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गांधी जी की हत्या पर लिखी ये किताब आप इंडिया क्यों नहीं ला सकते?

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आज महात्मा गांधी की हत्या हुए 71 साल हो जाएंगे. 15 नवंबर, 1949 को नाथूराम विनायक गोडसे और नारायण आप्टे को गांधी जी की हत्या के लिए फांसी पर लटका दिया गया था. सात दशक बीतने के बाद भी गांधी की हत्या के कई राज अनसुलझे हुए हैं.

गांधी जी हत्या की नए सिरे से जांच करवाने के सिलसिले में ‘अभिनव भारत’ नाम के संगठन के ट्रस्टी पंकज फड़णीस ने अक्टूबर 2017 में जनहित याचिका लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के दस्तावेजों की जांच के लिए अमरेंद्र शरण को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था.

8 जनवरी, 2018 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में अमरेंद्र शरण ने कहा था कि गांधी जी की हत्या में नाथूराम के अलावा किसी और शख्स का हाथ होने के कयासों में कोई दम नहीं है. ऐसे में इस मामले को फिर से नहीं खोला जाना चाहिए.

याचिकाकर्ता पंकज फड़णीस
याचिकाकर्ता पंकज फड़णीस

गांधी की हत्या की ‘बुलेट थ्योरी’

अक्टूबर, 2017 में दायर की गई अपनी याचिका में अभिनव भारत के ट्रस्टी पंकज फड़णीस ने बहुचर्चित ‘बुलेट थ्योरी’ का जिक्र किया था. इस थ्योरी के मुताबिक गांधी जी की हत्या के वक़्त उन्हें कुल चार गोलियां लगी थीं. इनमें से तीन गोलियां गोडसे की बैरेटा पिस्टल से निकली थी. गांधी जी के शरीर में लगी चौथी और जानलेवा गोली किसी रहस्यमयी आदमी ने मारी थी. आज तक उस रहस्यमयी आदमी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. अमेंद्र शरण ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस थ्योरी को ख़ारिज कर दिया है.

विनायक दामोदर सावरकर ने 1904 के साल में अभिनव भारत नाम के संगठन की स्थापना की थी. नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे इसी संगठन से जुड़े हुए थे. आजादी के बाद 1952 में इस संगठन का अंत हो गया था. विनायक दामोदर सावरकर भी गांधी जी हत्या के मामले में आरोपी थे. बाद में उन्हें इस मामले में सरकारी गवाह बनने के वजह से बरी कर दिया गया था.

गांधी जी हत्या के मुकदमें की सुनवाई के दौरान नाथूराम गोडसे
गांधी जी हत्या के मुकदमें की सुनवाई के दौरान नाथूराम गोडसे

2008 में इस संगठन को फिर से खड़ा किया गया. हिमानी सावरकर इस संगठन की अध्यक्ष हैं. वो नाथूराम गोडसे की भतीजी हैं और विनायक सावरकर के भतीजे से उनकी शादी हुई है. इस संगठन पर समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मालेगांव बम धमाके और मक्का मस्जिद ब्लास्ट के आरोप लगे थे. मालेगांव बम धमाके के आरोपी कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और असीमानंद भी इसी संगठन से जुड़े हुए थे.

अभिनव भारत गांधी जी की हत्या के मामले को फिर से सार्वजानिक बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश में लगा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में मामले की फिर से जांच की अपील के अलावा इस संगठन के ट्रस्टी पंकज फड़णीस ने 5 जनवरी, 2018 के रोज बॉम्बे हाईकोर्ट में नई जनहित याचिका लगाई थी. इस याचिका में उन्होंने 39 साल पहले छपी एक किताब पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की है. इस किताब का नाम है ‘Who killed Gandhi’.

लौरेस डि सडवांडोर गोवा मूल के पुर्तगाली लेखक थे. वो जिंदगी भर गांधी जी के भक्त रहे. 1963 में उन्होंने ‘Who killed Gandhi’ लिखी. दिसंबर 1979 में भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी करके इस किताब पर रोक लगा दी. उस समय इस किताब को ‘लेस रीसर्च्ड’ (कम शोध वाली) और भड़काऊ कहा गया था. इस किताबी में गांधी जी की हत्या के पीछे अंतर्राष्ट्रीय साजिश होने का अंदेशा जताया गया था. पंकज फड़णीस ने अपनी जनहित याचिका में इस प्रतिबंध को ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर खतरा बताया था.


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