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"NRI कोटा आरक्षण नहीं टोटल फ्रॉड", सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को बुरी तरह लताड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने NRI कोटे में हुए हालिया संशोधन को लेकर कहा कि ये सिर्फ 'पैसे कमाने का तरीका' है. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है.

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24 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 24 सितंबर 2024, 05:13 PM IST)
NRI Quota in medical admission
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में मेडिकल एडमिशन के लिए NRI (अप्रवासी भारतीय) कोटे का दायरा बढ़ाने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने NRI कोटे में हुए हालिया संशोधन को 'फ्रॉड' बताया. कहा कि ये धोखाधड़ी बंद होनी चाहिए. 20 अगस्त को पंजाब सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था. इसके जरिये 'NRI' उम्मीदवार का दायरा बढ़ाया गया था. NRI के नजदीकी रिश्तेदारों को भी इस कोटे में शामिल किया गया था. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया था. इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की. चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि ये संशोधन देश की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को कमजोर करता है. कोर्ट ने कहा, 

"हमें NRI कोटा के इस बिजनेस को तुरंत रोकना चाहिए. ये पूरी तरह से फ्रॉड है और यही हम अपनी शिक्षा व्यवस्था के साथ कर रहे हैं."

इंडिया टुडे से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश बिल्कुल सही है. उन्होंने टिप्पणी की, 

"राज्य सरकार के इस नोटिफिकेशन के घातक परिणाम होंगे. जिन सामान्य उम्मीदवारों के मार्क्स NRI कोटे के छात्र से 3 गुना अधिक हैं, वे छात्र लिस्ट से बाहर हो जाएंगे."

11 सितंबर को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार के नोटिफिकेशन को ये कहते हुए रद्द कर दिया था कि NRI उम्मीदवारों के दायरे को बढ़ाने के पीछे का तर्क सही नहीं है. हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गईं थीं.

ये भी पढ़ें- पंजाब कैबिनेट में बड़ा बदलाव, चार मंत्री हटाए गए, शामिल हुए पांच नए चेहरे

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, एक याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील शादन फरासत ने दलील दी कि हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ सहित दूसरे राज्यों में NRI की व्यापक परिभाषा है, जबकि पंजाब सरकार का दायरा उनकी तुलना में कम है.

इस पर कोर्ट ने संदेह जताया और कहा कि ये सिर्फ 'पैसे कमाने का तरीका' है. बेंच ने कहा,

"आप कह रहे हैं कि NRI के करीबी रिश्तेदार भी इसके दायरे में आएंगे. वार्ड क्या है? आपको सिर्फ ये कहना है कि मैं एक्स व्यक्ति की देखरेख करता हूं. ये राज्य का सिर्फ पैसे कमाने का तरीका है."

कोर्ट ने सभी तरफ की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि ऐसा नहीं हो सकता, ये पूरी तरह अवैध है. साथ ही, केंद्र सरकार को भी इस पर अमल करने का निर्देश दिया गया है.

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