'टिकटॉक को चलाती है चीन की कम्युनिस्ट पार्टी'- अमेरिकी संसद में बिल पास, बैन की तैयारी!
TikTok अमेरिका में भी बहुत लोकप्रिय है, ख़ासकर बच्चों के बीच. निचले सदन में बहुमत इस पक्ष में रही कि टिकटॉक देश में नहीं होना चाहिए.

अमेरिकी संसद (American House of Representatives) ने चीन के सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म टिकटॉक पर बैन (Tiktok Ban) लगाने के लिए एक बिल पारित कर दिया है. भारत टिकटॉक पर बैन लगाने वाला पहला देश था. साल 2020 में जब ये बात पब्लिक डोमेन में आ गई कि टिकटॉक का इस्तेमाल व्यक्तिगत डेटा इकट्ठा करने और ‘जासूसी’ के लिए किया जा रहा है, तो भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया.
टिकटॉक अमेरिका में भी बहुत लोकप्रिय है, ख़ासकर बच्चों के बीच. डेमोक्रैटिक पार्टी से भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति और रिपब्लिकन पार्टी से सांसद माइक गैलाघे ने टिकटॉक के इस्तेमाल को रोकने के लिए एक विधेयक सदन के सामने पेश किया. इसका टाइटल है, ‘विदेशी शत्रु-नियंत्रित ऐप्लिकेशन से बचाव अधियनियम’ (Protecting Americans From Foreign Adversary Controlled Applications Act).
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सांसद कृष्णमूर्ति ने बिल पेश करते हुए कहा,
निचले सदन में बिल को 65 के मुक़ाबले 352 मतों से पारित कर दिया गया. कुल 197 रिपब्लिकन सांसदों ने बैन के पक्ष में और 15 ने विरोध में वोट किया. वहीं, डेमोक्रैटिक पार्टी में से 155 ने बैन को समर्थन दिया, और 50 ने नहीं दिया. अब इसे अमेरिकी सीनेट (उच्च सदन) में भेजा जाएगा, जहां से पास होकर फिर राष्ट्रपति के दफ़्तर भेजा जाएगा. राष्ट्रपति दस्तख़त करेंगे और बिल बन जाएगा क़ानून.
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देश के पूर्व-उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि इस क़ानून के पारित होने से पता चलता है कि चीन के लिए जो तुष्टीकरण था, अब ख़त्म हो गया है. CCP के नियंत्रण में रहते हुए टिकटॉक को अमेरिका में चलने देने की अनुमति देना बिल्कुल अस्वीकार्य है.
पूर्व सदन अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने भी कहा कि सदन का भारी बहुमत चीन के ख़िलाफ़ और डेटा की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का एक मज़बूत बयान है.
पेलोसी ने ये भी बताया कि चीन में शोषण सह रहे समुदायों - उइगर, तिब्बतियों से लेकर हॉन्गकॉन्ग तक - लोगों ने उन्हें बताया कि उनकी कहानियों को टिकटॉक पर फैलने से रोका जाता है, या ग़लत तरीक़े से पेश किया जा रहा है.
इंटेलिजेंस पर सीनेट चयन समिति के अध्यक्ष मार्क आर वॉर्नर और उपाध्यक्ष मार्को रुबियो का कहना है कि टिकटॉक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है, और वो इस बारे में एकजुट हैं. उम्मीद है कि संसद के उच्च सदन में भी ऐसा ही बहुमत देखने को मिले.

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