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कोरोना वायरस से खुद को बचाते हुए कहीं आप इस बीमारी के करीब तो नहीं आ रहे?

बात फ़रवरी की है. आंध्रप्रदेश में एक जिला है चित्तूर. यहां एक 54 साल के आदमी ने सुसाइड कर लिया. वजह? उसे लगा कि उसे कोविड-19 है. आदमी को खांसी, ज़ुकाम था. डॉक्टर ने इसलिए उसे मास्क पहनने की हिदायत दी. साथ ही ये यकीन भी दिलाया कि उसे कोरोना वायरस नहीं है. पर वो आदमी इतना ज़्यादा घबरा गया कि उसने डॉक्टर्स की भी न सुनी. मान लिया कि उसे कोविड-19 हो चुका है. कि वो एक ख़तरा है. अपने परिवार और गांववालों के लिए. उसने सबको खुद से दूर रहने को कहा. सबको बचाने के लिए आत्महत्या कर ली.

जो लोग कोरोनावायरस से ग्रसित नहीं हैं, वो उसके डर से जूझ रहे हैं. और ये कोई आम डर नहीं है. इसको बाकायदा एक नाम दिया गया है. ‘कोरोना स्ट्रेस’. या ‘कोरोना एंग्जायटी’.

क्या है ‘कोरोना स्ट्रेस’

कोरोना को लेकर लोगों में हद से ज़्यादा डर भर गया है. और इसके कारण हो रहा है ‘कोरोना स्ट्रेस’. इसका सीधा असर पड़ रहा है आपकी मानसिक हालत पर.

हमने बात की डॉक्टर निमेश देसाई से. वो एक मनोचिकित्सक हैं. साथ ही मानव व्यवहार एवं सम्बद्ध विज्ञान संस्थान के डायरेक्टर भी हैं.

डॉक्टर निमेश देसाई, मनोचिकित्सक, डायरेक्टर, मानव व्यवहार एवं सम्बद्ध विज्ञान संस्थान.

उन्होंने हमें बताया-

‘कोरोना स्ट्रेस. बहुत लोग इस से ग्रसित हैं. आसान भाषा में कहें तो ये कोरोना वायरस को लेकर बैठे डर के कारण है. जैसे कहीं हमें तो कोरोना नहीं हो गया? हो गया तो क्या होगा? मेरे परिवारवाले या दोस्तों को हो गया तो? ये सोच-सोचकर लोग डर रहे हैं. स्ट्रेस ले रहे हैं. आपको अंदाज़ा नहीं है कि लोग किस हद तक स्ट्रेस ले रहे हैं. इतना घबरा रहे हैं कि उन्हें एंग्जायटी हो रही है. और इसका असर पड़ रहा है उनकी हेल्थ पर. उनकी मेंटल हेल्थ पर. और हां, उनके इम्यून सिस्टम पर.’

ये रहे कुछ उदाहरण

#1. 29 साल की अंबिका नॉएडा के मीडिया हाउस में काम करती हैं. अंबिका ने बताया-

‘मेरा सिर दर्द से फट रहा है. जहां देखो वहां कोरोना की बातें हो रही हैं. कुछ भी छूने, किसी से भी मिलने में डर लग रहा है. बहुत बंधा हुआ महसूस हो रहा हो. ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया खत्म हो रही है. बहुत डिप्रेसिंग लग रहा है. न कुछ खाने का मन कर रहा है. न कुछ करने का.’

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 इतनी टेंशन नहीं लेने का!

#2. 45 साल की फ़ातिमा हाउसवाइफ हैं. लखनऊ में रहती हैं. उन्होंने बताया-

‘मैं तो घर से बाहर निकल ही नहीं रही. रोज़ एक नई ख़बर आती है. व्हट्सएप और फेसबुक पर रोज़ नए मैसेज आते हैं. पता नहीं क्या सच है क्या झूठ. दिमाग में फितूर बैठ गया है. ज़रा सी छींक या खांसी आती है तो डर लगता है. रात में नींद भी नहीं पूरी हो रही.’

इस डर से ग्रसित लोग बहुत हैं. शायद आप भी. तो आते हैं सबसे ज़रूरी बात पर.

कैसे निपटें ‘कोरोना स्ट्रेस’ से

डॉक्टर निमेश देसाई ने हमें कुछ टिप्स बताईं:

-जो चीज़ आपके कंट्रोल में है, उसपर फोकस करिए. जैसे, सफ़ाई. अपने आसपास सफ़ाई रखिए. कोरोना से बचने के जो सही उपाय बताए जा रहे हैं, उन्हें सख्ती से फॉलो करिए.

-सोशल मीडिया और मीडिया से थोड़ी दूरी बना लीजिए. जो चीज़ आपके कंट्रोल में नहीं है, उसके बारे में हर मिनट सुनने से या पढ़ने पर आपको स्ट्रेस होगा. उससे निपटने के लिए ज़रूरी है कि आप अपने दिमाग को थोड़ा रेस्ट दीजिए.

-अफ़वाहों पर यकीन मत करिए. ये आपको और डरा देंगी. अगर आपको कुछ नया पता चलता है, जिससे आपको स्ट्रेस हो रहा है तो किसी एक्सपर्ट से बात करिए. अपनी ग़लतफ़हमी दूर करने की कोशिश करिए.

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  कोरोना वायरस को लेकर सही जानकारी जुटाइए.

-अगर आपको दुख, रोना, डिप्रेशन, गुस्सा, हताशा जैसी फीलिंग्स महसूस हो रही हैं तो उन्हें कहीं लिखिए. लिखिए आपको क्या महसूस हो रहा है.

-सोशल मीडिया पर कोविड-19 के बारे में पढ़ने से बेहतर है आप वो काम करिए जिससे आपको शांति मिलती है. अच्छा लगता है. जैसे फ़िल्में देखिए. गाने सुनिए. किताबें पढ़िए. सोइए. इसे अपने लिए एक डाउन टाइम की तरह देखिए. यानी इस दौरान वो करिए जिसे करना का समय आपको वैसे नहीं मिलता था.

-अपने दोस्तों और परिवारवालों से बात करते रहिए.

-जमकर आराम करिए.

-हेल्दी खाना खाइए.

-एक्सरसाइज करिए.

-और मुद्दों के बारे में सोचिए. कोरोना के अलावा. उनपर बात करिए.

-पॉजिटिव सोचिए.

-सही जानकारी हासिल करिए.

ज़रूरी बात

कोविड-19 एक सीरियस इन्फेक्शन है. इससे दुनियाभर में सात हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं. भारत में तीन. इसलिए ज़रूरी है कि कोविड-19 से बचने के जो उपाय बताए जा रहे हैं, उनपर अमल हो. ज़रूरी है होशियार रहना. पैनिक करना नहीं. क्योंकि ये ठीक हो सकता है.


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