सिद्दारमैया और डीके के साथ खरगे के बेटे ने भी शपथ ली, और कौन-कौन बना मंत्री
राहुल गांधी ने कहा, कर्नाटक के लोगों ने मोहब्बत की दुकान खोली है.
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कांग्रेस के सीनियर नेता सिद्दारमैया ने दूसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. इससे पहले 2013 से 2018 के बीच वो राज्य के मुख्यमंत्री थे. सिद्दारमैया के अलावा कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस शपथ ग्रहण में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी पहुंचे. इसके अलावा कई और दलों के विपक्षी नेताओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. सिद्दारमैया और शिवकुमार के अलावा आठ मंत्रियों ने भी शपथ ली है. इनमें जी परमेश्वर, प्रियांक खरगे, केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, एमबी पाटिल, सतीश जारकीहोली, रामालिंगा रेड्डी और जमीर अहमद खान शामिल हैं. जानिये इन सभी मंत्रियों के बारे में.
जी परमेश्वरपरमेश्वर कर्नाटक कांग्रेस सबसे सीनियर नेताओं में एक हैं. एचडी कुमारस्वामी की पिछली सरकार में डिप्टी सीएम थे. कर्नाटक के पहले दलित उपमुख्यमंत्री बने थे. साल 2010 से करीब आठ सालों तक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर रहे. इसके अलावा कांग्रेस की पुरानी सरकारों में कई मंत्रालयों का जिम्मा संभाला है. सिद्दारमैया की पिछली सरकार में गृह मंत्री थे.
जी परमेश्वर पहली बार 1989 में विधायक बने थे. इस बार उन्होंने कोरटागेरे से जीत हासिल की. पहली बार 1992 में वीरप्पा मोइली की सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए थे. इसके बाद एसएम कृष्णा सरकार में उन्हें हायर एजुकेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी और सूचना एवं प्रसार विभाग की जिम्मेदारी मिली थी.
हाल में सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम बनने की रेस चल रही थी तो बीच में जी परमेश्वर का भी नाम सामने आया था. परमेश्वर ने इंडिया टुडे से कहा था,
प्रियांक खरगे"मैंने पिछले 8 सालों में काफी मेहनत की है. उपमुख्यमंत्री के तौर पर भी काम किया है. वे सब जानते हैं. मैं क्यों बार-बार ऐसा कहूं? मुझे इसके लिए अपने पक्ष में माहौल बनाने की जरूरत नहीं है. इसका मतलब ये नहीं है कि मैं अयोग्य हूं."
प्रियांग खरगे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं. कर्नाटक की चित्तापुर सीट से विधायक हैं. सिद्दारमैया की पहली सरकार में मंत्री भी रह चुके थे. सिद्दारमैया की कैबिनेट में तब वो सबसे युवा मंत्री थे, 38 साल उम्र थी. बाद में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में भी कैबिनेट मंत्री बने. 2023 विधानसभा चुनाव में प्रियांक ने बीजेपी के मणिकांत राठौड़ को हराया था. 2018 में भी उन्होंने चित्तापुर से चुनाव जीता था. चुनावी राजनीति की शुरुआत 2009 में चित्तापुर सीट पर हुए उपचुनाव से हुई थी. लेकिन तब हार गए थे. फिर 2013 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.
प्रियांक खरगे ने यूथ कांग्रेस से राजनीति शुरू की थी. कॉलेज के दौरान NSUI के जनरल सेक्रेट्री रहे. बाद में कर्नाटक यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी चुने गए थे. यूथ कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष पद के लिए भी चुनाव लड़ा था. लेकिन हार गए थे.
केजे जॉर्जकेजे जॉर्ज इस सरकार में एकमात्र मलयाली मंत्री हैं. केरल मूल के जॉर्ज का परिवार 1960 के दशक में कर्नाटक शिफ्ट हो गया था. पार्टी में कई पदों पर रह चुके हैं. पहली बार वीरेंद्र पाटिल की सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी. पूर्व सीएम एस बंगारप्पा के करीबी माने जाते थे. बंगारप्पा सरकार में पहली बार कैबिनेट मंत्री बने थे.
सिद्दारमैया की पिछली सरकार में जॉर्ज दो साल तक गृह मंत्री रहे थे. अभी सर्वज्ञनगर सीट से विधायक हैं. साल 2017 में जॉर्ज का नाम दो पुलिस अधिकारियों की सुसाइड केस में आया था. सीबीआई ने उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था.
एमबी पाटिल58 साल के पाटिल का नाम मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में भी सामने आया था. कई बार मुख्यमंत्री बनने की इच्छा भी जता चुके हैं. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में गृह मंत्री थे. राज्य के प्रमुख लिंगायत समुदाय से आते हैं. सिद्दारमैया की पुरानी सरकार में जल संसाधन मंत्री रह चुके हैं. इस चुनाव में बाबालेश्वर सीट पर बीजेपी के विजय कुमार पाटिल को हराया था. पाटिल ने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी.
पाटिल बीजापुर से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं. साल 2018 के चुनाव से पहले उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. लिंगायतों को अलग धर्म की मान्यता दिलाने की मांग के कारण पाटिल सुर्खियों में आए थे.
रामालिंगा रेड्डी69 साल के रेड्डी कर्नाटक के गृह मंत्री रह चुके हैं. अभी कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. सिद्दारमैया की पिछली सरकार में चार साल ट्रांसपोर्ट विभाग संभालने के बाद गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी. आठ बार के विधायक रामालिंगा रेड्डी ने स्थानीय स्तर पर राजनीति शुरू की थी. साल 1985 से 90 तक जयानगर ब्लॉक कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष थे. इससे पहले पार्षद भी रह चुके थे. 1989 में पहली बार विधायक बने. एसएम कृष्णा सरकार के दौरान 2002 में पहली बार मंत्री बने थे.
इस चुनाव में रामालिंगा रेड्डी ने बीटीएम लेआउट सीट से बीजेपी के केआर श्रीधर को हराया था. उनकी बेटी सौम्या रेड्डी जयानगर सीट से मात्र 16 वोटों से चुनाव हार गई थीं. रामालिंगा रेड्डी ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से बीएससी की डिग्री ली थी. छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने गए थे. कर्नाटक के अमीर नेताओं में गिने जाते हैं. हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 110 करोड़ रुपये है.
केएच मुनियप्पा75 साल के केएच मुनियप्पा, मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं. कोलार से लगातार 28 सालों तक लोकसभा सांसद रहे. 2019 चुनाव में बीजेपी नेता एस मुनिस्वामी के हाथों हार मिली थी. मुनियप्पा कांग्रेस के बड़े दलित नेताओं में हैं. वो मडिगा समुदाय से आते हैं. इस विधानसभा चुनाव में वे बेंगलुरु ग्रामीण की देवानाहल्ली सीट से जीतकर आए.
जमीर अहमद खानजमीर अहमद सेंट्रल बेंगलुरु की चामराजपेट सीट से विधायक हैं. जमीर ने बीजेपी उम्मीदवार भास्कर राव को करीब 54 हजार वोट से हराया था. इस सीट से उनकी ये लगातार पांचवी जीत है. 2004 से ही इस सीट से विधायक हैं. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में फूड एंड सिविल सप्लाय मंत्री भी थे. पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जेडी(एस) के सात विधायकों ने बगावत कर दी थी. उनमें जमीर अहमद खान भी थे. सभी कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
जमीर अहमद खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है. पिछले साल लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत केस दर्ज किया था. हाल में कर्नाटक हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
सतीश जारकीहोलीआठ मंत्रियों में एक नाम सतीश जारकीहोली का भी है. कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. यमकनामराडी सीट से फिर विधायक बने हैं. 2008 से ही जीतते आए हैं. बेलगावी जिले में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में एक माने जाते हैं. सतीश के दो भाई रमेश और बालचंद्र जारकीहोली बीजेपी के विधायक हैं.
जारकीहोली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री थे. इससे पहले सिद्दारमैया सरकार में भी आबकारी मंत्री रह चुके थे. वे 1998 से 2008 के बीच करीब 10 साल तक कर्नाटक विधानपरिषद के सदस्य रहे. पिछले साल अपने एक बयान के कारण चर्चा में आए थे. उन्होंने 'हिंदू' शब्द को फारसी बताया था और कहा था कि इसका अर्थ काफी 'गंदा' है. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद माफी मांग ली थी.
इस शपथ ग्रहण समारोह में एनसीपी चीफ शरद पवार, फारूक अब्दुल्ला, सीताराम येचुरी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत विपक्षी दलों के कई नेता पहुंचे थे.
वीडियो: सिद्धारमैया के कर्नाटक मुख्यमंत्री बनने की पांच बड़ी वजह ये हैं

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