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कतर में फांसी की सजा वाले पूर्व नेवी अधिकारी जिस कंपनी में थे वो करती क्या है?

क़तर सरकार ने भारतीय नौसेना के जिन 8 पूर्व-अफ़सरों को फांसी की सज़ा सुनाई है, वो सारे एक ही कंपनी के लिए काम करते थे: 'डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज़ ऐंड कंसल्टेंसी सर्विसेज़'

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qatar navy officers death penalty
पुरानी और नई वेबसाइट का खेल (सांकेतिक तस्वीर)
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27 अक्तूबर 2023
Updated: 27 अक्तूबर 2023 17:48 IST
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अगस्त 2022 में क़तर सरकार ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व-अधिकारियों को जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार किया था. 26 अक्टूबर को खबर आई कि इन सभी अधिकारियों को सज़ा-ए-मौत सुना दी गई है. भारत सरकार की तरफ़ से विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो फांसी की सज़ा की ख़बर सुनकर हैरान है. वो इस मसले को क़तर के अधिकारियों के सामने उठाएंगे. लेकिन इस पूरे केस में एक कंपनी का नाम सामने आ रहा है, जिससे ये सभी अधिकारी जुड़े हुए थे.

कौन अधिकारी? कौन कंपनी?

क़तर ने जिन 8 लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई है, वो सभी भारतीय नौसेना में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं.

  • कैप्टन नवतेज सिंह गिल
  • कैप्टन सौरभ वशिष्ठ
  • कमांडर पूर्णेंदु तिवारी
  • कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा
  • कमांडर सुगुनाकर पकाला
  • कमांडर संजीव गुप्ता
  • कमांडर अमित नागपाल
  • नाविक रागेश

ये सारे एक ही कंपनी के लिए काम करते थे: 'डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज़ ऐंड कंसल्टेंसी सर्विसेज़'. ये एक प्राइवेट कंपनी है, जो क़तर सेना के जवानों को ट्रेनिंग और इससे जुड़ी मदद करती है. जैसे एक IT कंसल्टेंसी कंपनी होती है, वैसे ही मिलिट्री कंसल्टेंसी. फ़ौज की कंसल्टेंसी. कंपनी के बारे में क्या जानकारी है?

नई वेबसाइट-पुरानी वेबसाइट

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, गिरफ़्तारी की पहली मीडिया रिपोर्ट छपते ही कंपनी ने अपनी वेबसाइट हटा दी थी. पुरानी वेबसाइट में साफ़-साफ़ लिखा था कि वो क़तरी अमीरी नौसेना को ट्रेनिंग, रसद और मेंटेनेंस सेवाएं देते हैं.

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अपनी नई वेबसाइट पर क़तर नौसेना का कोई ज़िक्र ही नहीं है. न ही उन सात अधिकारियों की कोई जानकारी है, जो कंपनी चलाते हैं. CEO की तस्वीर और नाम लिखा है: ख़ामिस अल-अज़मी. वेबसाइट के मुताबिक़, कंपनी का मिशन अपने 'मूल्यवान पार्टनर्स' को सारी सपोर्ट सर्विसेज़ मुहैया करवाना है. स्थानीय और वैश्विक स्तर पर ग्राहकों की ख़ूबी और प्रभाव में सुधार करना है.

जो बात पुरानी और नई वेबसाइट दोनों में है, वो ये कि डहरा एयरोस्पेस, सुरक्षा, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार क्षेत्र में कंसल्टेंसी देती है. प्रमाणित कंपनी है. ISO नंबर भी ऊपर ही लिखा दिख रहा है. US के अमेरिकी विदेश विभाग से भी प्रमाणित ब्रोकर कंपनी है.

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दोषी ठहराए गए ज्यादातर अधिकारी अपनी गिरफ़्तारी के समय डहरा में चार से छह बरसों से काम कर रहे थे. 

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