Submit your post

Follow Us

जिस इवेंट में CJI ने औरतों के अधिकारों पर बात की, उसकी बार काउंसिल ने आलोचना क्यों कर दी?

न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी. इस मुद्दे पर बहस फिर तेज़ हुई है. 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की हालिया नियुक्तियों के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट की महिला अधिवक्ताओं ने एक सम्मान समारोह आयोजित किया था. इस समारोह में जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं का 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व उनका अधिकार है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने इस कार्यक्रम की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि बार असोसिएशन ने 13 महिला वकीलों के नाम का सुझाव दिया था कि उन्हें हाईकोर्ट में बतौर जज एलिवेट किया जाए. उन्होंने लिखा कि उनके सुझाव वाली लिस्ट कॉलेजियम के पास अटकी पड़ी है. और इसे लेकर CJI बार असोसिएशन से मिलने का वक्त ही नहीं दे रहे हैं.

कार्यक्रम में CJI Ramana ने क्या कहा?

समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना भी मौजूद थे. CJI Ramana ने इस कार्यक्रम के दौरान कहा,

“अब समय आ गया है कि न्यायपालिका में महिलाओं का 50% प्रतिनिधित्व हो. यह कोई छोटा मुद्दा नहीं है, बल्कि हज़ारों सालों के दमन का मुद्दा है. यह कोई परोपकार की बात नहीं है. यह एक हक़ की बात है और आप इसके हक़दार हैं. दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ चीज़ें बहुत देर से समझ में आती हैं.”

प्रधान न्यायाधीश ने हज़ारों वर्षों से चले आ रहे महिलाओं के दमन को स्वीकार करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम सर्वोच्च न्यायालय और अन्य न्यायालयों में महिलाओं की मौजूदगी सुनिश्चित करवाएं और बढ़ाएं.

“न्यायपालिका के निचले स्तर में 30% से कम महिला जज हैं. हाईकोर्ट में 11.5% और सुप्रीम कोर्ट में भी सिर्फ़ 11-12 फ़ीसदी महिला जज हैं. बहुत कम महिलाओं को शीर्ष पदों पर जगह मिलती है. अधिकांश महिलाएं अभी भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं. बहुत मुश्किलों के बाद, हम अभी भी सुप्रीम कोर्ट की पीठ में महिलाओं का केवल 11-12% प्रतिनिधित्व हासिल कर पाए हैं.”

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा,

“मैं इस बात से सहमत हूं कि एक असहज माहौल, बुनियादी ढांचे की कमी, शौचालयों की कमी, क्रेच की कमी, बैठने की जगह की कमी, भीड़ भरे कोर्ट रूम जैसे कुछ प्रमुख मुद्दे हैं जो सिस्टम को महिला वक़ीलों के लिए प्रतिकूल बनाते हैं. लेकिन इन्हें सुधारने की ज़रूरत है”

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि अदालतों को इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने की सख्त ज़रूरत है. उन्होंने बताया कि देश में 6000 अदालतें हैं. इनमें से 22 प्रतिशत में महिलाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है.

तस्वीर, 'लेडी एडवोकेट्स ऑफ़ सुप्रीम कोर्ट' द्वारा आयोजित सम्मान समारोह की है
(तस्वीर, ‘लेडी एडवोकेट्स ऑफ़ सुप्रीम कोर्ट’ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह की है)

 जस्टिस BV Nagratna ने क्या कहा?

CJI के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नागरत्ना ने कहा,

“न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना, व्यापक तरीकों से लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है. न्यायिक अधिकारियों के तौर पर महिलाओं की विज़िबिलिटी कई मायनों में महिलाओं के ज्यादा प्रतिनिधित्व के रास्ते को मज़बूत कर सकती है. सरकार के अंदर भी महिलाओं को फैसला लेने वाले अधिकारों को मज़बूती मिल सकती है. महिला जजों की ज्यादा संख्या और ज्यादा प्रतिनिधित्व, उन महिलाओं को हौसला देता है जो न्याय की मांग करती हैं.”

जस्टिस नागरत्ना ने महिला वकीलों को भी एक खास सलाह दी. उन्होंने कहा कि महिला वकीलों को कानून की सभी शाखाओं में खुद को शामिल करना चाहिए. उन्हें लगातार अच्छा करने के लिए काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब ग्लास सीलिंग तोड़ने का वक्त आ गया है. जस्टिस नागरत्ना ने अपनी स्पीच में जो कुछ भी कहा, उसका सार यही है कि अगर जूडिशियरी में औरतों का प्रतिनिधित्व बढ़ता है, तो इसका असर हर स्तर पर, हर ब्रांच में होगा. फिर चाहे वो सरकार की विधायी और कार्यकारी शाखा ही क्यों न हो.

बता दें कि जस्टिस बीवी नागरत्ना उन नौ जजों में से एक हैं जिन्होंने बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली थी. सितंबर, 2027 में जस्टिस नागरत्ना देश की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बन सकती हैं.


1776 में अमेरिका आज़ाद न हुआ होता तो भारत अंग्रेजों का ग़ुलाम न बनता!

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी गई, 18 साल बाद फैसला आया है

कोर्ट ने एक को फांसी और 12 लोगों को उम्रकैद की सज़ा दी है.

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

नाबालिग 15 साल की है और एक बच्चे की मां बन चुकी है.

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

नौ महीने के अंतराल में एक वीडियो के सहारे बच्ची का रेप करते रहे आरोपी.

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने वाली फातिमा पेशे से वकील हैं.

रेप की कोशिश का आरोपी ज़मानत लेने पहुंचा, कोर्ट ने कहा- 2000 औरतों के कपड़े धोने पड़ेंगे

कपड़े धोने के बाद प्रेस भी करनी होगी. डिटर्जेंट का इंतजाम आरोपी को खुद करना होगा.

स्टैंड अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन शोषण के गंभीर आरोप, उनका जवाब भी आया

इस मामले पर विक्टिम और संजय राजौरा की पूरी बात यहां पढ़ें.

मध्य प्रदेश: लड़की को किडनैप किया, रेप नहीं कर पाए तो आंखों में डाल दिया एसिड

पीड़िता की आंखों की रोशनी चली गई. मामले में दो आरोपी गिरफ्तार.

दिल्ली कैंट रेप केस: आरोपी 9 साल की बच्ची को जबरन पॉर्न दिखाता था, उससे मसाज करवाता था

पुलिस का मानना है कि मौत करंट लगने से हुई ही नहीं.

बेटी को आत्मा से बचाने के नाम पर मां ने रेप के लिए तांत्रिक के हवाले कर दिया!

घटना महाराष्ट्र के ठाणे की है, विक्टिम नाबालिग है.

इंदौरः पब में हो रहा था फैशन शो, संस्कृति बचाने के नाम पर उत्पातियों ने तोड़-फोड़ कर दी

पुलिस ने आयोजकों को ही गिरफ्तार कर लिया. उत्पाती बोले- फैशन शो में हिंदू लड़कियों को कम कपड़े पहनाकर अश्लीलता फैलाई जा रही थी.