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कवियों का शहर खारकीव रूस-यूक्रेन युद्ध का मेन बैटलग्राउंड कैसे बन गया?

रूस को क्यों लगा था कि खारकीव उसके प्रति सहानुभूति दिखाएगा?

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28 फ़रवरी 2022 (अपडेटेड: 28 फ़रवरी 2022, 06:00 PM IST)
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खारकीव में जंग के दौरान रूसी सेना का टैंक. (फोटो- AFP)
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रूस के साथ जारी जंग में यूक्रेन की राजधानी कीव के अलावा एक और शहर की चर्चा सबसे ज्यादा हुई है. खारकीव. रूस की सीमा से सिर्फ 25 मील दूर यूक्रेन का ये दूसरा सबसे बड़ा शहर इस समय सबसे भयानक बैटलग्राउंड बना हुआ है. 24 फरवरी को शुरू हुए रूसी आक्रमण के बाद से ये शहर वर्दीधारी सैनिकों, टैंकों और वॉरप्लेन से टकरा रहा है. यूक्रेनी नागरिकों के लिए खारकीव कवियों का शहर है. ये जगह अपने उद्योग के साथ कला और वैज्ञानिक खोज के लिए जाना जाता है. शहर की आबादी करीब 15 लाख है. रूसी सेना ने रविवार को थोड़ी देर के लिए इसे अपने नियंत्रण में लिया था, लेकिन यूक्रेन ने दोबारा इसे अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया है. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद पिछले 5 दिनों में आधिकारिक रिकॉर्ड में खारकीव में कोई मौत दर्ज नहीं की गई हैं. हालांकि प्लेग्राउंड और अपार्टमेंट बिल्डिंग को निशाना बनाया गया है. खारकीव में रूसी भाषा बोलने वाले नागरिकों की बहुलता है. राजधानी कीव पर कब्जा करने में नाकाम बताई जा रही रूसी सेना अब भी खारकीव को छोड़ना नहीं चाह रही है. वर्जीनिया के एक रिसर्च और एनालिसिस संगठन 'सीएनए' में रशिया स्टडीज के डायरेक्टर माइकल कॉफमैन ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा,
"रूसी सेना का कैंपेन कुछ इस तरह था कि वे तुरंत बढ़त हासिल कर लें और उन्हें मजबूत प्रतिरोध का सामना ना करना पड़े. इसके उलट यूक्रेन के इस पूर्वी हिस्से ने दूसरी जगहों के मुकाबले जबरदस्त मुकाबला किया है. अगर रूस का हमला बढ़ता है तो खारकीव में युद्ध की खतरनाक स्थिति बनेगी. यूक्रेनी सेना ने अब तक मजबूत लड़ाई लड़ी है. लेकिन बुरी स्थिति आनी अभी बाकी है. रूसी सेना ने खारकीव को (अब तक) हथियाने की कोशिश नहीं की है."
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने ऐसा समझा था कि खारकीव से उसे कम प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा क्योंकि शहर में अधिकतर आबादी रूसी बोलने वालों की है. कई रूसियों के परिवार वाले खारकीव में रहते हैं या सीमा पार से व्यवसाय करते हैं. क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति का भवन) को लगा कि शहर मॉस्को के प्रति ज्यादा सहानुभूति दिखाएगा. हालांकि पिछले चार दिनों में खारकीव के लोगों ने भी रूस के खिलाफ एकजुटता दिखाई है. Dि वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सेरही जेडन यूक्रेन के सबसे प्रसिद्ध कवियों में एक हैं. उन्होंने खारकीव से ही रविवार को एक फेसबुक पोस्ट में शहर के लड़ाकों की मदद करने वाले लोगों का धन्यवाद करते हुए लिखा,
"आप रूसियों द्वारा मारे जा रहे हैं, भले आप ये चाहते हों या नहीं. मैं सोचता हूं कि शायद ये आप नहीं चाहते हैं."
रिपोर्ट के मुताबिक हमले की शुरुआत में यूक्रेनी सेना ने रूसी सैनिकों को खारकीव के बाहरी इलाकों में रुकने पर मजबूर कर दिया था. फिर 26 फरवरी की रात और 28 फरवरी की सुबह रूस ने भारी गोलाबारी की, रॉकेट सिस्टम के जरिए शहर के उत्तरपूर्वी इलाके को निशाना बनाया. रविवार को रूसी सेना की गाड़ियां शहर में घुस गईं. लेकिन घंटों की लड़ाई के बाद, दोपहर तक शहर दोबारा यूक्रेन के नियंत्रण में आ गया. येल यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर टिमोथी स्नीडर ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया,
"खारकीव की स्थापना 1654 में हुई थी और शहर की यूनिवर्सिटी 1820 के दशक में यूक्रेन के राष्ट्रीय आंदोलन में एक महत्वपूर्ण केंद्र थी. बाद में खारकीव को 1920 से 1934 तक नए सोवियत रिपब्लिक ऑफ यूक्रेन की पहली राजधानी बनाया गया. 1920 में ये यूक्रेनी संस्कृति के लिए दुनिया का केंद्र था. सोवियत नेताओं ने शुरुआत में शहर की कला और साहित्य के विकास के लिए काफी मदद की."
8 साल पहले जब प्रदर्शनकारियों ने यूक्रेन के रूस-समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानोकोविच को 'यूरोपीय झुकाव' के चलते सत्ता से हटाया, तो वे राजधानी कीव से सबसे पहले खारकीव पहुंच गए थे. वे रूस की तरफ जा रहे थे. बाद में 2014 में, रूसी समर्थित अलगाववादियों ने यूक्रेन के दोनत्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल किया था. उसी वक्त एक ग्रुप ने खारकीव सिटी हॉल पर कब्जा कर उसे खारकीव पीपल्स रिपब्लिक घोषित कर दिया था. यानोकोविच के राष्ट्रपति पद से हटने के एक साल बाद, 2015 में एक रैली के दौरान खारकीव में बम धमाका हुआ था जिसमें दो लोग मारे गए थे. यूक्रेन के अधिकारियों ने तब कहा था कि रैली में हमले के लिए रूस जिम्मेदार था. आज खारकीव के लोग यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं.

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