KSA के प्रेसिडेंट सैमसन तेरॉन से बात की. उनसे जो हमें पता चला, वो हम आपको आगे बता रहे हैं-

प्रिया (बदला हुआ नाम) असम के कार्बी समुदाय से आती थी. माता-पिता कार्बी आंगलोंग ज़िले के एक बेहद पिछड़े गांव में रहते थे. वहीं प्रिया पिछले करीब चार साल से राहा में एक परिवार के पास रह रही थी. जहां वो डोमेस्किट हेल्प का काम करती थी. परिवार में प्रकाश बोरठाकुर नाम का एक आदमी था, जिसकी मौजूदा उम्र 68 बरस है. साथ ही प्रकाश की पत्नी और बेटा नयनज्योति बोरठाकुर थे. नयनज्योति की मौजूदा उम्र 25 बरस है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रिया के पैरेंट्स ने इन चार साल में अपनी बेटी को घर ले जाने की कोशिश भी की, लेकिन प्रकाश का परिवार कोई न कोई बहाना बनाकर उसे रोक लेता था. ऐसे में प्रिया के पैरेंट्स को जब उससे मिलना होता, वो खुद ही अपने गांव से राहा आते थे.

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जस्टिस के लिए किए गए ट्वीट.

22 अप्रैल के दिन प्रकाश के परिवार ने प्रिया के पैरेंट्स को कॉल किया. बताया कि उनकी बेटी ने खुद को आग के हवाले करके सुसाइड कर लिया है. खबर मिलते ही पीड़ित परिवार राहा पहुंचा. इसी दौरान उनके साथ कार्बी स्टूडेंट्स असोसिएशन समेत असम के करीब 30 यूनियन्स के लोग भी वहां पहुंचे. बच्ची के पैरेंट्स ने और बाकी लोगों ने प्रकाश और उसके परिवार के ऊपर हत्या के आरोप लगाए. इसी दिन पीड़ित परिवार ने प्रकाश के परिवार के खिलाफ FIR भी की. मर्डर के आरोप लगाए.

हमने इस मुद्दे पर पैरेंट्स से बात करना चाहा, चूंकि वो केवल कार्बी भाषा ही बोलते हैं, तो हमारी उनसे बात हो नहीं सकी. KSA के प्रेसिडेंट सैमसन बताते हैं कि प्रिया का परिवार ये चाहता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले. इसके अलावा कई सारे स्थानीय लोगों ने ये भी आशंका जताई है कि प्रिया को सेक्शुअली असॉल्ट किया जा रहा था. वहीं KSA ने भी शंका जताई है कि हो सकता है कि प्रिया प्रेगनेंट हो गई हो, और इसी को छिपाने के लिए बोरठाकुर परिवार ने उसकी हत्या कर दी हो. इन सबके अलावा कुछ रिपोर्ट्स ये भी कह रही हैं कि हो सकता है कि प्रिया को मारने के बाद उसे जलाया गया हो. इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर लगातार लिखा जा रहा है. वहीं नागांव में कुछ लोगों ने प्रिया के लिए शांति सभा भी की है.

insidene.com नाम की एक वेबसाइट है. ये नॉर्थ-ईस्ट इलाकों की घटनाएं कवर करती है. इस वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, असम स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स यानी ASCPCR ने भी दावा किया था कि प्रिया सेक्शुअल हैरेसमेंट का शिकार हुई थी. और इस वजह से प्रेगनेंट हो गई थी. हालांकि पुलिस की मानें तो सेक्शुअल हैरेसमेंट वाले मुद्दे पर अभी जांच चल रही है.

पुलिस क्या कहती है?

जब मामला सामने आया तो नागांव पुलिस ने प्रिया के शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. लेकिन घटना के सात दिन बाद भी पुलिस ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि प्रिया के साथ आखिर हुआ क्या था. हमने डिप्टी SP यानी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस अनिता हज़ारिका से भी इस मुद्दे पर बात की. उन्होंने कहा,

“अभी जांच चल ही रही है. सेक्शुअल हैरेसमेंट, रेप या प्रेग्नेंसी वाले मुद्दे पर हमारे पास अभी कोई साफ रिपोर्ट नहीं आई है. हमने रिपोर्ट की जांच के लिए आगे भी इसे भेजा है. पुलिस तत्परता से इस केस में काम कर रही है. तीन आरोपियों को हमने पहले ही जूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है.”

जिन तीन आरोपियों को जूडिशियल कस्टडी में भेजा गया है, वो हैं प्रकाश बोरठाकुर, नयनज्योति और प्रकाश की पत्नी. वहीं न्याय की इतनी तेज़ मांग को देखते हुए असम के गवर्नर जगदीश मुखी ने एक मेंबर वाली जांच कमिटी बनाई. IAS अधिकारी और सेंट्रल असम के डिविज़नल कमिश्नर मलय बोरा इस कमिटी के मेंबर हैं. यानी वही अब पूरी जांच देख रहे हैं. ‘इंडिया टुडे’ के पंकज शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आज नागांव ज़िले के SP और अन्य पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और फिर मीडिया से बात की. उन्होंने कहा,

“इस मामले की जांच हमने शुरू कर दी है. राहा जहां पर बच्ची का शव मिला था, वहां भी हम जाएंगे और पूछताछ करेंगे. इसके अलावा बच्ची के मूल गांव भी हम जाएंगे, उसके पैरेंट्स से मिलेंगे. हम ये भी पता लगाएंगे कि बच्ची अपने घर से दूर राहा में प्रकाश बोरठाकुर के घर क्यों रह रही थी? क्या पढ़ाई के लिए या फिर डोमेस्किट कामों के लिए?”

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IAS अधिकारी और सेंट्रल असम के डिविज़नल कमिश्नर मलय बोरा. (फोटो- पंकज शर्मा)

मलय बोरा ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर रेप, सेक्शुअल हैरेसमेंट और प्रेग्नेंसी के सवालों को जांच का विषय बताया है. यानी अभी तक पुलिस ने इन सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है. जो जांच कमिटी बनाई गई है, उसे एक महीने के अंदर अपनी इन्क्वायरी पूरी करके रिपोर्ट सौंपनी होगी.

अगर हम सोशल मीडिया पर रिएक्शन्स की बात करें, तो त्रिपुरा रॉयल फैमिली के प्रद्योत बिक्रम ने तक इस केस के खिलाफ आवाज़ उठाई है. उन्होंने लिखा था-

“जो भी उस बच्ची के साथ हुआ वो केवल शर्म की बात नहीं है, लेकिन इस बात की कड़वी सच्चाई है कि किस तरह से आज भी बच्चियों को ले जाकर शहरी इलाकों में गुलाम की तरह रखते हैं. असम सरकार को इसके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए.”

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प्रद्योत का ट्वीट.

अब आंकड़ों पर भी थोड़ा नज़र डाल लेते हैं. NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 में असम में बच्चों के खिलाफ होने वाले कुल 6,608 अपराध दर्ज हुए थे. जो कि किसी भी नॉर्थ-ईस्ट स्टेट में सबसे ज्यादा थे.

ये केस अभी इतना वायरल है कि आपने भी कहीं न कहीं सोशल मीडिया पर बच्ची के जले हुए शव की तस्वीर देखी ही होगी. हमें नहीं पता कि बच्ची के साथ एग्जेक्टली क्या हुआ? हम अभी इस पर कुछ कमेंट भी नहीं कर सकते. क्योंकि ये सब जांच का विषय है. हम केवल उम्मीद कर सकते हैं कि बच्ची और उसके परिवार वालों के साथ हमारा कानून न्याय करेगा. और हम इतना ज़रूर जानते हैं कि एक बच्ची जो शायद आगे चलकर बहुत कुछ कर सकती थी, अब हमारे बीच नहीं है, बेहद निर्मम तरीके से उसका अंत हुआ.


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