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तमिलनाडु में राज्यपाल ने अभिभाषण से ही असहमति जता दी, राष्ट्रगान से पहले जाने का आरोप लगा

आर एन रवि ने लगातार दूसरे साल अभिभाषण के हिस्से पढ़ने से इनकार किया है. राष्ट्रगान से पहले जाने को लेकर उनकी सफाई भी आई है.

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12 फ़रवरी 2024 (पब्लिश्ड: 10:48 PM IST)
tamil nadu governor rn ravi refused to read the address
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन रवि सदन में अपना अभिभाषण शुरू तो किया, लेकिन वो कुछ ही मिनट बोले.
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तमिलनाडु में राज्यपाल आर.एन रवि और राज्य सरकार के बीच की तकरार एक बार फिर उजागर हुई है. 12 फरवरी को तमिलनाडु विधानसभा के नए सत्र के पहले दिन राज्यपाल ने अपना पूरा अभिभाषण पढ़ने से मना कर दिया. बता दें कि राज्यपाल को तमिलनाडु DMK सरकार की ओर से तैयार अभिभाषण पढ़ना था. लेकिन राज्यपाल ने दावा किया कि अभिभाषण में ‘भ्रामक तथ्य’ दिए गए थे, जिनसे वो सहमत नहीं हैं. 

रिवाज़ टूट गया

किसी भी विधायिका में नया सत्र शुरू होने से पहले राज्यपाल या राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है. इसमें राज्यपाल या राष्ट्रपति सरकार की ओर से तैयार एक भाषण पढ़ते हैं. लेकिन तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल की ओर से ये रिवाज़ पूरा नहीं किया गया. राज्यपाल आर.एन रवि ने सदन में अपना अभिभाषण शुरू तो किया, लेकिन वो कुछ ही मिनट बोले.

यहां पढ़ें- क्या है ये थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी, जिसके चलते तमिलनाडु में BJP प्रदेश अध्यक्ष और DMK मंत्री लड़ पड़े?

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार से अभिभाषण की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगान बजाए जाने का अनुरोध किया था, जिसे नज़रअंदाज कर दिया गया. 

उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने के लिए जो भाषण दिया गया है, उसमें कई ऐसी बाते हैं, जिससे तथ्यात्मक और नैतिक तौर पर वे असहमत हैं. इसलिए अगर उन बातों को वो अपनी आवाज देगें, तो ये संविधान के खिलाफ होगा. इतना कहकर उन्होंने अपना संबोधन खत्म कर दिया. 

विधानसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?

राज्यपाल के पढ़ने के लिए जो भाषण राज्य सरकार ने तैयार किया था, उसका तमिल संस्करण विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने पढ़ा. अप्पावु ने कहा कि आर.एन. रवि के व्यक्तिगत विचार और उसके बाद उन्होंने जो कहा था उसे हटा दिया गया है. प्रिंटेड अभिभाषण ही असेंबली रिकॉर्ड पर होगा. उन्होंने कहा,

"हम परंपरा का पालन कर रहे हैं. प्रिटेंड भाषण को राज्यपाल की मंजूरी थी और हमने उनसे इसे पढ़ने का अनुरोध किया था. वो अभिभाषण को नहीं पढ़ने या सदन से अनुपस्थित रहने का विकल्प चुन सकते थे."

अप्पावु ने कहा कि आम तौर पर, राष्ट्रगान तब बजाया जाता है, जब विधानसभा सचिव के साथ अध्यक्ष गार्ड ऑफ ऑनर के साथ राज्यपाल का स्वागत करते. उन्होंने आगे कहा,

"लेकिन सदन के अंदर, पारंपरिक संबोधन तमिल थाई वज़्थु (तमिल गान) से शुरू होता है और अंग्रेजी में दिए गए राज्यपाल के संबोधन को उनके (अध्यक्ष) द्वारा तमिल में पढ़े जाने के बाद राष्ट्रगान बजाया जाता है." 

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक अप्पावु की कुछ टिप्पणियों के तुरंत बाद, राज्यपाल रवि तुरंत बाहर चले गए. रिपोर्ट के मुताबिक अप्पावु ने घोषणा की थी कि अभिभाषण पर प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रगान बजाया जाएगा. हालांकि, राज्यपाल सदन से बाहर चले गए. सदन के नेता और जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने राज्यपाल के अभिभाषण को विधानसभा रिकॉर्ड में शामिल करने के नियम में ढील देने का प्रस्ताव पेश किया. इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

तमिलनाडु राजभवन की ओर से आई सफाई

वहीं तमिलनाडु राजभवन ने विधानसभा अध्यक्ष अप्पावु पर राज्यपाल आर.एन रवि पर तीखा हमला बोलने का आरोप लगाया है. राजभवन की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि वह राज्यपाल के कार्यालय की गरिमा को बनाए रखने के लिए बाहर चले गए.

इसमें बताया गया है कि राज्यपाल के अभिभाषण का मसौदा 9 फरवरी को मिला था. बताया गया कि अभिभाष में 'सच्चाई से बहुत दूर भ्रामक दावे' वाले 'कई अंश' थे. इसलिए, आर.एन रवि ने फाइल लौटा दी थी. साथ ही, राज्य सरकार को कुछ सलाह दी थी, जिसे नज़रअंदाज किया गया. 

राजभवन की ओर से कहा गया है कि 12 फरवरी को राज्यपाल ने अभिभाषण का पहला पैरा पढ़ा. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अभिभाषण का तमिल संस्करण पढ़ा. राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष का संबोधन पूरा होने तक रुके रहे. वो राष्ट्रगान के लिए खड़े हुए थे, लेकिन अध्यक्ष राज्यपाल को 'नाथुराम गोडसे का फॉलोअर' वगैरह कहकर हमला करने लगे. इसलिए राज्यपाल सदन से चले गए.

पिछले साल भी राज्यपाल के संबोधन पर हुआ था विवाद

पिछले साल भी तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल के संबोधन के दौरान विवाद हुआ था. जब राज्यपाल आर.एन रवि ने सरकारी संबोधन से कुछ हिस्सों को हटा दिया था. राज्यपाल ने 9 जनवरी. 2023 को अपने भाषण में उन हिस्सों का जिक्र नहीं किया था, जिनमें पेरियार, बी.आर आंबेडकर, के. कामराज, सी.एन अन्नादुराई और के. करुणानिधि जैसे नेताओं के नाम थे. बाद में मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन ने सिर्फ आधिकारिक भाषण रिकॉर्ड करने के लिए एक प्रस्ताव पेश कर दिया था.

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