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हे सलमान फैन्स! कुश्ती में फिल्मी सुल्तान नहीं असली सुल्तान होता है

ऐसा क्यों है, ये यहां पढ़िए.

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26 अगस्त 2016 (अपडेटेड: 26 अगस्त 2016, 08:44 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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सलमान फैन्स से गाली-गलौज भरे ट्वीट मिलने के बाद योगेश्वर ने फेसबुक वीडियो बनाकर सलमान खान के फैन्स को गरियाया. गरियाया क्या, यहां तक कह दिया कि इस देश में कुत्तों को भौंकने का पूरा हक है. वैसे इस देश में पागल ही खिलाड़ी बनते हैं. फिल्म स्टार हो जाना शुरू में मुश्किल है लेकिन एक बार बन गए तो फिर हारना नहीं पड़ता. खेल में बार-बार खेलकर ही जीतना पड़ता है. ऐसा भी सुनने में आया है कि रियो में जब योगेश्वर कुश्ती के लिए आए, तब उनको तेज़ बुखार था. सुपरस्टार की घटिया से घटिया फिल्म भी हुई, तो कब फ्लॉप होती है?

लेकिन देखिए योगेश्वर को क्या-क्या कहा जा रहा है.

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ये तो शालीन ट्वीट हैं, गाली-गलौज वाले ट्वीट ज्यादा हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि सारा ट्विटर ही सलमान का फैन है. कुछ लोगों का मानना है कि शॉर्ट रेंज शूटिंग में चिंकारा मारने की प्रतियोगिता नहीं हो रही थी, कुश्ती हो रही थी.
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असली सुल्तान योगेश्वर और फिल्मी सुल्तान सलमान के फैन्स के बीच मामला तब शुरू होता है, जब योगेश ने सलमान को ओलंपिक का ब्रैंड एंबेसडर बनाने का विरोध किया.
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योगेश्वर के घर ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ स्पर्धाओं से कुल 7 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज पड़े हैं. फिर भी गाली-गलौज झेलना पड़ रहा है, सड़क पर सोए हुए किसी इंसान को नहीं मारा, किसी बेजुबान को नहीं मारा फिर भी. तो जो सयाने हैं वो फिल्म स्टार बनें. क्योंकि इस देश में पागल ही खिलाड़ी बनते हैं.
अब असली सुल्तान योगेश्वर की कहानी 2006 से शुरू करते हैं. 2006 में दोहा एशियन गेम्स के लिए जाने से कुछ ही दिन पहले योगेश्वर के पिता का देहांत हो गया और फिर घुटने की चोट ने रही-सही कसर पूरी कर दी. लेकिन योगेश्वर वहां गए और 60 किलो कुश्ती में कांस्य पदक लेकर आए.
योगेश्वर का अगला पड़ाव था 2008 बीजिंग ओलंपिक. जहां पहलवान जी क्वार्टर फाइनल तक गए. हरियाणा के अखाड़ों में योगेश्वर को पहलवान जी के नाम से जाना जाता है.
India's Yogeshwar Dutt celebrates his victory over North Korea's Jong Myong Ri for the gold medal on the Men's 60Kg Freestyle wrestling at the ExCel venue during the London 2012 Olympic Games
फोटो क्रेडिट: reuters

2009 में योगेश्वर को ऐसी चोट लगी कि इनका करियर लगभग खत्म ही हो गया. जांघ और टांग को जोड़ने वाली हड्डी की चोट. लेकिन योगेश्वर ने वापसी की और 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ में सोना जीता. 2012 लंदन ओलंपिक में भारत का परिचय फितले से हुआ जैसे इस बार प्रोदुनोवा से हुआ है.
 
2012 लंदन ओलंपिक्स में योगेश्वर दत्त. क्रेडिट: reuters
2012 लंदन ओलंपिक्स में योगेश्वर दत्त ब्रॉन्ज मेडल के साथ. क्रेडिट: reuters

फितले यानी टांग में फंसाकर विपक्षी पहलवान को घुमाना और खेल खत्म कर देना. योगेश्वर 4 कुश्तियां जीतकर कांस्य पदक जीत गए. और फिर एशियाड 2014 और कॉमनवेल्थ 2014 दोनों में गोल्ड. इसके बाद चोट की वजह से लगातार 2 साल तक खेल से बाहर रहे. इसके बावजूद ओलंपिक पहुंचे और अपना मुकाबला खेला. रियो ओलंपिक तक योगेश्वर के एक घुटने के 2 और दूसरे के 3 ऑपरेशन हो चुके थे.
छोटी-मोटी चोटों को हमने नहीं गिना है. योगेश्वर अब 33 साल के हो चुके हैं और शायद हम उनको अगले ओलंपिक में गोपीचंद की भूमिका में देखें. हां, सलमान फैन्स भड़का दें तो 'ज़ख्मी शेर कुछ भी कर सकता है' वाली बात हो सकती है. क्यों पहलवान जी?

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