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'परंपरा' के नाम पर राह चलती लड़की को किडनैप करते हैं, रेप कर जबरन शादी रचाते हैं

मध्य एशिया में एक देश है किर्गिस्तान. इसी साल अप्रैल के महीने में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक का एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में कुछ लोग एक लड़की को किडनैप कर रहे थे. कुछ दिन बाद इस लड़की की लाश एक दूसरी कार में मिली. उसकी पहचान 27 साल की एजादा केनेतबेकोवा के तौर पर हुई. वीडियो में गाड़ी दिखने के बाद भी पुलिस उसका पता नहीं लगा पाई. किडनैप करने वालों ने ही लड़की की हत्या कर दी.

अब सवाल आता है कि आखिर लड़की की हत्या क्यों हुई? अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की ने अपनी जबरन शादी का विरोध किया. उसने अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागने की कोशिश की. जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई. इससे पहले साल 2018 में किर्गिस्तान में एक 20 साल की लड़की की हत्या कर दी गई थी. उसने भी अपनी जबरन शादी से इनकार कर दिया था.

देश की राजधानी में पहले एक लड़की की किडनैपिंग और फिर हत्या ने लोगों को सड़क पर ला दिया. उन्होंने किर्गिस्तान की उस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके तहत किडनैपिंग के जरिए शादियां होती हैं. इस प्रथा को ‘अला कचू’ कहा जाता है. हालांकि, देश में इस प्रथा के खिलाफ कानून है. लेकिन लोगों की सोच के सामने ये कानून काम नहीं करता है.

क्या है ‘अला कचू’?

बताया जाता है कि किर्गिस्तान में एक कहावत बहुत प्रचलित है. वो कहावत है- एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत रोने से होती है. किर्गिस्तान में लगभग 65 लाख लोग रहते हैं. आमतौर पर शादी के लिए लड़की की किडनैपिंग सार्वजनिक जगहों से ही होती है. मानवाधिकार संस्थान रेस्टलेस बींग्स के मुताबिक, सबसे पहले लड़का उस लड़की का पता लगाता है, जिससे उसे शादी करनी होती है. लड़की का पता लगाने के बाद लड़कों का एक समूह कार से उसके पास जाता है. उस लड़की को जबरन गाड़ी में बिठा लिया जाता है. इस दौरान वो चीखती-चिल्लाती है. लेकिन कोई उसकी मदद नहीं करता.

लड़की को उस लड़के के घर ले जाया जाता है, जो उससे शादी करना चाहता है. घर की कोई महिला लड़की से बात करती है, उसे शादी के लिए मनाने की कोशिश करती है. यही वो वक्त होता है, जब लड़की के घरवाले उसे बचाने की कोशिश करते हैं. कई लड़कियों को बचा भी लिया जाता है. हालांकि, ज्यादातर मामलों में लड़कियां नहीं बच पातीं. उनके परिवारों को लगता है कि लड़की को वापस लाने पर उनकी इज्जत चली जाएगी. उनके ऊपर एक ‘प्रयोग’ की जा चुकी लड़की को घर में रखने का ‘कलंक’ लग जाएगा.

Ala Kachuu प्रथा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करतीं किर्गिस्तान की महिलाएं. (फोटो: एपी)
Ala Kachuu प्रथा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करतीं किर्गिस्तान की महिलाएं. (फोटो: एपी)

रिपोर्ट कहती है कि कई बार जब बात करने से लड़कियां शादी करने के लिए राजी नहीं होतीं, तो उनके खिलाफ हिंसा होती है और उनका बलात्कार किया जाता है. मानवाधिकार संगठन रेस्टलेस बींग्स के अनुमान के मुताबिक, किर्गिस्तान में हर साल ऐसे करीब 2,000 बलात्कार होते हैं. हालांकि, संस्थान का कहना है कि यह रिपोर्टेड संख्या, असल संख्या से काफी कम है.

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था विमेन सपोर्ट सेंटर के मुताबिक, किर्गिस्तान में हर साल लगभग 12 हजार ऐसी शादियां होती हैं. हालांकि, यह आंकड़ा भी असल आंकड़े से कम है. संस्था के मुताबिक, लड़कियों की किडनैपिंग इसलिए होती है क्योंकि लड़कों को अपनी मर्दानगी को साबित करना होता है. वहीं, ऐसे शादी करने पर लड़कों को मेहर के तौर पर लड़कियों को धनराशि भी नहीं देनी पड़ती.

किडनैपर पतियों को मिल जाती है स्वीकृति

किडनैपिंग के बाद कई महिलाएं शादी के लिए हां कर देती हैं. उन्हें लगता है कि यही प्रथा है और उनकी शादी ऐसे ही होनी है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान द गार्डियन में एक ऐसी ही कहानी की जिक्र है. बात साल 1996 की है. सर्दियों की दोपहर में किर्गिस्तान के अतबाशी गांव में रहने वाली इसूलूलू अपनी चाची के घर से वापस लौट रही थी. उसके हाथ में कुछ खाने का सामान था. तभी इसूलूलू को अपने सामने एक गाड़ी आती हुई दिखी.

उस कार में चार लोग बैठे थे. देखते ही देखते गाड़ी इसूलूलू के बहुत नजदीक आ गई. फिर एकदम बगल में रुक गई. पीछे बैठा एक युवक गाड़ी से उतरा. उसने इसूलूलू को धक्का देकर गाड़ी में बिठा दिया. इसूलूलू के हाथ से खाने का सामान वहीं गिर गया. वो खूब चिल्लाई, रोई और गिड़गिड़ाई भी. लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा.

जिस व्यक्ति ने इसूलूलू का अपहरण किया, वो जल्द ही उसका पति बन गया. शादी के दिन इसूलूलू को पता चला कि उसका होने वाला पति उसे किडनैप नहीं करना चाहता था. वो जिस लड़की को किडनैप करना चाहता था, वो दिखी नहीं. ऐसें में शादी के दबाव के चलते व्यक्ति ने इसूलूलू को ही किडनैप कर लिया. इसूलूलू आज भी खुद को किडनैप करने वाले अपने पति के साथ रहती है. दोनों के चार बच्चे हैं.

बहुत ही कम ऐसा होता है कि जब Ala Kachuu का शिकार हुईं युवतियों को मदद मिल पाती है. ऐसे में वे अपने किडनैपर को ही अपने पति के तौर पर स्वीकार करने के लिए मजबूर हो जाती हैं. कई यह भी मान लेती हैं कि यह एक प्रथा है और उनकी शादी ऐसे ही होनी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ट्विटर)
बहुत ही कम ऐसा होता है कि जब Ala Kachuu का शिकार हुईं युवतियों को मदद मिल पाती है. ऐसे में वे अपने किडनैपर को ही अपने पति के तौर पर स्वीकार करने के लिए मजबूर हो जाती हैं. कई यह भी मान लेती हैं कि यह एक प्रथा है और उनकी शादी ऐसे ही होनी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ट्विटर)

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, कभी-कभी लड़का और लड़की जानबूझकर इस प्रथा में भाग लेते हैं. वो बस अपनी शादी की प्रक्रिया को तेज करना चाहते हैं. हालांकि, विमेन सपोर्ट सेंटर के मुताबिक किडनैप की गई लगभग हर लड़की की मर्जी के बिना उसकी शादी होती है. लगभग 80 फीसदी युवतियां इसे स्वीकार भी कर लेती हैं. ऐसा ज्यादातर माता-पिता की सलाह के बाद होता है.

यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक 15 से 19 साल की उम्र में प्रेगनेंट हो जाने वाली लड़कियों की संख्या क्षेत्रीय आधार पर किर्गिस्तान में सबसे ज्यादा है. यही नहीं, 13 फीसदी शादियां लड़कियों के 18 साल के होने से पहले हो जाती हैं. जबकि 18 साल से पहले शादी गैरकानूनी है.

कानून तो है, लेकिन…

इस प्रथा के खिलाफ किर्गिस्तान में साल 1994 में कानून बना था. हालांकि, इसके तहत सजा का जो प्रावधान किया गया, वो मामूली चोरी के अपराध से भी कम था. देश में हुए लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद साल 2013 में इस कानून में संशोधन किया गया. अब इस संशोधित कानून के तहत दस साल कैद और 25 डॉलर तक की सजा का प्रावधान है. हालांकि, इस संशोधन के बाद भी युवतियों की किडनैपिंग रुक नहीं रही है. इसके पीछे देश की सरकार की तरफ से इच्छाशक्ति की कमी है.  और इच्छाशक्ति की कमी की वजह को अगर पुरुषवाद माना जाए, तो ये गलत नहीं होगा.

साल 2011 में देश के राष्ट्रवादी राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने संविधान की प्रस्तावना को पेश किया. बाद में इस प्रस्तावना को इसी साल हुए जनमत संग्रह के तहत मंजूरी मिल गई. इस प्रस्तावना में किर्गिस्तान के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर दिया गया. इस प्रस्तावना को ‘अला काचू’ जैसी प्रथाओं को बढ़ावा देने के तौर पर देखा गया.


दूसरी तरफ किर्गिस्तान की पुलिस इस प्रथा का शिकार हुईं महिलाओं की बात नहीं सुनती. द गार्डियन की रिपोर्ट बताती है कि साल 2018 में पुलिस स्टेशन में ही एक लड़की की हत्या कर दी गई. वो 20 साल की थी और अपनी किडनैपिंग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गई थी. पुलिस ने उसकी सहायता करने से मना कर दिया था. इसी बीच उसे किडनैप करने वाला व्यक्ति आया और उसकी हत्या कर दी गई. वो लड़की किसी और से शादी करना चाहती थी.

रिपोर्ट्स यह भी हैं कि इस प्रथा का शिकार होने से बचने के लिए किर्गिस्तान की लड़कियां लगातार देश छोड़ रही हैं. या देश में ही ऐसे स्थानों पर जा रही हैं, जहां यह प्रथा उतनी प्रचलित नहीं है. यही नहीं, इस प्रथा की वजह से उनके गर्भ पर भी असर पड़ रहा है. यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक जिन औरतों का अपहरण कर उनकी जबरन शादी कराई जाती है, उनके द्वारा जन्म दिए गए बच्चों का वजन बाकी से बच्चों से कम होता है क्योंकि इस प्रथा का शिकार हुई लड़कियां ज्यादा तनाव में रहती हैं.

विरोध और जागरूकता अभियान

किर्गिस्तान में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस प्रथा के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं. द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक तात्याना जेलेन्सकाया नाम की आर्टिस्ट एक मानवाधिकार संगठन के साथ काम करती हैं. इस संगठन का नाम ओपन लाइन फाउंडेशन है. यह संगठन इस प्रथा का शिकार हुई लड़कियों की न केवल काउंसलिंग करता है बल्कि उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करता है. तात्याना जेलेन्सकाया इन कामों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं.

इसके अलावा लोगों को जागरुक करने के लिए तात्याना जेलेन्सकाया ग्राफिक आर्ट भी बनाती हैं. उन्होंने एक वीडियो गेम भी बनाया है. जो लोगों को यह समझाने की कोशिश करता है कि किडनैपिंग कोई प्रथा नहीं, बल्कि अपराध है. रिपोर्ट के मुताबिक किर्गिस्तान में यह गेम बहुत पॉपुलर हुआ है. लाखों लोग इसे डाउनलोड कर चुके हैं. इस गेम में यूजर के बेस्ट फ्रेंड को किडनैप कर लिया जाता है और यूजर को इसे कैद से मुक्ति दिलानी होती है.

वीडियो गेम का स्क्रीनशॉट. इसके तहत यह बताने का प्रयास किया गया है कि Ala Kachuu कोई प्रथा नहीं बल्कि अपराध है. इस गेम को किर्गिस्तान में अच्छी खासी लोकप्रियता मिली है. (फोटो: ट्विटर)
वीडियो गेम का स्क्रीनशॉट. इसके तहत यह बताने का प्रयास किया गया है कि Ala Kachuu कोई प्रथा नहीं बल्कि अपराध है. इस गेम को किर्गिस्तान में अच्छी खासी लोकप्रियता मिली है. (फोटो: ट्विटर)

इसी तरह से किर्गिस्तान में आठ लड़कियों का एक समूह है. इस समूह का प्रमुख उद्देश्य अगले साल तक किर्गिस्तान की पहली सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लॉन्च करना है. इस ग्रुप की लड़कियां इस मिशन को अंजाम देने की तैयारी में जुटे रहने के साथ एक और जिम्मेदारी निभा रही हैं. ये लड़कियां गांव-गांव जाती हैं और वहां की लड़कियों को शिक्षित करती हैं. साइंस, मैथ्स और टेक्नॉलजी पढ़ाती हैं. साथ ही साथ औरतों की आत्मनिर्भरता और आजादी के बारे में भी लड़कियों को बताया जाता है.

इन आठ लड़कियों में से एक ने द गार्डियन को बताया कि पहले वो भी इन्हीं लड़कियों की तरह थी. जिसका एकमात्र सपना किसी अच्छे खासे लड़के से शादी करना था. लेकिन फिर उसे एक कंप्यूटर कंपनी में ट्रेनिंग मिली. जहां से स्पेस प्रोग्राम के बारे में पता चला और फिर उसे अहसास हुआ कि उसका उद्देश्य सिर्फ शादी करना नहीं, बल्कि अपने बलबूते कुछ हासिल करना भी है.


 

वीडियो- तालिबान ने जिसके जरिए खुद को प्रोग्रेसिव बताया, उस पत्रकार ने अफगानिस्तान क्यों छोड़ा?

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