The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • two time MLA from BSP lives by the roadside in Punjab

सड़क पर परिवार के साथ रहने को मजबूर कांशीराम के असली वारिस!

कांशीराम के परिवार का पक्ष लेने पर पार्टी से निकाल दिए गए थे पूर्व बसपा विधायक शिंगारा.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
अविनाश जानू
23 जून 2016 (अपडेटेड: 23 जून 2016, 09:30 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
हाथी से उतरे स्वामी प्रसाद मौर्या
खबरों में हैं. मायावती की बसपा का साथ छोड़ चुके हैं. मायावती और मौर्य के आरोप-प्रत्यारोप जैसे भारी शब्दों वाली ब्रेकिंग भी खूब चली. पंगे के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौर्य-मायावती दोनों के बीच जो एक बात कॉमन दिखी, वो थे कांशीराम. दोनों नेताओं ने अपनी प्रतिबद्धता कांशीराम की दिखाई दिशा की तरफ होने की बात कही. हालांकि ये पब्लिक है, सब जानती है.
अब जब कांशीराम की दिखाई दिशा की बात निकल ही पड़ी है, तो शिंगारा राम शाहुंग्ग्रा का जिक्र जरूरी है. क्योंकि शिंगारा बसपा की टिकट पर दो बार पंजाब के गृहशंकर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. साल थे 1992 और 1997. लेकिन यही बसपा के पूर्व विधायक आज अपने परिवार के साथ सड़कों पर रहने को मजबूर हैं. वजह वो है, जो मायावती और मौर्य की प्रेस कॉन्फ्रेंस में है और शिंगारा की जिंदगी में. यानी कांशीराम के विचारों को फॉलो करना.
 
Image embed
सड़क के किनारे ही उनका किचन है. जहां उनकी बीवी रोटियां पकाती हैं. MLA साहब का परिवार नहाने-धोने के लिए पास के ही एक सज्जन का बाथरूम यूज करता है. उनका बहुत सा सामान बाहर पड़ा हुआ है, जिसे बचाने के लिए वो लोग तिरपाल से छत बना रहे हैं.
ये परिवार यहां गैरकानूनी रूप से रह रहा था. रविवार को फिर से सरकार ने उन्हें यहां से निकालने की कोशिश की है. इसका वहां बहुत विरोध हुआ और सरकार का इस कदम के लिए पुतला भी फूंका गया.
Image embed

शिंगारा को निकलने के विरोध में सरकार का पुतला फूंकते लोग

पंजाब जैसे राज्य में वो अकेले ऐसे MLA हैं, जिन्होंने अपने लिए बड़ा सा आलीशान बंगला नहीं बनवाया है. उनका कहना है:
Image embed
शिंगारा के दोनों बेटे उनकी थोड़ी आर्थिक मदद करते हैं. मगर वो नाकाफी है. पहले भी उन्हें यहां से निकलने के लिए सरकारी डिक्री वहां की सिविल कोर्ट ने 2005 में जारी की थी. तब भी निकलने के लिए मजिस्ट्रेट के ऑर्डर और पुलिस की मदद ली गई थी. शिंगारा कहते हैं,
Image embed
शिंगारा का बड़ा भाई एक दिहाड़ी मजदूर है और छोटा भाई ग्रीस में मजदूरी करता है.  एक शिंगारा हैं, जो कांशीराम के उसूलों को खुद की जिंदगी में उतारकर सड़क पर रहते हुए बारिश रुकने और परिवार के लिए आसरे की उम्मीद लगाए बैठे हैं. दूजे वो हैं जिनको कांशीराम का नाम लेकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं. देखते रहिए. सुनते रहिए. आंख खोले रहिए. चुनाव करीब हैं. उसूल अब सबको याद आएंगे.


पढ़िए ये भी...

‘फुले, बाबा साहेब के ख्यालों को कांशीराम ने देश में फैलाया’

जीरो-हीरो-जीरो. क्या फिर हीरो बनेंगी मायावती

मुझे आर्यावर्त को चमारावर्त में बदलना है: कांशीराम

Advertisement

Advertisement

()