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दलितों के नाम पर पैसा पीट रही थी ये कंपनी, लोगों ने आईना दिखा दिया

एक ब्रैंड है- हाती चाय. अमेरिका के लॉस एंजेल्स शहर में. इन्होंने निकाली एक अंगूठी. दो हजार डॉलर की. भारतीय करेंसी में डेढ़ लाख रुपए. अब इस अंगूठी पर इतना बवाल मचा कि ब्रैंड को न सिर्फ इस अंगूठी का नाम बदलना पड़ा, बल्कि माफ़ी भी मांगनी पड़ी.

इस अंगूठी का नाम उन्होंने रखा – दलित रिंग

Haati Chai 1
वो अंगूठी जिससे ये पूरा मामला शुरू हुआ.

इसके डिस्क्रिप्शन में उन्होंने लिखा:

दलित रिंग में कच्चे, बिना पॉलिश किए हुए हीरे हैं. जो कई लोगों को सुंदर नहीं लगते, क्योंकि उन्हें ‘परफेक्टली’ चमकाए किए हुए हीरे चाहिए होते हैं. दलित जाति की ही तरह दलित रिंग बिलकुल यूनिक है और बेहद सुंदर है.

लोगों ने इस पर हाती चाय को आड़े हाथों लिया. सोशल मीडिया पर इसकी काफी आलोचना हुई. इस बात पर भी कि जब अमेरिका में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ मुद्दा चल रहा है, तब वहां तो इस कंपनी ने उनका समर्थन किया. लेकिन वहीं भारत में दलित समुदाय के अनुभवों और उनके दमन को ये बेच रहे हैं.

कामना सिंह दिल्ली यूनिवर्सिटी में रीसर्च स्कॉलर हैं. पढ़ाती भी हैं. दलित समुदाय से हैं. उन्होंने अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट डाला. उन्होंने लिखा,

सबसे पहले तो दलित टर्म किसी एक ख़ास जाति के लिए इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि कई जातियों की सामूहिक पहचान के लिए इस्तेमाल होता है. इन जातियों के लोगों को ‘प्रदूषित’ माना जाता है और इन्हें हिन्दू समाज में अछूत का स्थान देकर परे कर दिया जाता है. और ये न भूलिए कि वो भारत की ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था के तहत नहीं आते.

मेरा सबसे पहला ऑब्जेक्शन इस बात से है कि हाती चाय ने दुनिया के सबसे ज्यादा हाशिए पर धकेले जा चुके समुदायों में से एक को महज गहने के एक टुकड़े तक सीमित कर दिया. एक ऐसी अंगूठी बनाई जो 2,000 डॉलर की कीमत की है. उन्होंने दलित आइडेंटिटी के साथ जुड़े सदियों के लगातार दमन, पीढ़ियों के ट्रामा, भेदभाव और स्टिग्मा को एक ‘सुंदर’ दिखने वाली अंगूठी तक सीमित कर दिया. इस ब्रैंड ने समुदाय को अपने फायदे के लिए ऑब्जेक्टिफाई कर दिया. विडंबना तो ये है कि दलित समुदाय के अधिकतर लोग इस चीज़ को खरीद भी नहीं पाएंगे, जो उनका प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है.

एक और यूजर ने लिखा,

प्रिविलेज रखने वाले लोग भला और कैसे दमित लोगों को अपने काम में लाएंगे. सभी लोककला वाले बिजनेस इसी तरह के एप्रोप्रिएशन और शोषण पर आधारित हैं, चाहे वो कपड़े हों, क्राफ्ट्स हों या फिर वेलनेस वाले एजेंडा.

Comment Fb 2
फेसबुक कमेन्ट.

एक और कमेंट आया,

शायद जो भारतीय/बांग्लादेशी डिजाइनर इसके पीछे है, उसने कभी या तो भारत नहीं देखा या कभी दलितों के साथ काम नहीं किया. उन्हें ये बात सिखाना ज़रूरी है कि इस तरह के नाम देना कितना गलत है.

Comment Fb
फेसबुक कमेन्ट.

जब ये आलोचना शुरू हुई, तो हाती चाय ने माफ़ी मांगते हुए इन्स्टाग्राम पोस्ट डाला. उसमें लिखा,

इस अंगूठी का मकसद हाशिए पर धकेल दिए गए लोगों के संघर्ष को सामने लाना है. मेरा उद्देश्य बिलकुल भी ढंग से नहीं पहुंच पाया लोगों तक. बहाने बनाने की जगह अंगूठी का नाम ‘देवी रिंग’ कर दिया गया है. उदा देवी के सम्मान में. वो एक दलित महिला योद्धा थीं, दलित वीरांगनाओं में से एक. एक ऐसी विद्रोही, जिन्होंने ब्रिटिश दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ी. ये नाम हमारे मिशन और उद्देश्य के ज्यादा करीब है. हमारी दक्षिण एशियाई कम्यूनिटी के बीच हाशिये के लोगों के बारे में जानकारी लाना ही मेरा उद्देश्य था और मैं उससे दूर नहीं हट सकती. लेकिन ये ज़रूर सुनिश्चित कर सकती हूं कि मैं साफ़ और प्रभावी तरीके से अपनी बात रख सकूं.

Haati Chai Apology
ब्रैंड का माफ़ीनामा.

ब्रैंड की इस माफ़ी के ऊपर भी लोगों के रिएक्शन आए.

एक यूजर ने लिखा, इरादे और उनके असर के बीच बहुत फर्क होता है. एक खास समुदाय पर रोशनी डालना बिना उसकी मदद के रास्ते ढूंढे, ये गलत है. दलितों का लंबा इतिहास रहा है दमन और शोषण का शिकार होने का. और ये उनकी मदद बिल्कुल भी नहीं करता. अगर आप उनके इतिहास को देखते, तो आप उन संसाधनों के बारे में भी जानकारी पा लेते, जिससे आप उनकी मदद कर सकें, अपनी ये अंगूठी बेचने से पहले.

Haati Chai Comm 1
यूजर कमेन्ट.

कुछ कमेंट्स में कहा गया,

आप कह रहे हैं कि आप हमें सुन रहे हैं. लेकिन आप नहीं सुन रहे हैं. ये खुद की मदद करने वाला, जल्दबाजी में रिएक्शन के तौर पर दिया गया माफीनामा इसे और बुरा बना देता है. अपने कहने भर के ‘नेक इरादों’ के साथ दलित जिंदगियों और इतिहास को वस्तु की तरह बनाकर उनसे पैसा पीटना कहीं ज्यादा नुकसानदायक है. आप अभी भी नहीं सुन रहे हैं.

Haati Chai Comm 2
यूजर कमेन्ट. इस तरह के कई कमेंट्स  पोस्ट पर आए. सभी का कहना था कि दलित समुदाय को एक वस्तु की तरह ट्रीट किया जा रहा है . उसे कमर्शियलाइज किया जा रहा है. 

फिलहाल इस ब्रैंड के पेज से अब ‘देवी रिंग’ भी हटा ली गई है.


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