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नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ED का नोटिस, पूछताछ के लिए बुलाया

सोनिया, राहुल गांधी के खिलाफ ED के नोटिस पर कांग्रेस नेता बोले, 'मोदी सरकार बदले की भावना में अंधी हो गई है.'

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1 जून 2022 (अपडेटेड: 1 जून 2022, 09:28 PM IST)
rahul gandhi sonia gandhi ED
बाएं- राहुल गांधी, दाएं- सोनिया गांधी (फोटो- आजतक)
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ED ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को नोटिस भेजा है. ये नोटिस नेशनल हेराल्ड केस (National Herald Case) से जुड़ा हुआ है. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक सोनिया गांधी को 8 जून को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया है. इस बात की जानकारी खुद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और रणदीप सुरजेवाला ने दी है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोग इस नोटिस से डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं और सीना ठोक कर लड़ेंगे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रणदीप सुरजेवाला ने ईडी को घेरते हुए बोला-

इस पूरी साजिश के पीछे पीएम (नरेंद्र मोदी) हैं और ईडी उनकी 'पालतू' एजेंसी है. मोदी सरकार बदले की भावना में अंधी हो गई है. ईडी का नोटिस नई कायराना हरकत है.

क्या है नेशनल हेराल्ड केस ?

देश के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता जवाहरलाल नेहरू ने 1937 में असोसिएटेड जर्नल बनाया था. इसने तीन अखबार निकालने शुरू किए. हिंदी में 'नवजीवन', उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और अंग्रेज़ी में ‘नेशनल हेराल्ड’. नेशनल हेराल्ड अखबार 1938 में छपना शुरू हुआ था. उस समय कई स्वतंत्रता सेनानी इसे सपोर्ट कर रहे थे. वही इसके शेयर होल्डर भी थे. वे इसका इस्तेमाल आज़ादी की लड़ाई में कर रहे थे.

national herald
9 नवंबर, 1978 का नेशनल हेराल्ड

आज़ादी मिलने के बाद भी अखबार चलता रहा. लेकिन धीरे-धीरे इसकी बिक्री कम होने लगी. दशकों के सफर के बाद साल 2008 आते-आते असोसिएटेड जर्नल ने फैसला किया कि अब अखबार नहीं छापे जाएंगे. उस वक्त ये भी पता चला कि असोसिएटेड जर्नल पर 90 करोड़ रुपयों का कर्ज भी चढ़ चुका है.

कर्ज की भरपाई के लिए अपनाई ट्रिक

कांग्रेस ने एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनी बनाई थी. इसका नाम था यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड. कंपनी में 76% शेयर्स राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास थे. फिर कांग्रेस ने यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को असोसिएटेड जर्नल के 90 करोड़ रुपए के शेयर दे दिए. इससे यंग इंडियन को इस कंपनी के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए. इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया. यानी 'यंग इंडियन' को मुफ्त में असोसिएटेड जर्नल की ओनरशिप मिल गई.

सामने कब आया घोटाला?

2012 में जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सुब्रमण्यन स्वामी (बाद में बीजेपी में चले गए) ने एक जनहित याचिका डाली. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने धोखाधड़ी से यंग इंडियन लिमिटेड के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है. उन्होंने कहा कि ये सब कुछ दिल्ली के हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया. बता दें कि इनकम टैक्स ऐक्ट के हिसाब से कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी भी थर्ड पार्टी के साथ पैसों का लेन-देन नहीं कर सकती.

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सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में एक पीआईएल दाखिल की थी
अब तक क्या-क्या हुआ?

2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई के लिए स्वामी से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कहा था. 19 दिसंबर 2015 को सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट ने जमानत दे दी थी. 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को रद्द करने से इनकार करते हुए सभी 5 आरोपियों सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस और सुमन दुबे को कोर्ट में पेश होने से छूट दे दी थी. इस साल अप्रैल में भी कुछ कांग्रेस नेताओं से पूछताछ की गई थी.

देखें वीडियो- क्या है नेशनल हेराल्ड केस जिसने कांग्रेस की नींद उड़ाई हुई है

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