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चांदीपुरा वायरस क्या है जिसकी चपेट में आकर गुजरात में कई बच्चे बीमार पड़े? पहली मौत की पुष्टि हुई

राज्य सरकार का कहना है कि इस वायरस के अब तक राज्य में 27 संदिग्ध मामले आए हैं, जिसके कारण 14 लोगों की मौत हो चुकी है.

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17 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 17 जुलाई 2024, 12:16 AM IST)
what is chandipura virus
गुजरात में चांदीपुरा वायरस फैलने के बाद सरकार अलर्ट मोड में. (सांकेतिक फोटो)
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गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के संक्रमण से एक चार साल की बच्ची की मौत की पुष्टि हुई है. साबरकांठा के सरकारी अस्पताल में वायरस (Chandipura virus) के संक्रमण से बच्ची की मौत हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने बच्ची के सैंपल में चांदीपुरा वायरस होने की पुष्टि की है. हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि इस वायरस के अब तक राज्य में 27 संदिग्ध मामले आए हैं, जिसके कारण 14 लोगों की मौत हो चुकी है.

राज्य के कई हिस्सों में ये वायरस तेजी से फैल रहा है. राज्य के 12 जिलों से संदिग्ध मामले आ चुके हैं. इंडिया टुडे से जुड़े बृजेश दोसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले साबरकांठा और अरावली में आए हैं. दोनों जगहों से संक्रमण के 4-4 केस आए हैं. अहमदाबाद में भी 2 संदिग्ध केस आए हैं. इसके अलावा महीसागर, खेड़ा, मेहसाणा और राजकोट में भी वायरस के संदिग्ध मामले आए हैं.

संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार लोगों की स्क्रीनिंग कर रही है. गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने मीडिया को बताया कि वायरस के कारण जिन संदिग्ध लोगों की मौत हुई है, उनके सैंपल को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजा गया है. वहीं, अब तक 44 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.

क्या है चांदीपुरा वायरस और ये कैसे फैलता है?

CHPV वायरस Rhabdoviridae फैमिली का वायरस है. Rhabdoviridae फैमिली में वो वायरस भी आते हैं, जिनसे रेबीज होता है. CHPV वायरस मक्खियों और मच्छरों की कुछ प्रजातियों (जैसे, डेंगू वाले एडीज एजिप्टी मच्छर) से फैलता है. वायरस इन मक्खी-मच्छरों की लार ग्रंथि में रहता है और इन मक्खी-मच्छरों के काटने से इंसान इस वायरस से संक्रमित हो सकता है और उसे इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग के एक्टिव टिश्यूज में इन्फ्लेमेशन हो सकता है.

चांदीपुरा वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

वायरस के संक्रमण से बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और ऐंठन, दस्त जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इसके अलावा सांस की समस्या, खून निकला या खून की कमी जैसे लक्षण भी सामने आते हैं. स्टडीज के मुताबिक, इंसेफेलाइटिस के बाद संक्रमण तेजी से बढ़ता है और अस्पताल में भर्ती होने के 24-48 घंटों के बीच मरीज की मौत तक हो सकती है. ये संक्रमण आम तौर पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों में ही फैलता है. इस वायरस के इलाज के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं है. 

चांदीपुरा वायरस कहां से आया?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि साल 1965 में महाराष्ट्र के भंडारा जिले के चांदीपुरा गांव में इस तरह के संक्रमण का पहला मामला सामने आया था. इसलिए इसे चांदीपुरा वायरस नाम दिया गया. इस पहले मामले की जांच के बाद पता चला था कि यह वायरस रेत में घूम रही एक मक्खी के कारण फैला था. वायरस के कारण दिमाग में सूजन और तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस वायरस का सबसे बुरा प्रभाव 2003-04 में देखने को मिला था. तब संक्रमण के कारण महाराष्ट्र, उत्तरी गुजरात और आंध्र प्रदेश में 300 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2004 में जब ये वायरस फैला था तब आंध्र प्रदेश में संक्रमण के कारण 78 फीसदी मृत्यु दर रिकॉर्ड किया गया था. यानी 100 केस में 78 लोगों की मौत हो गई. वहीं, 2003 में संक्रमण के कारण मृत्यु दर 55 फीसदी थी.

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