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सुरंग में फंसे मजदूर नहाते कैसे थे, समय कैसे गुजारा, बाहर आए मजदूर ने सब बताया

उत्तरकाशी सुरंग हादसे में 17 दिनों तक फंसे रहने वाले झारखंड के चमरा उरांव अब सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए हैं. उन्होंने विस्तार से बताया है कि सुरंग के अंदर सबने किस तरह जिंदा रहने की उम्मीद को बनाए रखा. खाना क्या खाया और नहाया कैसे?

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uttarkashi tunnel collapse how workers survived chamara oraon
बाहर निकाले जाने से पहले सुरंग के अंदर ली गई तस्वीर. (फोटो: ANI)
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अरविंद ओझा
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29 नवंबर 2023 (अपडेटेड: 29 नवंबर 2023, 05:57 PM IST)
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उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग (Uttarkashi Tunnel Collapse) से सुरक्षित बाहर आए मजदूरों की कहानियां सामने आ रही हैं. उन्होंने ये 17 दिन कैसे बिताए, इस दौरान आपस में क्या बातें होती थीं, बाहर निकलने की उम्मीद कब-कब टूटी, ये सब मजूदर खुद बता रहे हैं. झारखंड के चमरा उरांव भी इन मजदूरों में से एक हैं. बाहर आने के बाद उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बताया है.

इंडिया टुडे से जुड़े अरविंद ओझा से बातचीत में चमरा उरांव ने बताया कि सुरंग में फंसे होने के दौरान उन्होंने किस तरह जिंदा रहने की उम्मीद को बनाए रखा. ये भी बताया कि बाकी मजदूरों ने किस तरह अपना मनोबल बनाए रखा. उरांव के मुताबिक सभी मजदूर सुरंग के अंदर इधर-उधर भटकते रहते थे. टाइम पास के लिए मोबाइल में लूडो खेलते थे. उरांव ने कहा,

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'अरे निकल ही जाएंगे'

उरांव को उम्मीद थी कि दो से तीन दिनों में सबको बाहर निकाल लिया जाएगा. फिर लगा कि चार से पांच दिनों में निकाल लिया जाएगा. लेकिन ये बोलते-बोलते दिन बढ़ते गए तो घबराहट हुई. लेकिन तब काम आई एकता. उरांव ने बताया,

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उरांव ने आगे बताया कि जब इधर-उधर मशीनें लगीं और पाइप लगा तो उनकी उम्मीदें बढ़ गईं. 

आपस में क्या बात करते थे मजदूर?

सुरंग में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुल 41 मजदूर थे. चमरा उरांव ने कहा कि सब अपनी बात कहते थे और एक-दूसरे की बात सुनते भी थे. सब एक-दूसरे का परिचय देते थे. पूछते थे कि तुम कहां से हो और अपने घर के बारे में भी बताते थे. परिवार की बात होती थी. मनोरंजन के लिए सब लूडो खेला करते थे.

बातचीत में ये भी पता चला कि सुरंग के अंदर मजदूर नहाते कैसे थे. दरअसल सुरंग में ऊपर से टिप-टिप कर पानी गिरता था. सभी इसी पानी से नहाते थे. उरांव ने बताया कि खाने के लिए पैकेट्स में बंद खाना आता था. उसमें फल भी होता था. सुरंग से निकाले जाने के बाद उन्होंने अपने घरवालों से बात की. उन्होंने बताया कि सब लोग परेशान थे, अब ठीक हैं.

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