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कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत, जिनकी नूपुर शर्मा को लगाई फटकार नेशनल हेडलाइन बन गई?

सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत कई महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे हैं.

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1 जुलाई 2022 (अपडेटेड: 1 जुलाई 2022, 06:51 PM IST)
Justice Surya Kant and Nupur Sharma
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत और नूपुर शर्मा. (तस्वीरें- सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट और ट्विटर से साभार हैं.)
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नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी से जुड़े एक मामले में शुक्रवार, 1 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा को खूब फटकार लगाई. उदयपुर हत्याकांड के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की टिप्पणी को जिम्मेदार ठहराया. यहां तक कि कोर्ट ने उनसे पूरे देश से माफी मांगने को कहा. 

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई दो जजों जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की. खबरों के मुताबिक जब नूपुर शर्मा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नूपुर की जान को खतरा है, तो जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,

उन्हें खतरा है या वो (नूपुर शर्मा) सुरक्षा के लिए खतरा बन गई हैं? उन्होंने जिस तरह पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है, देश में जो हो रहा है, उसके लिए वो अकेले जिम्मेदार हैं.

नूपुर शर्मा को लगाई इस फटकार के बाद से जस्टिस सूर्यकांत का नाम हर किसी की जबान पर है. कई लोग उनके बारे में जानना चाह रहे हैं.  

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्यकांत 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे. इससे पहले वो हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं. वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के भी जज रहे हैं. जस्टिस सूर्यकांत को अक्टूबर, 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया था. वे इस पद पर 5 अक्टूबर, 2018 से 23 मई, 2019 तक रहे. उससे पहले 9 जनवरी, 2004 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का जज बनाया गया था.

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणआ के हिसार में हुआ था. रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से लॉ में बैचलर्स की डिग्री 1984 में लेने के बाद उन्होंने हिसार के जिला अदालत में कानून की प्रैक्टिस शुरू की थी. 1985 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए चंडीगढ़ आए. 7 जुलाई, 2000 को वे हरियाणा के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) नियुक्त होने वाले सबसे कम उम्र के वकील बने थे. मार्च, 2001 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) बनाया गया था. जस्टिस सूर्यकांत को संविधान, सेवा संबंधी मामले और सिविल मामलों में माहिर बताया जाता है.

जस्टिस सूर्यकांत के महत्वपूर्ण फैसले

सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत अनुच्छेद 370, सीएए और पेगासस सहित कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं. वे उस बेंच का भी हिस्सा थे, जिसने पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान हुई खामियों की सुनवाई की थी और जांच के लिए एक समिति का गठन किया था.

अपने एक फैसले में, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अपनी सुरक्षा के लिए लाइसेंस प्राप्त बंदूकों का इस्तेमाल किसी जश्न की फायरिंग में नहीं होना चाहिए. इस पर रोक लगाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा था,

अपनी सुरक्षा या फसलों और मवेशियों की सुरक्षा के लिए लाइसेंस प्राप्त बंदूक को उत्सव के आयोजनों में नहीं चलाया जा सकता है, ये जानलेवा दुर्घटनाओं का एक संभावित कारण बनता है.

कोरोना महामारी के दौरान जस्टिस सूर्यकांत जेल में बंद कैदियों के बचाव में आए थे और उनकी रिहाई का आदेश दिया था ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके.

नोट: नूपुर शर्मा के लिए की गई टिप्पणियों का जिक्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश में नहीं है.

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