The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Rajasthan, 9 newborns die in Kota's JK loan hospital within hours

कोटा के अस्पताल में आठ घंटे में नौ नवजातों की मौत हो गई

पिछले साल इसी अस्पताल में 35 दिन में 107 बच्चों की मौत हुई थी.

Advertisement
Img The Lallantop
राजस्थान के कोटा जिले में जे.के लोन अस्पताल में 8 घंटे में 9 बच्चों के जान गंवाने का मामला सामने आया है.
pic
अमित
11 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 11 दिसंबर 2020, 08:00 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
राजस्थान का कोटा. यहां का जेके लोन अस्पताल. सरकारी अस्पताल है. यहां आठ घंटे के अंदर नौ नवजातों की मौत हो गई. 9 दिसंबर की देर रात यहां पांच बच्चों की मौत हुई. ये सभी चार दिन के थे. वहीं, 10 दिसंबर की दोपहर तक चार और बच्चों की मौत हो गई.
नवजातों की मौत की सूचना मिलने के बाद 10 दिसंबर को कोटा के कलेक्टर भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अतिरिक्त डॉक्टर व नर्सिग स्टाफ की तैनाती के आदेश दिए. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं.
Image embed

कोटा के जेके लोन अस्पताल में पहले भी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है.

परिजनों का आरोप - कोई सुनता ही नहीं
9 दिसंबर की रात पांच नवजातों की मौत के बाद उनके परिवारवालों ने अस्पताल में हंगामा किया. मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया. दो नवजात के परिजन शव लेकर अस्पताल परिसर में बैठे थे. उनका आरोप था कि रात को अस्पताल का स्टाफ सो जाता है. बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर, बहुत बार कहने पर वो उन्हें देखने गए. और कहा गया कि जब सुबह डॉक्टर आएंगे तब दिखाना और यह भी कि बच्चे का इस तरह रोना नॉर्मल है.
अस्पताल ने कहा - कुछ बच्चे तो जन्म से बीमार थे
अस्पताल अधीक्षक डॉ. एससी दुलारा ने बताया,
Image embed
 
यही बात राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा ने भी दोहराई. डॉ. दुलारा ने कहा कि अस्पताल में हर महीने करीब 60 से 100 बच्चों की मौत होती है. रोज के लिहाज से ये आंकड़ा 2 से 5 के बीच रहता है. हालांकि, एक दिन में 9 बच्चों की मौत सामान्य नहीं है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संसदीय क्षेत्र है कोटा
जेके लोन अस्पताल में एक दिन में नौ बच्चों की मौत पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी चिंता जताई है. यह उनका संसदीय क्षेत्र है. उन्होंने कहा है कि पहले भी इस अस्पताल में बड़ी संख्या में शिशुओं की मौत हुई थी. तब भी अस्पताल प्रशासन की मांग के अनुसार केंद्र सरकार और CSR के जरिए कई संसाधन दिए गए थे. इसके बावजूद अस्पताल में नवजातों और मांओं का सुरक्षित न होना चिंता का विषय है. इस मामले की हाई लेवल इन्क्वायरी होनी चाहिए, ताकि बार-बार ऐसी घटनाएं न हों.
पिछले साल 35 दिन में 107 बच्चों की मौत हुई थी
ऐसा पहली बार नहीं है कि जब इस अस्पताल में मासूमों की इस तरह से मौत हुई हो. पिछले साल इसी अस्पताल में नवंबर-दिसंबर में 35 दिन के भीतर 107 बच्चों की जान गई थी. इसकी वजह जानने के लिए दिल्ली से टीम आई थी. राज्य के मंत्री और अधिकारी भी पहुंचे. पीडियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमृत लाल बैरवा को हटाया गया था. उनकी जगह जयपुर के डॉ. जगदीश को विभागाध्यक्ष बनाया था.

Advertisement

Advertisement

()