बिरसा मुंडा की पहचान से जुड़े प्रतीकों की राजनीति देश में नई नहीं है. आदिवासियोंके खैरख्वाह बनने की ख्वाहिश जिस नेता ने रखी, साल में कम से कम एक बार बिरसा मुंडाका नाम ज़रूर लेता रहा. लेकिन इन नामलेवा नेताओं ने आदिवासियों का भला कितना किया,ये दूसरी बात है. ये बहस आज फिर इसीलिए हो रही है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी बिरसामुंडा जयंति के मौके पर उनके गांव पहुंच रहे हैं. प्रधानमंत्री का दावा है कि वोखाली हाथ झारखंड नहीं जा रहे हैं. उन्होंने आदिवासी जनजातियों में हाशिये पर रह गएसमाजों के लिए एक नई केंद्रीय योजना का ऐलान किया है. ऐसे में केंद्र की सत्ता मेंरहीं सरकारों ने अब तक क्या-क्या किया, उसका मूल्यांकन ज़रूरी हो जाता है. यही कामहोगा आज दी लल्लनटॉप शो में. देखिए वीडियो.