रेप विक्टिम से मिलने गईं थीं, सेल्फी लेने लगीं
रेप होने से इतनी शर्म क्यों जुड़ी है? और 'पीड़ित' होने से इतना ग्लैमर क्यों?
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फोटो - thelallantop
वो खबर आपकी नजरों में पड़ी ही होगी. जिसमें एक औरत का रेप हुआ और इसके शरीर पर 'मेरा बाप चोर..' गुदवा दिया गया. सबसे बुरा ये कि रेप करने वाले भी उसी के घर के थे. दहेज नहीं दे पाई, तो पूरे शरीर पर गालियां टैटू कर दीं
अब इस मामले में नया बखेड़ा खड़ा हो गया है. महिला आयोग जब ममता से मिलने पहुंचा तो आयोग की मेंबर्स उसके साथ सेल्फी खींचने लगीं. सेल्फी खींचने के वाकये की फोटोज भी आईं हैं. आयोग की मेंबर सौम्या गुर्जर इन फोटोज में मुस्कुराते हुए नजर आ रही हैं.
एक वर्ग इसके खिलाफ आ गया है. कांग्रेस की प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने इसको संवेदनहीनता बताया है. और कहा है इन पर तो क्रिमिनल केस चलना चाहिए. लोग महिला आयोग को कोस रहे हैं और कह रहे हैं ये तो हद असंवेदनशीलता है. आप रेप विक्टिम के पास गए हैं और ऐसा कैसे कर सकते हैं. कई लोग ऐसा भी लिख रहे हैं कि क्या कोई उत्सव चल रहा था जो हंस-हंसकर सेल्फी खिंचा रही हैं.
वहीं राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा कह रही हैं. ऐसा ममता को नॉर्मल करने के लिए किया होगा.
लेकिन ये घटना हमें एक बड़े मुद्दे की ओर ले जाती है. वो है सेल्फी कल्चर और 'पीड़ित' होने से जुड़ा एक अजीब तरह का ग्लैमर.
रेप होना शायद दुनिया की सबसे बुरी तरह की हिंसा है. जिसमें रेप करने वाला अपनी सत्ता का मुहर लगाने के लिए किसी भी हद तक जाता है. सिर्फ अपनी ताकत का परिचय देने के लिए. जिनका रेप होता है, वो इतने शारीरिक और मानसिक ट्रॉमा से होकर गुजरते हैं, जिसे समझना दूसरों के लिए नामुमकिन है. ऐसे समय में सबसे जरूरी होता है कि जिसका रेप हुआ है, उसे जल्द से जल्द न्याय मिले. और साथ में उसे सहयोग, शांति और हिम्मत दी जाए. लेकिन हमारा मीडिया और सोशल मीडिया ठीक इसका उल्टा करता है.
जब एक रेप का मुद्दा बड़ा बन जाता है, तो सब कैमरा और माइक लेकर उसके घर घुस जाते हैं जिसका रेप हुआ. पहले उसका दर्द बयां करते हैं. फिर उसे हीरो बनाते हैं. मानो उसने कोई कुर्बानी दी हो. फिर उस पर खबर बना-बनाकर बेचते हैं. उसे तब तक भुनाते हैं, जब तक लोग उससे असंवेदनशीलता की हद तक ऊब न जाएं. और इस तरह रेप विक्टिम को 'हीरो', 'शहीद', जाने क्या-क्या बुलाते हैं. फिर बात संसद तक पहुंच जाती है, और विपक्ष बताता है कि कैसे शासन में बैठी सरकार महिलाओं के लिए कुछ नहीं करती. और सारा ट्रॉमा, जो औरत ने भोगा है, गौण हो जाता है.
दुर्भाग्य से, रेप के जो भी मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दे बनते हैं, उसमें औरत को मार डाला जाता है. लेकिन ममता जीवित है, और ये ख़ुशी की बात है. लेकिन उसके जीवन में कैमरे लेकर घुस जाना, और उसकी तस्वीरें फेसबुक पर चला देना, परोक्ष रूप से ये कहना है कि वो कोई स्टार है. जैसे उससे मिलना, उसके साथ तस्वीर खींचना गर्व की बात है. ये सच है कि रेप हो जाना कोई ऐसी शर्म की बात नहीं कि लड़की को मुंह छिपाना पड़े. लेकिन ऐसी गर्व की बात भी नहीं कि उसके साथ तस्वीरें खींची जाएं.
ऐसे मौके पर रघुवीर सहाय की एक बहुत शानदार कविता याद आती है.
एक वो भी किस्सा याद आता है जब श्रीलंका के एक आदमी ने अपने दादाजी की लाश के साथ सेल्फी अपलोड कर दी थी.

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