'यौन उत्पीड़न' का केस दर्ज कराने गई थी महिला, पुलिस ने उसे ही गिरफ्तार कर 5 महीने जेल में रखा
महिला को Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 के तहत गिरफ्तार किया गया था. तमिलनाडु राज्य महिला आयोग के मुताबिक ये गिरफ्तारी अवैध थी. अब आयोग ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है.

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. चेन्नई के तांबरम पुलिस स्टेशन के दो पुलिसकर्मियों पर एक महिला को अवैध तरीके से गिरफ्तार करने का आरोप है. वो महिला जो कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने थाने गई थी. आरोप है कि तत्कालीन तांबरम इंस्पेक्टर चार्ल्स और सब-इंस्पेक्टर दुर्गा ने महिला की शिकायत दर्ज नहीं की. इतना ही नहीं, महिला पर ‘झूठे आरोप’ लगाकर उसे Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 के तहत गिरफ्तार कर लिया.
अब तमिलनाडु राज्य महिला आयोग ने इस मामले में तत्कालीन तांबरम इंस्पेक्टर चार्ल्स और सब-इंस्पेक्टर दुर्गा के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित महिला तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले की रहने वाली है. ये महिला तलाकशुदा हैं और मोमबत्तियां बेचकर अपना गुजारा करती हैं.
आजतक के प्रमोद माधव की रिपोर्ट के मुताबिक 9 अगस्त, 2023 को महिला ने तांबरम पुलिस से फोन पर कुछ ऑटो-रिक्शा चालकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी. अगले दिन, 10 अगस्त, 2023 को वो पुलिस स्टेशन गईं. महिला आयोग के मुताबिक पुलिस ने महिला की शिकायत दर्ज नहीं की.
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5 महीने जेल में रही महिलाइतना ही नहीं, वहां मौजूद सब-इंस्पेक्टर दुर्गा ने मोबाइल से महिला की फोटो खींच ली. जब महिला ने इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. इसका विरोध करने पर सब-इंस्पेक्टर दुर्गा ने ‘झूठे आरोप’ लगाकर महिला को Immoral Traffic (Prevention) Act (ITPA), 1956 के तहत गिरफ्तार कर लिया. रिपोर्ट के मुताबिक महिला लगभग पांच महीने तक जेल में रही और बाद में जमानत पर उसे रिहा किया गया.
इस मामले की जानकारी जब तमिलनाडु राज्य महिला आयोग को हुई, तो उन्होंने इसकी जांच-पड़ताल की. राज्य महिला आयोग के मुताबिक पुलिस ने महिला को गिरफ्तार करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया था. आयोग के मुताबिक पुलिस ने ITPA की धारा 8 (b) को महिला के खिलाफ अवैध रूप से लागू किया क्योंकि यौनकर्मियों को अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित माना जाता है.
राज्य महिला आयोग ने ये भी कहा कि संबंधित पुलिसकर्मियों इंस्पेक्टर चार्ल्स और सब-इंस्पेक्टर दुर्गा ने मामले में जो स्पष्टिकरण दिए हैं, वो संतोषजनक नहीं हैं. राज्य महिला आयोग ने इंस्पेक्टर चार्ल्स और सब-इंस्पेक्टर दुर्गा के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है. इसी के साथ आयोग ने महिला को मुआवजा देने की भी अनुशंसा की है.
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