क्या राष्ट्रपति कोविंद को जगन्नाथ पुरी मंदिर में लगे धक्के की कहानी कलेक्टर ने गढ़ी थी?
इसके बाद बात चल पड़ी थी कि राष्ट्रपति के साथ दलित होने के चलते जगन्नाथ मंदिर में धक्कामुक्की हुई.
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राष्ट्रपति कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के साथ जगन्नाथ मंदिर के अंदर धक्कामुक्की होने का मामला शुरू हुआ एक कथित चिट्ठी से. बताया गया कि राष्ट्रपति भवन ने एक शिकायती चिट्ठी पुरी के DM के पास भेजी. DM ने ये मामला मैनेजिंग कमिटी में उठाया. फिर SP के साथ मिलकर इसकी जांच की और कहा कि दो पंडों का राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ बॉडी टू बॉडी टच हुआ. बाहर खबर फैली कि राष्ट्रपति के साथ धक्कामुक्की की पंडों ने. अब ये बात सामने आ रही है कि राष्ट्रपति भवन ने ऐसी कोई चिट्ठी ही नहीं भेजी DM के पास. बाईं तरफ कोविंद और उनकी पत्नी खड़े हैं. जगन्नाथ मंदिर के बाहर. दाहिनी तरफ उन भगवानों की फोटो है, जिनकी मंदिर के अंदर पूजा होती है.
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हमने आपको जगन्नाथ मंदिर और राष्ट्रपति कोविंद वाली घटना बताई थी. सोशल मीडिया कह रहा था कि राष्ट्रपति के साथ दलित होने के चलते मंदिर में धक्का-मुक्की हो गई. हमने आपको बताया कि असल में मामला राष्ट्रपति की यात्रा के प्रोटोकॉल से जुड़े एक मामूली उल्लंघन से जुड़ा हुआ था. उसी मामले में एक दिलचस्प अपडेट है. पुरी के DM अरविंद अग्रवाल पर मंदिर प्रशासन को गुमराह करने, उन्हें बदनाम करने का आरोप लगा है. जगन्नाथ मंदिर के पंडों ने DM के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की है. मंदिर के मौजूदा चीफ अडमिनिस्ट्रेटर प्रदीप्त कुमार मोहापात्रा ने भी बयान दिया है. उनका कहना है कि राष्ट्रपति भवन की जिस चिट्ठी की बात हो रही थी, वैसी कोई चिट्ठी है ही नहीं. मतलब कोई शिकायत नहीं आई है राष्ट्रपति भवन की ओर से. मतलब कि ये सारा मामला ही बेवजह का था.
क्या हुआ, क्या पता है?
मार्च के महीने में राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ जगन्नाथ मंदिर गए थे. कहा गया कि उस दौरान राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ धक्कामुक्की हुई. हमने अपनी खबर में आपको बताया था कि धक्कामुक्की नहीं की गई. बस दो पंडों का 'बॉडी टू बॉडी टच' हुआ था. मतलब उनका शरीर छू गया था. हमने जो बताया, उसका आधार था मंदिर प्रशासन के मिनट्स टू मीटिंग का ब्योरा. ये मीटिंग पहले हुए एक मीटिंग का फॉलोअप थी. पहली मीटिंग के दौरान पुरी के DM अरविंद अग्रवाल ने ये मुद्दा उठाया था. उन्होंने मंदिर की मैनेजिंग कमिटी के बाकी सदस्यों को बताया था. कि राष्ट्रपति भवन की ओर से एक चिट्ठी आई है. उस चिट्ठी में राष्ट्रपति की विजिट के दौरान मंदिर के अंदर के सुरक्षा इंतजामों पर असंतोष जताया गया था. DM ने कहा कि राष्ट्रपति भवन की ओर से चिट्ठी आई है. सो, हमें यानी मंदिर प्रशासन को जांच करनी होगी. ताकि जवाब दिया जा सके. पूरी खबर आप यहां क्लिक करके पढ़ें सकते हैं.

हमने पिछली खबर में आपको मैनेजिंग कमिटी के मिनट्स टू मीटिंग की कॉपी दिखाई थी. ये 23 जून को हुई मीटिंग से जुड़ा कागज था. पंडों का कहना है कि DM ने एक फर्जी का मुद्दा उठाकर उसकी जांच की और उसे मीटिंग में उठाकर मिनट्स ऑफ मीटिंग में शामिल कर दिया. इससे ये मुद्दा आधिकारिक टाइप बन गया.
चिट्ठी की बात भी DM ने की, जांच भी DM ने की. सब DM ने किया? जांच का जिम्मा DM और SP ने लिया. असल में मंदिर की मैनेजिंग कमिटी में ये लोग भी शामिल होते हैं. 23 जून को हुई फॉलोअप मीटिंग में DM साहब ने कहा कि जांच के मुताबिक, दो पंडों का राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ 'बॉडी टू बॉडी टच' हुआ और इस जांच आधार पर दोनों पंडों को 'कारण बताओ नोटिस' भेजा जाए. दोनों पंडों को नोटिस भेजा भी गया. यहीं से मीडिया में ये बात उठने लगी. लोग सोशल मीडिया पर लिखने लगे कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ मंदिर प्रशासन के अंदर धक्कामुक्की हुई.

लोगों के बीच बात गई कि रामनाथ कोविंद और सविता कोविंद के साथ मंदिर के अंदर धक्कामुक्की हुई. लोगों ने सोशल मीडिया पर खूब लिखा. ऐसी ही एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट है ये.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स भी ऐसी आईं. जिनमें धक्कामुक्की वाली थिअरी का समर्थन किया गया.
इस केस में नई बात क्या है?
DM अरविंद अग्रवाल को लेकर संशय बन गया है. कहा जा रहा है कि DM ने गुमराह किया. उन्होंने मंदिर प्रशासन से झूठ कहा कि राष्ट्रपति भवन ने असंतोष जताते हुए चिट्ठी भेजी है. ऐसी कोई चिट्ठी आई ही नहीं थी. मंदिर के चीफ ऐडमिनिस्ट्रेटर हैं प्रदीप्त महापात्रा. सीनियर IAS अधिकारी हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन की ओर से कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई. इस नए खुलासे के बाद मंदिर के पंडे नाराज हैं. पंडे सवाल कर रहे हैं कि जब राष्ट्रपति भवन से कोई शिकायती चिट्ठी ही नहीं आई, तो ये सारा बखेड़ा क्यों खड़ा किया गया? जगन्नाथ मंदिर परिसर के पुलिस थाने में उन्होंने DM अरविंद अग्रवाल के खिलाफ शिकायत लिखवाई है. DM पर पंडों को बदनाम करने का इल्जाम लगाया है. उनका कहना है कि DM ने बेमतलब राष्ट्रपति भवन से आई चिट्ठी की बात कही और जगन्नाथ मंदिर को बदनाम किया. शिकायत में मंदिर के पूर्व चीफ अडमिनिस्ट्रेटर प्रदीप जैन की भी शिकायत की गई है. पंडे गए तो FIR लिखवाने गए थे, लेकिन पुलिस ने फिलहाल उनकी तहरीर बस ली है और आगे जांच करने का आश्वासन दिया है.
शिकायत में क्या लिखा है, सार जान लीजिए
ये शिकायत उड़िया भाषा में लिखा है. पुरी में आज तक से जुड़े पत्रकार हैं सौरभ हरिचंदन. उन्होंने इस घटना से जुड़ी जानकारियां देने के अलावा इस चिट्ठी का हिंदी अनुवाद करने में भी हमारी मदद की. चिट्ठी में जो लिखा है, उसकी मोटा-माटी बात हिंदी में हम आपको बता रहे हैं. लिखा है-
ये उस शिकायत की कॉपी है, जो पंडों ने DM और पूर्व चीफ अडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ लिखवाई है (The Lallantop)

ये शिकायत का दूसरा पन्ना. पंडों ने FIR दर्ज करवाने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने फिलहाल उनकी शिकायत लिखी है. कहा है, आगे की जांच होगी (The Lallantop)
पंडों का और DM का पुराना मामला भी है
2016 में रथयात्रा के बाद जब भगवान वापस मंदिर लौटते हैं, उस रस्म के दौरान DM और SP का पंडों के साथ झगड़ा हुआ था. बात ये हुई कि पंडे अपने परिवारवालों को भगवान के दर्शन करवाने रथ पर ले जाना चाहते थे. जबकि पुलिस और प्रशासन उन्हें ऐसा करने से रोक रहा था. पंडों का कहना था कि ये उनकी पीढ़ियों से चली आ रही उनकी परंपरा का हिस्सा है. ऐसे में क्या हुआ कि एक पंडा अपनी बेटी को लेकर रथ पर चढ़ा. कलेक्टर ने मना किया. गर्मागर्मी हो गई. थाना-फौजदारी सब हुई. कहते हैं कि उसके बाद से ही DM अरविंद अग्रवाल और पंडों का रिश्ता बिगड़ गया. पंडे आरोप लगाते हैं कि DM मौका मिलने पर उन्हें तंग करने की कोशिश करते हैं. पंडों का आरोप है कि इस बार भी DM ने उसी झगड़े की भड़ास निकाली है और पंडों को बदनाम कर इतना बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.
DM ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया
अब इस पूरे मामले में फोकस पर हैं DM अरविंद अग्रवाल. उन्होंने मंदिर प्रशासन की मीटिंग में राष्ट्रपति भवन से चिट्ठी आने की बात क्यों कही, इसका जवाब उनके ही पास है. आज तक के पत्रकार सौरभ हरिचंदन ने DM से बात की थी. मगर DM ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. हमने भी हमने DM अरविंद अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की काफी कोशिश की. मगर उनसे बात नहीं हो पाई. बताया गया कि वो व्यस्त हैं, बात नहीं कर सकते.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ पुष्कर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर हंगामा हो गया. पहले ये बात फैली कि उन्हें मंदिर में नहीं घुसने दिया गया था. बाद में पता चला कि सविता कोविंद के पांव में दर्द था. जिसकी वजह से फिर पूरे परिवार ने सीढ़ी पर ही बैठकर पूजा करने का फैसला किया.
नुकसान क्या हुआ है? मंदिर और पंडों की छवि से पहले दलितों की संवैधानिक स्थिति का सवाल है. सोशल मीडिया और मीडिया की बदौलत ये मामला उछला. लोगों के बीच ये संदेश गया कि भारत के राष्ट्रपति तक के साथ भी दलित होने की वजह से दुर्व्यवहार होता है. फिर आम दलितों की क्या बिसात? ऐसा नहीं कि दलितों के साथ भेदभाव खत्म हो गया हो. या कि उनका शोषण होना बंद हो गया हो. वो सब अब भी खूब होता है. मगर राष्ट्रपति के साथ ऐसे व्यवहार की खबर बेहद निराश करने वाली थी. जिसने पढ़ा, उसको यही लगा. कि राष्ट्रपति तक इम्यून नहीं हैं. सोचिए. किसी ने राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ धक्कामुक्की की खबर पढ़ी हो. या किसी के मुंह से इसके बारे में सुना हो. अगर उस शख्स को इस अपडेट के बारे में मालूम नहीं चल सकेगा, तो उसे यही लगता रहेगा. कि राष्ट्रपति के साथ सचमुच धक्कामुक्की हुई. अगर ये आरोप सही हैं कि DM ने राष्ट्रपति भवन से शिकायती चिट्ठी आने की मनगढ़ंत बात गढ़ी, तो ये बहुत गंभीर आरोप हैं. इसकी जांच होनी चाहिए और कार्रवाई की जानी चाहिए.
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क्या हुआ, क्या पता है?
मार्च के महीने में राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ जगन्नाथ मंदिर गए थे. कहा गया कि उस दौरान राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ धक्कामुक्की हुई. हमने अपनी खबर में आपको बताया था कि धक्कामुक्की नहीं की गई. बस दो पंडों का 'बॉडी टू बॉडी टच' हुआ था. मतलब उनका शरीर छू गया था. हमने जो बताया, उसका आधार था मंदिर प्रशासन के मिनट्स टू मीटिंग का ब्योरा. ये मीटिंग पहले हुए एक मीटिंग का फॉलोअप थी. पहली मीटिंग के दौरान पुरी के DM अरविंद अग्रवाल ने ये मुद्दा उठाया था. उन्होंने मंदिर की मैनेजिंग कमिटी के बाकी सदस्यों को बताया था. कि राष्ट्रपति भवन की ओर से एक चिट्ठी आई है. उस चिट्ठी में राष्ट्रपति की विजिट के दौरान मंदिर के अंदर के सुरक्षा इंतजामों पर असंतोष जताया गया था. DM ने कहा कि राष्ट्रपति भवन की ओर से चिट्ठी आई है. सो, हमें यानी मंदिर प्रशासन को जांच करनी होगी. ताकि जवाब दिया जा सके. पूरी खबर आप यहां क्लिक करके पढ़ें सकते हैं.

हमने पिछली खबर में आपको मैनेजिंग कमिटी के मिनट्स टू मीटिंग की कॉपी दिखाई थी. ये 23 जून को हुई मीटिंग से जुड़ा कागज था. पंडों का कहना है कि DM ने एक फर्जी का मुद्दा उठाकर उसकी जांच की और उसे मीटिंग में उठाकर मिनट्स ऑफ मीटिंग में शामिल कर दिया. इससे ये मुद्दा आधिकारिक टाइप बन गया.
चिट्ठी की बात भी DM ने की, जांच भी DM ने की. सब DM ने किया? जांच का जिम्मा DM और SP ने लिया. असल में मंदिर की मैनेजिंग कमिटी में ये लोग भी शामिल होते हैं. 23 जून को हुई फॉलोअप मीटिंग में DM साहब ने कहा कि जांच के मुताबिक, दो पंडों का राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ 'बॉडी टू बॉडी टच' हुआ और इस जांच आधार पर दोनों पंडों को 'कारण बताओ नोटिस' भेजा जाए. दोनों पंडों को नोटिस भेजा भी गया. यहीं से मीडिया में ये बात उठने लगी. लोग सोशल मीडिया पर लिखने लगे कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ मंदिर प्रशासन के अंदर धक्कामुक्की हुई.

लोगों के बीच बात गई कि रामनाथ कोविंद और सविता कोविंद के साथ मंदिर के अंदर धक्कामुक्की हुई. लोगों ने सोशल मीडिया पर खूब लिखा. ऐसी ही एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट है ये.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स भी ऐसी आईं. जिनमें धक्कामुक्की वाली थिअरी का समर्थन किया गया.
इस केस में नई बात क्या है?
DM अरविंद अग्रवाल को लेकर संशय बन गया है. कहा जा रहा है कि DM ने गुमराह किया. उन्होंने मंदिर प्रशासन से झूठ कहा कि राष्ट्रपति भवन ने असंतोष जताते हुए चिट्ठी भेजी है. ऐसी कोई चिट्ठी आई ही नहीं थी. मंदिर के चीफ ऐडमिनिस्ट्रेटर हैं प्रदीप्त महापात्रा. सीनियर IAS अधिकारी हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन की ओर से कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई. इस नए खुलासे के बाद मंदिर के पंडे नाराज हैं. पंडे सवाल कर रहे हैं कि जब राष्ट्रपति भवन से कोई शिकायती चिट्ठी ही नहीं आई, तो ये सारा बखेड़ा क्यों खड़ा किया गया? जगन्नाथ मंदिर परिसर के पुलिस थाने में उन्होंने DM अरविंद अग्रवाल के खिलाफ शिकायत लिखवाई है. DM पर पंडों को बदनाम करने का इल्जाम लगाया है. उनका कहना है कि DM ने बेमतलब राष्ट्रपति भवन से आई चिट्ठी की बात कही और जगन्नाथ मंदिर को बदनाम किया. शिकायत में मंदिर के पूर्व चीफ अडमिनिस्ट्रेटर प्रदीप जैन की भी शिकायत की गई है. पंडे गए तो FIR लिखवाने गए थे, लेकिन पुलिस ने फिलहाल उनकी तहरीर बस ली है और आगे जांच करने का आश्वासन दिया है.
शिकायत में क्या लिखा है, सार जान लीजिए
ये शिकायत उड़िया भाषा में लिखा है. पुरी में आज तक से जुड़े पत्रकार हैं सौरभ हरिचंदन. उन्होंने इस घटना से जुड़ी जानकारियां देने के अलावा इस चिट्ठी का हिंदी अनुवाद करने में भी हमारी मदद की. चिट्ठी में जो लिखा है, उसकी मोटा-माटी बात हिंदी में हम आपको बता रहे हैं. लिखा है-
मंदिर के जितने पंडे हैं, उन लोगों को बदनाम करने के लिए पुरी के जिलापाल अरविंद अग्रवाल और पूर्व चीफ ऐडमिनिस्ट्रेटर की तरफ से साजिश की गई है. उन्होंने कहा कि पंडों ने राष्ट्रपति जी के साथ दुर्व्यवहार किया. ये बिल्कुल गलत आरोप है. बिल्कुल झूठी बात है. इस घटना को मैनेजिंग कमिटी में उठाकर पंडों के खिलाफ मनगढ़ंत कहानी बनाई गई है. मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये पूरे देश में ये बात फैल गई. इसकी वजह से पंडों और उनके परिवारवालों की बदनामी हुई है. इसकी वजह से पंडे लोग रास्ते पर सिर उठाकर नहीं चल पा रहे हैं. उन्हें बेमतलब शर्मिंदगी दी गई है. इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए. दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए.

ये उस शिकायत की कॉपी है, जो पंडों ने DM और पूर्व चीफ अडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ लिखवाई है (The Lallantop)

ये शिकायत का दूसरा पन्ना. पंडों ने FIR दर्ज करवाने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने फिलहाल उनकी शिकायत लिखी है. कहा है, आगे की जांच होगी (The Lallantop)
पंडों का और DM का पुराना मामला भी है
2016 में रथयात्रा के बाद जब भगवान वापस मंदिर लौटते हैं, उस रस्म के दौरान DM और SP का पंडों के साथ झगड़ा हुआ था. बात ये हुई कि पंडे अपने परिवारवालों को भगवान के दर्शन करवाने रथ पर ले जाना चाहते थे. जबकि पुलिस और प्रशासन उन्हें ऐसा करने से रोक रहा था. पंडों का कहना था कि ये उनकी पीढ़ियों से चली आ रही उनकी परंपरा का हिस्सा है. ऐसे में क्या हुआ कि एक पंडा अपनी बेटी को लेकर रथ पर चढ़ा. कलेक्टर ने मना किया. गर्मागर्मी हो गई. थाना-फौजदारी सब हुई. कहते हैं कि उसके बाद से ही DM अरविंद अग्रवाल और पंडों का रिश्ता बिगड़ गया. पंडे आरोप लगाते हैं कि DM मौका मिलने पर उन्हें तंग करने की कोशिश करते हैं. पंडों का आरोप है कि इस बार भी DM ने उसी झगड़े की भड़ास निकाली है और पंडों को बदनाम कर इतना बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.
DM ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया
अब इस पूरे मामले में फोकस पर हैं DM अरविंद अग्रवाल. उन्होंने मंदिर प्रशासन की मीटिंग में राष्ट्रपति भवन से चिट्ठी आने की बात क्यों कही, इसका जवाब उनके ही पास है. आज तक के पत्रकार सौरभ हरिचंदन ने DM से बात की थी. मगर DM ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. हमने भी हमने DM अरविंद अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की काफी कोशिश की. मगर उनसे बात नहीं हो पाई. बताया गया कि वो व्यस्त हैं, बात नहीं कर सकते.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ पुष्कर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर हंगामा हो गया. पहले ये बात फैली कि उन्हें मंदिर में नहीं घुसने दिया गया था. बाद में पता चला कि सविता कोविंद के पांव में दर्द था. जिसकी वजह से फिर पूरे परिवार ने सीढ़ी पर ही बैठकर पूजा करने का फैसला किया.
नुकसान क्या हुआ है? मंदिर और पंडों की छवि से पहले दलितों की संवैधानिक स्थिति का सवाल है. सोशल मीडिया और मीडिया की बदौलत ये मामला उछला. लोगों के बीच ये संदेश गया कि भारत के राष्ट्रपति तक के साथ भी दलित होने की वजह से दुर्व्यवहार होता है. फिर आम दलितों की क्या बिसात? ऐसा नहीं कि दलितों के साथ भेदभाव खत्म हो गया हो. या कि उनका शोषण होना बंद हो गया हो. वो सब अब भी खूब होता है. मगर राष्ट्रपति के साथ ऐसे व्यवहार की खबर बेहद निराश करने वाली थी. जिसने पढ़ा, उसको यही लगा. कि राष्ट्रपति तक इम्यून नहीं हैं. सोचिए. किसी ने राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ धक्कामुक्की की खबर पढ़ी हो. या किसी के मुंह से इसके बारे में सुना हो. अगर उस शख्स को इस अपडेट के बारे में मालूम नहीं चल सकेगा, तो उसे यही लगता रहेगा. कि राष्ट्रपति के साथ सचमुच धक्कामुक्की हुई. अगर ये आरोप सही हैं कि DM ने राष्ट्रपति भवन से शिकायती चिट्ठी आने की मनगढ़ंत बात गढ़ी, तो ये बहुत गंभीर आरोप हैं. इसकी जांच होनी चाहिए और कार्रवाई की जानी चाहिए.
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जिस आदमी को राष्ट्रपति के घर में नहीं घुसने दिया, अब वो खुद राष्ट्रपति बन गया है
क्या किया था उस आदमी ने जिसकी फांसी को राष्ट्रपति कोविंद ने माफ़ करने से इंकार कर दिया?
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