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छावा फिल्म से कैसे जुड़े हैं 'सांभर' के तार? साउथ इंडियन डिश का मराठी इतिहास जान लीजिए

Chhaava Box Office Collection: फिल्म रिलीज होने के बाद Sambhaji Maharaj के किरदार की खूब तारीफ हुई. Vicky Kaushal और Akshaye Khanna ने अपनी एक्टिंग से अलग छाप छोड़ी. ये फिल्म Chatrapati Sambhaji Maharaj के जीवन पर आधारित है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी फेवरेट साउथ इंडियन डिश Sambhar के तार संभाजी महाराज से जुड़े हुए हैं. लेकिन कैसे?

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Sambhar dish connected to Chhaava film Vicky Kaushal sambhaji maharaj history of sambhar
साउथ इंडियन डिश सांभर के तार, संभाजी महाराज से जुड़े हुए हैं (फोटो: आजतक)
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अर्पित कटियार
25 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 28 फ़रवरी 2025, 10:09 AM IST)
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चटपटा स्वाद, सुंगधित मसाले और समृद्ध पाक-परंपराओं के लिए फेमस सांभर. इडली, डोसा, उत्तपम हो या साउथ इंडियन की कोई दूसरी डिश. जब तक सांभर से भरी कटोरी थाल में न हो, तब तक मजा नहीं आता. कोई भी साउथ इंडियन डिश, सांभर के बिना अधूरी है. फिल्म ‘छावा’ (Chhaava Movie) के रिलीज होने के बाद संभाजी महाराज के किरदार की खूब तारीफ हुई. विक्की कौशल (Vicky Kaushal) ने अपनी एक्टिंग से अलग छाप छोड़ी. सांभर के बीच में, संभाजी महाराज का जिक्र इसलिए, क्योंकि जिस डिश की बात हम कर रहे हैं, उसके तार संभाजी महाराज से जुड़े हुए हैं (Sambhar Connection With Sambhaji). ये बात सुनने में अजीब लग सकती है. लेकिन तमाम तरह की किंवदंतियां तो यही कहती है. 

एक ऐसा ही किस्सा, जिसमें कहा गया कि सांभर एक ‘इत्तेफाकन’ बना व्यंजन है.

17वीं शताब्दी की बात है. तमिलनाडु के ‘तंजावुर’ पर मराठों का शासन था. 1684 में व्यंकोजी की मृत्यु के बाद उनके बेटे शाहूजी, तंजावुर की गद्दी पर बैठे. उस वक़्त शाहूजी की उम्र कोई बारह साल रही होगी. लिखने-पढ़ने के अलावा शाहूजी एक कला में और माहिर थे. वो थी पाक-कला. कहा जाता है कि एक बार छत्रपति संभाजी महाराज, तंजावुर के दौरे पर गए. संभाजी महाराज की खूब आवभगत हुई. शाहूजी महाराज ने अपने रसोइयों को आदेश दिया कि संभाजी जी महाराज के लिए आमटी दाल (एक महाराष्ट्रीय व्यजंन) बनाई जाए. लेकिन तभी रसोई में ‘कोकम’ खत्म हो गया. बता दें कि कोकम एक तरह का खट्टा फल होता है, जिसका इस्तेमाल आमटी को खट्टा बनाने के लिए किया जाता है.

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संभाजी महाराज (फोटो: Wikipedia)

डॉ. पद्मिनी नटराजन अपने लेख ‘द स्टोरी ऑफ सांभर’ में लिखते हैं,

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इसके बाद उस रोज़ की रसदार सब्ज़ी में इमली का पेस्ट डाला गया और जो डिश बनकर तैयार हुई वो संभाजी को खूब पसंद आई. संभाजी महाराज के सम्मान में इस पकवान का नाम संभाजी आहार (संभाजी का भोजन) नाम दिया गया, जो आगे चलकर सांभर हो गया.

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(फोटो: इंडिया टुडे)

फिर यही सांभर दक्षिण भारत की सरहदों को पार करता हुआ धीरे-धीरे हिंदुस्तान के कोने-कोने तक पहुंचा. भारतीय इतिहासकार और फूड क्रिटिक ‘पुष्पेश पंत’ लल्लनटॉप से बात करते हुए कहते हैं,

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इस कहानी में कितनी सच्चाई है?

 इस कहानी को लेकर भी कई विवाद हैं. BBC मराठी के हवाले से संस्कृति के रिसर्चर डॉक्टर चिन्मय दामले कहते हैं कि सांभर से जुड़ी इस कहानी में कोई ख़ास सच्चाई नहीं है. वो तर्क देते हैं,

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तमिल-मराठा साहित्य में ‘सांभर’ का जिक्र

चिन्मय दामले का कहना है कि महाराष्ट्र में सांबर और सांबरू शब्द का प्रयोग सदियों से होता आ रहा है. वे कहते हैं कि चक्रधर स्वामी की रचना लीलाचरित्र की कविता में सांबरू शब्द का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने वाले पकवान के लिए किया गया है. आगे बताते हैं,

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चिन्मय बताते हैं कि देखा जाए तो सांबरू(एक मसाला) और सांबरिव (स्वाद बढ़ाने वाला पकवान), दोनों ही शब्दों का इस्तेमाल महाराष्ट्र में उन्नीसवीं सदी तक होता रहा था.

जहां तक सवाल है कि तमिल साहित्य में ‘सांभर’ शब्द का जिक्र न मिलने की, ऐसा भी नहीं है. उसके लिए अब एक और कविता को देख लेते हैं, जिसे विजयनगर साम्राज्य के राजा विजयनगरम (शासनकाल 1509-1529) ने तेलुगु में लिखी थी.  2010 में इसका अंग्रेजी में अनुवाद आंध्र विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर श्रीनिवास सिस्टला ने किया था. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के हवाले से वे लिखते हैं कि उनके अनुवाद में कविता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार है,

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वे लिखते हैं कि इस प्रकार, छंद में कई अन्य सामग्रियों के साथ "सांबरमपुचिंतापंडु" का उल्लेख है, जिसका उनके हिसाब से मतलब है, ‘सांबर तैयार करने के लिए सभी सामग्रियों के साथ मिली पकी हुई इमली.’ यानी देखा जाए तो दक्षिण भारतीय साहित्य में भी कहीं न कहीं इससे मिलते-जुलते व्यंजन का जिक्र मिल जाता है.

खैर, ये बहस हम फूड हिस्टोरियंस के हिस्से ही छोड़ देते हैं. जाते-जाते बोनस में डिश से जुड़ी हुई एक-दो मजेदार बातें आपको और बता देते हैं. जैसे समोसा भारत में पर्शिया से आया और पंजाब के रास्ते होते हुए पूरे भारत तक पहुंचा. आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. कुरुश एफ. दलाल बताते हैं, 

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राजमा मैक्सिको से भारत में आया. जिसे फ्रांसीसी, उत्तर भारत में सबसे पहले लेकर आए. तो वहीं, मोमोज हिमालय के रास्ते होते हुए तिब्बत से भारत पहुंचा.

वीडियो: 'छावा' फिल्म चल रही थी, औरंगजेब से जुड़ा एक सीन देखकर शख्स को गुस्सा आया, थियेटर का पर्दा फाड़ दिया

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