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लड़की की मौत, शरीर पर चोट के निशान, 8 दिन तक आरोपी को 'बचाती' रही पुलिस

असम का धेमाजी ज़िला. यहां का सिलापथार कस्बा. 8 जुलाई की शाम यहां रहने वाली 23 बरस की एक लड़की दोस्तों के साथ बाहर गई. देर रात तक घर ही नहीं आई. फिर रात करीब 2:30 बजे घरवालों को एक कॉल आया. एक अस्पताल से. बताया गया कि एक कॉलेज के सामने लड़की का शव मिला है. घरवाले अस्पताल पहुंचे, तब तक पुलिस भी आ चुकी थी. पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए धेमाजी सिविल अस्पताल पहुंचाया. घरवालों ने किडनैपिंग और मर्डर का केस दर्ज करवाया. इधर लड़की का शव पोस्टमॉर्टम होकर वापस आता और अंतिम संस्कार होता, उसके पहले ही ये खबर फैल गई कि ‘ड्रग्स के ओवरडोज़’ की वजह से लड़की की मौत हुई है.

लोकल मीडिया चैनल्स ने बिना सोचे-समझे, बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आए, ये चला दिया कि ड्रग्स के ओवरडोज़ की वजह से ये हुआ. आरोपी कहां गए? कौन थे? इन सवालों से फोकस शिफ्ट हो गया, और सारा ध्यान इस बात पर चला गया कि लड़की ने ड्रग्स लिए थे. वो भी तब, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई भी नहीं थी.

क्या है पूरा मामला?

आखिर 8 जुलाई को हुआ क्या था? लड़की किन लोगों के साथ गई थी? अभी तक क्या कार्रवाई हुई? ये सारी बातें जानने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने लड़की की एक करीबी रिश्तेदार रिया (काल्पनिक नाम) से बात की. रिया ने बताया,

“तारा (काल्पनिक नाम) को 8 जुलाई की शाम उसके दोस्त बोरुन पेगु का कॉल आया. उसने उसे एक पार्टी का इनविटेशन दिया. बोरुन के साथ उसके दोस्त राहुल डोले और सचिन पैट भी थे. तारा और उसके घर वाले इन लोगों को पहले से जानते थे. इसलिए तारा अपने घर में बताकर पार्टी में चली गई. रात करीब नौ बजे तारा की बहन ने उसे कई बार कॉल किया, लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था. थोड़ी देर बाद तारा ने बोरुन के फोन से अपनी बहन को कॉल किया और बताया कि उसके फोन में नेटवर्क नहीं है. फिर बोरुन ने भी तारा की बहन से बात की और कहा कि वो खुद तारा को सही सलामत घर छोड़ देगा. उसके बाद फोन रख दिया. देर रात तक तारा नहीं आई. सीधे एक अस्पताल से कॉल आया, तारा की लाश मिलने का. ये कॉल तारा से आखिरी बार फोन पर बात होने के साढ़े पांच घंटे के बाद आया.”

रिया ने आगे कहा,

“हमने तारा के शव को देखा. उसके चेहरे हाथ-पैर मुंह वगैरह पर चोट के निशान थे. ऐसा लग रहा था कि उसे मारने से पहले पीटा गया था. हमने तुरंत ही तीनों लड़कों के खिलाफ मर्डर और किडनैपिंग का केस दर्ज करवाया.”

रिया ने बताया कि उन्हें शक है कि तारा को मारने से पहले उसका रेप या यौन शोषण भी किया गया था. हालांकि FIR में उन्होंने रेप का मामला अभी दर्ज नहीं कराया है, क्योंकि उन्हें केवल अभी शक है. ये भी बताया कि तारा पहले ड्रग्स करती थी, लेकिन 8 जुलाई को जब वो घर से निकली तो उसके पास पैसे नहीं थे. इसलिए रिया का सवाल है,

“तारा ड्रग्स करती थी, ये सच है, लेकिन उस रात वो खाली हाथ घर से गई थी. अगर उसने उस रात ड्रग्स भी किया, तो उसे किसने ड्रग्स मुहैया कराई होगी. और वो ये जानती थी कि उसका शरीर कितना ड्रग्स झेल सकता है, ऐसे में वो क्यों खुद ड्रग्स का ओवरडोज़ लेगी? पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई नहीं थी, उसके पहले ही लोगों ने ये कह दिया कि ड्रग्स के ओवरडोज़ की वजह से मौत हुई. वो भी तब जब पुलिस ने भी ये बात नहीं कही थी. जितने भी लोकल मीडिया ने इस खबर को छापा, केवल ड्रग्स के ओवरडोज़ पर फोकस किया. इस पर नहीं किया कि उसे ड्रग्स मिली कैसे? उसके दोस्त, जो उसे पार्टी के नाम पर लेकर गए थे, वो कहां चले गए? या तारा के शरीर पर चोट के निशान कैसे आए थे?”

तीनों आरोपियों का क्या हुआ?

एक आरोपी राहुल की गिरफ्तारी घटना के कुछ ही दिन बाद हो गई थी. लेकिन बोरुन की गिरफ्तारी करीब आठ दिन बाद हुई. बोरुन हेल्थ केयर वर्कर है. जिस अस्पताल में काम करता था, इस घटना के बाद उसकी ड्यूटी कोविड सेंटर में लगा दी गई. इन्चार्ज सीके मिली ने कहा, ‘बोरुन को रिलीज़ कैसे करें, उसकी ड्यूटी तो कोविड सेंटर में लगी है.’

धेमाजी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) धनंजय घनवत से बात की गई. उन्होंने बताया कि उन्होंने बोरुन की गिरफ्तारी के आदेश तो उन्होंने दिए थे, फिर कहा कि वो पता करते हैं कि गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई. उसके बाद 17 जुलाई को खबर मिली कि बोरुन की गिरफ्तारी हो गई है. कुल मिलाकर एक संदिग्ध हालत में मिले लड़की के शव के साथ कौन-कौन था, ये जानते हुए भी पुलिस को गिरफ्तारी करने में 9 दिन लग गए.

तीसरा आरोपी सचिन पैट फरार है. SP का कहना है कि उसे खोजा जा रहा है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का क्या?

‘दी लल्लनटॉप’ ने रिया से 18 जुलाई की दोपहर में बात की थी. तब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई थी. रिया ने कहा था,

“अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है. हम पुलिसवालों से कॉन्टैक्ट करते हैं, तो वो कहते हैं कि ये सब डॉक्टर के हाथ में है कि वो रिपोर्ट कब जारी करते हैं. धेमाजी सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ है, वहां किसी का नंबर हमारे पास नहीं है, इसलिए मैं खुद वो अस्पताल गई थी, लेकिन मुझे किसी से मिलने नहीं दिया गया. यह कहा गया कि कोरोना के मामले आ रहे हैं, इसलिए ऐसे लोग जो मरीज़ नहीं हैं उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा. हमें अभी तक पता नहीं कि तारा की मौत कैसे हुई?”

इसके बाद ‘दी लल्लनटॉप’ ने मामले की जांच कर रहे ऑफिसर इन्चार्ज (OC) गणेश बर्मन और SP धनंजय से कॉन्टैक्ट किया. उन्होंने भी यही कहा कि डॉक्टर और अस्पताल पर निर्भर करता है कि वो पोस्टमार्टम रिपोर्ट कब देंगे.

धेमाजी हेल्थ डिपार्टमेंट की जॉइंट डायरेक्टर डॉक्टर कैम्प्रोय से संपर्क किया गया. 18 जुलाई की शाम को. उन्होंने कुछ वक्त मांगते हुए रात तक जानकारी दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जा चुकी है और तारा की आंतों को आगे की जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है.

रात तक धेमाजी SP धनंजय ने भी बताया,

“पोस्टमार्टम रिपोर्ट अस्पताल ने पुलिस को सौंप दी है. तारा के शरीर के कुछ अंगों को गुवाहाटी भेजा गया है, फॉरेंसिक लैब को. फॉरेंसिक जांच के लिए. कोशिश है कि पुलिस की चार्जशीट दाखिल करने तक, यानी तीन महीने के अंदर तक रिपोर्ट आ जाए. लेकिन इससे ज्यादा का वक्त भी लग सकता है. क्योंकि गुवाहाटी में इस वक्त कोरोना की वजह से लॉकडाउन है.”

रिपोर्ट में आखिर आया क्या?

कई बार पूछने के बाद भी SP ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आखिर क्या पता चला है. उन्होंने कहा कि ये कॉन्फिडेंशियल बात है, मीडिया को नहीं बताई जा सकती. तारा के परिवार वालों को भी अभी तक ये नहीं पता चला है कि तारा की मौत आखिर हुई कैसे, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निकला है, ये उन्हें भी नहीं बताया गया.

केवल इतना कहा कि पुलिस मामले की जांच तत्परता से कर रही है, और जल्द ही ये पता लगाया जाएगा कि तारा के साथ आखिर हुआ क्या था.

23 जुलाई को एक बार फिर रिया से हमने बात की. उन्हें अभी तक ये नहीं पता चला है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया है, पुलिस की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी जा रही. SP से भी फिर बात की गई. उन्होंने बताया,

“मामले की जांच कर रहे अधिकारी को हमने रिपोर्ट भेज दी है. वैसे भी अभी फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए पोस्टमार्टम को आखिरी रिपोर्ट नहीं माना जा सकता. अगर परिवार पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बारे में जानना चाहता है, तो पुलिस से नहीं अस्पताल से कॉन्टैक्ट करे. वो बताएंगे, उनसे पूछें.”

ऑफिसर इन्चार्ज (OC) गणेश बर्मन से भी कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.  परिवार का कहना है कि वो ये जानना चाहते हैं कि तारा के साथ आखिर हुआ क्या? उसकी मौत किन कारणों से हुई? लेकिन पुलिस ने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं बताया है.

पोस्टमार्टम को लेकर परिवार के पास क्या अधिकार है?

सुप्रीम कोर्ट की वकील विजया लक्ष्मी ने बताया कि परिवार को पूरा अधिकार है ये जानने का कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का क्या कारण पता चला है. अगर पुलिस नहीं बताती है तो वो कोर्ट का सहारा ले सकते हैं.

आखिर में कुछ बड़े सवाल जो खड़े होते हैं:

# अगर  किसी लड़के की ड्यूटी कोरोना वॉर्ड में लगी है तो ऐसा कैसे है कि उसे पार्टी करने की छूट थी मगर गिरफ्तारी की इजाज़त नहीं.

# अगर किसी लड़के पर  गंभीर आरोप हैं और पुलिस को उसकी लोकेशन पता है तो कोविड से जुड़ी नसीहतें बरतते हुए उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं होती है?

# पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने में इतना वक़्त क्यों लगता है?

# परिवार वालों के साथ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट शेयर क्यों नहीं की जाती, जबकि उनका रिपोर्ट पर पहला हक़ है.

# जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ चुकी है तो पुलिस लड़की को लगी चोटों और उसकी मौत की वजह उजागर क्यों नहीं कर रही है?

इन सवालों के जवाब कौन देगा, मालूम नहीं. लेकिन जो दिख रहा है, वो तो यही है कि एक युवा लड़की की जान गई. और पुलिस ने पूरी कोशिश की कि मसले को दबाते हुए आरोपियों को प्रोटेक्ट किया जाए. अगर ये देश के एक औसत जिले का लड़कियों की मौतों को ‘ट्रीट’ करने का तरीका है. तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि देश में कितनी औरतों की हत्या की वजहों और उनके साथ हुई हिंसा को रोज़ दबाया जा रहा होगा.


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