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लड़कियां उम्र से पहले 'बड़ी' हो रही हैं, लेकिन क्या ये पॉसिबल है?

आज कल की लड़कियां ‘जल्दी बड़ी हो रही हैं’. ये आज की पीढ़ी पर दादी-नानी की कोई जेनेरिक कमेंट्री नहीं है. बल्कि साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट पर आधारित ऑब्ज़रवेशन है. और ये बात गार्डियन की एक रिपोर्ट में कही गई है.

1977 से लेकर 2013 के बीच हर दशक में वैज्ञानिकों ने बच्चियों के शरीर में आने वाले बदलावों की स्टडी की. उन्होंने पाया कि हर दस साल में, लड़कियों के शारीरिक विकास की गति तीन महीने तेज हो रही है. अब तक के चार दशकों में लड़कियों के शारीरिक विकास में एक साल की तेजी आई है. उदाहरण के तौर पर जहां पहले वो 14 या 15 साल की उम्र में ‘बड़ी’ हुआ करती थीं, अब 13 या 14 साल में हो रही हैं.

क्या है लड़कियों के ‘बड़े होने’ का पैमाना?

शारीरिक विकास. प्रजनन अंगों का बढ़ना और सेंसिटिव होना. प्राइवेट पार्ट्स पर बाल आना. आवाज़ का बदलना. उम्र के साथ ये चीज़ें लड़कों और लड़कियों दोनों में होती हैं. ये इस बात के लक्षण हैं कि शरीर में हॉर्मोन्स बढ़ रहे हैं. उसकी वजह से बदलाव आ रहे हैं. लड़कियों की प्यूबर्टी (शारीरिक विकास) मापने का अभी तक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला पैमाना हुआ करती थी उनकी माहवारी. यानी पीरियड्स. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने तय किया कि प्यूबर्टी नापने के लिए वो स्तनों के टिशू की ग्रोथ मापेंगे. ये अपने आप में इस तरह की पहली स्टडी है.

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पहले लोग ये मानते थे कि पीरियड आना ही सेक्सुअल ग्रोथ की निशानी है लड़कियों में, और उसी से मापा जाता था कि किस उम्र से लड़कियों में हॉर्मोन्स का स्तर बदलना शुरू होता है. लेकिन अब इस ब्रेस्ट टिशू में होने वाली ग्रोथ से मापा जाने लगा है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

क्या बताया गया है इस स्टडी में?

जामा पीडियाट्रिक्स नाम के पोर्टल पर छपी इस स्टडी में बताया गया है कि 30 लड़कियों के सैम्पल साइज पर की गई इस रीसर्च में क्या पता चला. सबसे महत्वपूर्ण बातें जो पता चलीं, वो ये हैं:

# अलग-अलग देशों में लड़कियों के प्यूबर्टी तक पहुंचने की उम्र अलग-अलग है. जैसे यूरोप में 10 से 11 साल. अमेरिका में आठ से नौ साल. अफ्रीका के कई देशों में 10 से 13 साल भी है. ये इस पर भी निर्भर करता है कि लड़कियों को खाना-पीना कैसा मिल रहा है.

# इसके पीछे एक कारण बच्चों में बढ़ता मोटापा भी हो सकता है.

# पर्यावरण में बढ़ता पॉल्यूशन और खाने-पीने में बढ़ता केमिकल भी बच्चियों के शरीर में बनने वाले हॉर्मोन्स पर असर डालता है. इसकी वजह से भी उनकी प्यूबर्टी जल्दी आ रही है, ऐसा हो सकता है.

# ब्रेस्ट के जल्दी विकसित होने का लड़कियों की सेहत पर क्या और कितना असर पड़ता है, ये बताने वाली स्टडीज अभी काफी नहीं हैं. लेकिन जल्दी पीरियड्स आने की कंडीशन को लेकर ये जरूर बताया गया है कि ये मोटापे और दिल की बीमारियों से जुड़ी हुई है.

# पीरियड्स को प्यूबर्टी का मापक मानना दिक्कत भरा है. क्योंकि ये कई दूसरे मापकों की तुलना में देरी से शुरू होता है. यही नहीं, पिछले कुछ दशकों में पीरियड्स आने की उम्र लगभग स्थिर रही है.

90 के दशक में अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने 17,000 लड़कियों पर स्टडी की. पाया कि श्वेत लड़कियों का ब्रेस्ट डेवेलपमेंट औसत 10 साल की उम्र में शुरू हो रहा है, वहीं अश्वेत लड़कियों के लिए ये उम्र नौ साल थी. जब ये स्टडी हुई और इसके रिजल्ट आए, डॉक्टर्स को बहुत अचम्भा हुआ. क्योंकि अब तक वो यही माने बैठे थे कि लड़कियों में प्यूबर्टी की शुरुआत कम से कम 11 साल की उम्र तक शुरू होती है. जर्मन रिसर्चर्स के मुताबिक़, 1860 में लड़कियों में प्यूबर्टी शुरू होने की उम्र 16.6 साल थी. 1920 में ये 14.6 साल थी. 1950 में ये 13.1 साल हो गई. 1980 आते-आते ये घटकर 12.5 साल हुई. 2010 में ये 10.5 साल रह गई थी.

ये अलग-अलग आंकड़े यही बताते हैं, कि लड़कियों में स्तनों का विकास जल्दी हो रहा है. उनकी सेक्सुअल मैच्योरिटी जल्दी शुरू हो रही है. अलग-अलग देशों की लड़कियों में थोड़ा-बहुत फर्क देखने को मिल सकता है. लेकिन ट्रेंड कमोबेश हर जगह यही है.


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