भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन Covaxin की अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई पर WHO ने रोकलगा दी है. रोक लगाने के पीछे WHO ने गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस में कमी काहवाला दिया है. यानी कोवैक्सीन को बनाने के दौरान अच्छे तरीकों का इस्तेमाल में कमीबताई है. UN के माध्यम से इस वैक्सीन की सप्लाई गरीब देशों में की जाती है. WHO कीतरफ से ये फैसला दो अप्रैल को लिया गया है. WHO ने कोवैक्सीन की सप्लाई पर रोकलगाने का फैसला EUL यानी इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग इंस्पेक्शन के बाद किया है. EUL ने14 से 22 मार्च तक कोवैक्सीन का निरीक्षण किया. WHO का कहना है कि EUL की रिपोर्टके आधार पर कोवैक्सीन की सप्लाई का रोक लगाई गई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट केमुताबिक WHO ने कहा है, "भारत बायोटेक GMP में कमियों को दूर करने के लिए प्रतिबद्धहै और वो ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) और WHO को इसके लिए एक प्लान तैयारकरके भी देगा. एहतियात के तौर पर भारत बायोटेक ने निर्यात के लिए कोवैक्सिन के अपनेउत्पादन को बंद करने की बात कही है." आपको बता दें कि 1 अप्रैल को भारत बायोटेक नेएक स्टेटमेंट जारी कर कहा था कि कोवैक्सीन के उत्पादन में बेहतरी के लिए प्रोडक्शनको कुछ समय के लिए धीमा किया जा रहा है. WHO के रोक लगाने के बाद कोवैक्सीन ने अपनेबयान में कहा, "WHO ने जो रिस्क असेसमेंट किया, वो वैश्विक स्तर पर कोवैस्कीन कीकरोड़ों खुराक की आपूर्ति पर आधारित है. इस दौरान कोवैक्सीन ने हर मायने में बेहतरप्रदर्शन किया है." इस पूरे मामले में भारत बायोटेक के लिए राहत की बात ये है किWHO ने कोवैक्सीन की इफिकेसी पर कोई सवाल नहीं उठाया है. WHO ने फिलहाल ये भी साफनहीं किया है कि कोवैक्सीन की GMP में क्या कमी रही है. आपको बता दें कि WHO ने 3नवंबर को कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी.