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राजस्थान के एकडेमिक कैलेंडर में वैलेंटाइन डे का 'कायापलट' हो गया

राजस्थान सरकार के नए एकेडमिक कैलेंडर ने बवाल मचाया है. इस कैलेंडर के मुताबिक 5 अगस्त को 'स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस', 14 फरवरी को 'माता-पिता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा.

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30 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 05:05 PM IST)
Swarn Mukut Mastak Diwas
वैलेंटाइन डे हुआ अब माता पिता दिवस (तस्वीर: AI जेनेरेटेज\ PTI)
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राजस्थान सरकार एकेडमिक ईयर 2024-25 के लिए नया कैलेंडर लाई है. ये कैलेंडर अपने नए बदलावों के कारण चर्चा में है. इसमें सभी त्यौहारों को तो वैसा ही रखा गया, लेकिन कुछ नए बदलाव किए गए हैं. जैसे कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाए जाने वाले दिन यानी 5 अगस्त को ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा. वहीं 28 मई को सावरकर जयंती मनाई जाएगी. इन बदलावों को लेकर राजस्थान कांग्रेस अपना विरोध जता रही है.

इस कैलेंडर का नाम ‘शिविरा पंचांग’ रखा गया है. इसके मुताबिक 365 दिनों में से 213 दिन स्कूल लगेंगे, और 152 दिन छुट्टियां रहेंगी. इसमें रविवार की छुट्टियां भी शामिल हैं. इसके अलावा महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को ‘नो बैग डे’ मनाया जाएगा. इस दिन बच्चे बिना बैग के स्कूल जाएंगे जिससे वे दूसरी एक्टिविटी में भी हिस्सा ले सकें. ये कैलेंडर सरकारी और प्राइवेट दोनों ही स्कूलों में लागू होगा. 

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कैलेंडर में क्या नया?

इस कैलेंडर को जुलाई 2025 से लागू किया जाएगा. इस कैलेंडर में 4 फरवरी के दिन को सूर्य नमस्कार दिवस. 7 फरवरी के दिन छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती और सुभाष चंद्र बोस दिवस को 23 जनवरी के दिन मनाया जाएगा. वहीं वैलेंटाइन दिन यानी 14 फरवरी को माता-पिता दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इसके अलावा कैलेंडर में परीक्षाओं और टेस्ट के पूरे शेड्यूल बताए गए हैं. 

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिवाकर इस कैलेंडर को ‘देशप्रेम और संस्कार की शिक्षा से ओतप्रोत’ बता रहे हैं, तो वहीं पूर्व शिक्षा मंत्री और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है. इससे पहले प्राथमिक विभाग ने अपना वार्षिक कैलेंडर जारी किया था, जिसमें राम मंदिर के स्थापना दिवस को दिखाया गया था. कांग्रेस इसे हिन्दुत्व की राजनीति से प्रेरित बताती रही है.

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