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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कबीर के मगहर में जाकर झूठ बोला?

देखिए कबीर, गुरुनानक और बाबा गोरखनाथ को लेकर पीएम मोदी ने क्या झूठ बोला है?

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29 जून 2018 (अपडेटेड: 29 जून 2018, 09:30 AM IST)
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मगहर में कबीर की मज़ार पर पीएम मोदी (बाएं) और उसके बाद एक रैली संबोधित करते हुए. (दाएं)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. साहेब अपनी भाषण शैली के लिए जाने जाते हैं. जहां जाते हैं, खुद को स्थानीयता में बोर लेते हैं. स्थानीय लोगों-घटनाओं के संदर्भ देते हैं और रैली में मौजूद लोगों का दिल जीत लेते हैं. पर एक दिक्कत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से खड़े होकर भरे-पूरे आत्मविश्वास के साथ तथ्यात्मक गलती कर देते हैं. ऐसी गलतियों पर लोग उन्हें झूठा करार देते हैं.

28 जून को कबीरदास के 620वें प्राकट्य दिवस पर पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के मगहर पहुंचे. यहां उन्होंने कबीर को नमन किया और उनकी मज़ार पर चादर भी चढ़ाई. फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दूसरे बीजेपी नेताओं के साथ एक रैली संबोधित की. रैली में अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने भोजपुरी बोलकर की. उन्होंने कहा,


'नमस्कार. साहेब बंदगी. आज हम अपने के बड़ा सौभाग्यशाली मानत हनी कि महान सूफी संत कबीरदास जी के स्मृति में हो रहल ई आयोजन में ये पावन धरती पर आए बाटी. आज हमके यहां आके बहुत नीक लगत अ. हम ये पावन धरती के प्रणाम करत बानी और आप सब लोगन के पांय लागी.'

मगहर में कबीर की मज़ार पर चादर चढ़ाते प्रधानमंत्री मोदी.
मगहर में कबीर की मज़ार पर चादर चढ़ाते प्रधानमंत्री मोदी.

इसके बाद उन्होंने वो तथ्यात्मक गलती की, जिसका हम ज़िक्र कर रहे हैं. उन्होंने कहा,


'आज मैं उस गुफा को भी देख पाया, जहां कबीरदास जी साधना किया करते थे. समाज को सदियों से निरंतर दिशा दे रहे मार्गदर्शक, समभाव और समरसता के प्रतिबिंब महात्मा कबीर को उनकी ही निर्वाण-भूमि से मैं एक बार फिर कोटि-कोटि नमन करता हूं. ऐसा कहते हैं कि यहीं पर संत कबीर, गुरुनानक देव और बाबा गोरखनाथ जी ने एक साथ बैठ करके आध्यात्मिक चर्चा की थी. मगहर आकर मैं एक धन्यता अनुभव करता हूं.'

कबीर की मज़ार पर जाने के बाद रैली संबोधित करते पीएम मोदी.
कबीर की मज़ार पर जाने के बाद रैली संबोधित करते पीएम मोदी.

कबीर, गुरुनानक और गोरखनाथ के साथ बैठकर आध्यात्मिक चर्चा करने का पीएम मोदी का तथ्य गलत है. क्यों? क्योंकि कबीर और गुरुनानक का काल तो समान है, लेकिन गोरखनाथ का जीवनकाल इन दोनों से कहीं पहले का है.

कबीर का जीवनकाल 1398 ई. से 1518 ई. तक बताया जाता है यानी 14वीं और 15वीं शताब्दी. हालांकि, इतिहासकारों में उनके पैदा होने और मरने के साल को लेकर मतभेद हैं. कुछ इसे 1398 से 1448 ई. बताते हैं, जबकि कुछ इसे 1440 से 1518 ई. बताते हैं. लेकिन ये तय है कि कबीर का जीवनकाल 1398 से 1518 ई. के बीच का ही रहा है.


गुरु नानक और कबीर
गुरु नानक और कबीर

वहीं गुरुनानक की बात करें, तो उनका जीवनकाल 1469 से 1539 ई. का है. यानी 15वीं और 16वीं शताब्दी.

लेकिन बाबा गोरखनाथ का जीवनकाल इन दोनों से कहीं पहले 11वीं शताब्दी का बताया जाता है. गोरखनाथ के पैदा होने और मरने के सटीक बरसों का ज़िक्र नहीं मिलता है. लेकिन ज़्यादातर इतिहासकार इसे 11वीं शताब्दी बताते हैं. हालांकि, कुछ इसे 12वीं, 13वीं और यहां तक कि 14वीं शताब्दी भी बताते हैं. अगर इस 14वीं शताब्दी के तर्क को भी सच मान लिया जाए, तब भी ऐसा मुमकिन नहीं है कि गोरखनाथ की कबीरदास और गुरुनानक के साथ अध्यात्मिक चर्चा हुई हो.


बाबा गोरखनाथ
बाबा गोरखनाथ

वैसा ऐसा पहली बार नहीं है, जब पीएम मोदी ने मंच पर भाषण देते हुए कोई तथ्यात्मक गलती की हो. इससे पहले वो बिहार की शक्ति का ज़िक्र करते हुए सम्राट अशोक, पाटिलपुत्र, नालंदा के साथ तक्षशिला का भी नाम लिया, जबकि सच्चाई ये है कि तक्षशिला पंजाब का हिस्सा रहा है और अब पाकिस्तान में है. अमेरिकी दौरे पर उन्होंने कोणार्क के सूर्य मंदिर को 2000 साल पुराना बता दिया, जबकि ये 700 साल पुराना है. पीएम मोदी एक बार गुप्त साम्राज्य का ज़िक्र करते हुए चंद्रगुप्त का नाम ले चुके हैं, जबकि चंद्रगुप्त मौर्य वंश से ताल्लुक रखते हैं.


रैली संबोधित करते पीएम मोदी.
रैली संबोधित करते पीएम मोदी.

अब इसे पीएम मोदी की गलती कहा जाएगा, रिसर्च में चूक कहा जाएगा या झूठ बोलना कहा जाएगा, ये आप पर... जनता पर निर्भर करता है.




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