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शौचालय में रहने को मजबूर 75 साल की वृद्धा, पैसे नहीं है इसलिए नहीं मिलता सरकारी घर!

कौशल्या देवी. 75 बरस की हैं. बिहार के नालंदा ज़िले के करायपरसुराय प्रखंड के दिरीपर गांव में रहती हैं. रहना शब्द कहना सही नहीं होगा, हम कहेंगे कि किसी तरह अपना जीवन काट रही हैं. सिर पर छत नहीं है, खुद का घर नहीं है, इसलिए एक शौचालय में रहने के लिए मजबूर हैं. उनके साथ आठ-दस बरस की पोती भी रहती है. परिवार में कोई और नहीं है. पति, बेटे, बहू सबकी मौत हो चुकी है.

क्या है मामला?

‘इंडिया टुडे’ के रंजीत कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, दिरीपर के पास के ही गांव में विधायक कृष्ण मुरारी शरण का घर भी है. नालंदा ज़िला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह ज़िला भी कहलाता है. लेकिन फिर भी अभी तक कौशल्या देवी को किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिला है. आवास योजना तो छोड़ दीजिए, और किसी भी दूसरी तरह की सरकारी योजना का भी लाभ उन्हें नहीं मिला है. क्योंकि परिवार में कोई है ही नहीं जो लाभ दिलवा सके. दादी-पोती बड़ी मुश्किल से घर-घर जाकर भीख मांगकर अपना गुज़ारा कर रही हैं.

इलाके के सोशल वर्कर सुनील कुमार बताते हैं कि आवास देने के लिए साल 2017 के बाद से सरकारी कागज़ में दो बार कौशल्या देवी का नाम आया था, लेकिन उनसे बदले में पैसे मांगे गए थे, जो ज़ाहिर है उनके पास नहीं थे, इसलिए उन्हें खुद का घर कभी मिला ही नहीं. वो कहते हैं-

“कौशल्या देवी का 2017 में आवास में नाम आया था, तब जो आवास पर्यवेक्षक थे उनके ज़रिए राशि की मांग हुई. ऐसी महिला जो कुछ शौचालय में रह रही है, वो पैसे कहां से दे पाएगी. दो बार नाम आया. पैसे न देने की वजह से नाम हटा दिया गया. घर में कोई पुरुष नहीं है. दादी और पोती रहती हैं शौचालय में. क्योंकि घर नहीं है. हम कई बार इस मुद्दे को प्रशासन के पास ले जा चुके हैं. कई सारे अधिकारी आकर जा चुके हैं. कुछ नहीं हुआ.”

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सोशल वर्कर सुनील कुमार. (फोटो- रंजीत कुमार)

सोशल वर्कर बता रहे हैं कि अधिकारी आते हैं और चले जाते हैं, कोई कौशल्या देवी की मदद नहीं करता. हमारे देश में, भले ही केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, दावे बड़े-बड़े किए जाते हैं. आंकड़ों में भी बताया जाता है कि बहुत कुछ किया गया है. लेकिन जब आप ज़मीन पर जाते हैं, तो सच्चाई कुछ और ही पता चलती है. ये दावे तब आपको खोखले नज़र आते हैं. अब अगर केवल महिलाओं के मुद्दे पर बात करें, तो इस वर्ग का हितैशी कहलाने के लिए तो समझिए हर नेता के बीच होड़ लगी हुई है. बिहार सरकार भी महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करते देखी और सुनी गई है, लेकिन इसी राज्य में 75 बरस की एक बुज़ुर्ग और 8 साल की एक बच्ची शौचालय में रहने को मजबूर हैं. ये वहीं खाना बनाते हैं और वहीं खाते भी हैं. सोचिए कैसा लगता होगा.


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