20 जुलाई को देश के नए राष्ट्रपति का नाम पता चल जाएगा. इसी दिन प्रेसिडेंट इलेक्शनका रिजल्ट आना है. इस रेस में नाम कई हैं. एनडीए की तरफ से बिहार के गवर्नर रामनाथकोविंद का नाम आगे किया गया है और माना जा रहा है कि इन्हीं के नाम पर सहमति बनजाएगी. इसी बीच ये खबर भी तैर रही है कि कोविंद को पिछले महीने यानी मई मेंराष्ट्रपति के दूसरे ऑफिशियल पते यानी शिमला के प्रेसिडेंशियल रिट्रीट में एंट्रीनहीं मिल पाई थी. अब उन्हीं का नाम इस पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है. इसीबहाने जान लीजिए अपने राष्ट्रपति के देश में तीन ऑफिशियल पतों के बारे में.राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन:1911 में जब राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया तो साथही वायसराय के लिए दिल्ली में एक घर की भी ज़रूरत महसूस की गई. इसकी ज़िम्मेदारी उससमय के ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लैंडसियर लुटियंस को सौंपी गई. इसे बनाने में करीब1 करोड़ 70 लाख रुपये खर्च हुए. ऐसा पहले विश्व युद्ध के कारण हुआ था. आज यही खर्चकरीब 500 गुना ज्यादा होगा.अशोका हॉल, राष्ट्रपति भवनचार मंज़िला इस इमारत में करीब 340 कमरे हैं. राष्ट्रपति भवन के ऑफिशियल फंक्शनदरबार हॉल में होते हैं. बताया जाता है कि इसे बनाने में इंडिया का ही मटीरियल यूजकिया गया है. केवल दरबार हॉल में इटैलियन मारबल लगाया गया है. यहां फर्श काकार्पेट पर्सियन स्टाइल की तर्ज पर करीब 500 मजदूरों ने लगभग 2 साल तक काम करकेबनाया था. 1980 में राष्ट्रपति भवन के रख-रखाव पर सालाना करीब 2 करोड़ रुपये खर्चहोते थे, वहीं आज ये 100 करोड़ से भी अधिक है. दिल्ली में राष्ट्रपति भवन अपने मुगल गार्डन के लिए भी जाना जाता है. करीब 15 एकड़में फैला है. सर एडविन लुटियंस ने जिस तरह से राष्ट्रपति भवन को दो आर्किटेक्चरस्टाइल इंडियन और वेस्टर्न में बनाया, उसी तरह मुगल गार्डन भी इंग्लिश और इंडियनस्टाइल का ब्लैंड है. अभी तक मुगल गार्डन लोगों के लिए फरवरी से मार्च में खोलाजाता है. लेकिन अब इसे अगस्त से मार्च के बीच खोला जाएगा.इस गार्डन की सबसे बडी़ खासियत यहां के गुलाब हैं. करीब 159 तरह की किस्में हैं.कुछ गुलाबों के नाम नेशनल और इंटरनेशनल फेम के लोगों जैसे राजा राममोहन राय और मदरटेरेसा के नाम पर भी रखा गया है. यह वही राष्ट्रपति भवन है जहां एपीजे अब्दुल कलामभी रहे हैं जो सिर्फ दो कमरों में 5 सालों तक रहकर चले गए. उनके बारे में यह भी कहाजाता है कि उनके रिश्तेदार अगर यहां आते थे तो वो उनको बाहर होटल में रुकवाते थे.म्यूज़ियम, राष्ट्रपति भवनप्रेसिडेंशियल रिट्रीट,हिमाचल प्रदेशहिमाचल प्रदेश की समर कैपिटल शिमला में एक पहाड़ी है मशोबरा. यहीं पर है देश केराष्ट्रपति का दूसरा पता. प्रेसिडेंशियल रिट्रीट नाम से इस पैलेस को गवर्नर जनरललॉर्ड डल्हौजी ने 1850 में बनवाया था. परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति इस घर में हरसाल रहने के लिए आते हैं. जब तक भारत आज़ाद नहीं हुआ था तब तक भारत के वायसराय यहांरहते थे. पूरी तरह से लकड़ियों से बना हुआ ये पैलेस शिमला से करीब 7 किमी. दूर औरलगभग 7000 फीट की ऊंचाई पर है. लकड़ी पर धज्जी कलाकारी की गई है.प्रेसिडेंशियल रिट्रीटयहां 16 कमरे हैं और यह करीब 300 एकड़ के फॉरेस्ट एरिया से घिरा हुआ है. राष्ट्रपतिइसमें गर्मियों में करीब दो हफ्तों के लिए रहते हैं. इस दौरान राष्ट्रपति का कोरसचिवालय भी यहां शिफ्ट हो जाता है. बाकी के दिनों में जब भी कोई विदेशी वीआईपीगेस्ट शिमला आता है तो भारत सरकार उसे यहीं रुकवाती है. प्रेसिडेंशियल रिट्रीट मूलरूप से अभी भी शिमला की कोटी रियासत के राजा की प्रॉपर्टी है जिसे उन्होंने जीवन भरके लिए भारत सरकार को लीज़ पर दे रखा है. आज़ादी के बाद इंदिरा गांधी और राजीवगांधी यहां छुट्टियां मनाने के लिए आया करते थे.राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जीआजादी से पहले यहां वायसराय गर्मी के दिनों में आते थे. 1903 तक यहां ट्रेन नहींचलती थी और वायसराय को कलकत्ता से यहां पहुंचने में काफी दिक्कत होती थी. फिर यहांट्रेन शुरू हुई. यहीं पर बार्नेस कोर्ट भी है जहां पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धके बाद शिमला समझौता हुआ था. यह हिमाचल के राज्यपाल का निवास है.सिकंदराबाद का राष्ट्रपति निलयमःदेश में राष्ट्रपति के निवास स्थानों में से यह सबसे नया है. बात 1955 की है जबआज़ादी के बाद दक्षिण भारत में अलगाववादी प्रवृत्तियां सिर उठा रही थीं. दक्षिणभारत में लगातार एक सेंटिमेंट बढ़ रहा था कि वो उत्तर भारत से ही देश को चलाया जाजाता है. उस समय तमाम तरह के नारों के बीच ये बात प्रचारित की जा रही थी कि भारत केराष्ट्रपति के सारे घर नॉर्थ इंडिया में ही हैं.राष्ट्रपति निलयम, सिकंदराबादसाउथ इंडिया में राष्ट्रपति मेहमान के रूप में ही आते हैं. 1955 में तत्कालीनराष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसी के चलते तेलंगाना में ये राष्ट्रपति भवनबनवाने की बात कही. इसी के चलते राष्ट्रपति निलयम अब देश के राष्ट्रपति का तीसराऑफिशियल पता बना. इससे पहले राष्ट्रपति राजभवन में रुकते थे.राष्ट्रपति निलयमदरअसल जिस जगह और जिस बिल्डिंग को राष्ट्रपति निलयम बनाया गया, उसे 1860 मेंहैदराबाद के निज़ाम नाज़िर उद्दौला ने बनवाया था. जिसे बाद में ब्रिटिश रेज़ीडेंटका घर बना दिया गया. रेज़ीडेंट ब्रिटिश ऑफिसर होता था जिसे अंग्रेज़ अलग- अलगरियासतों में नियुक्त करते थे ताकि उन रियासतों पर नज़र रखी जा सके. इस बिल्डिंगमें राष्ट्रपति और उनके स्टाफ के लिए 16 कमरे हैं. इसके अलावा डाइनिंग हॉल औरदरबार हॉल भी है. राष्ट्रपति निलयम सिर्फ एक मंज़िला इमारत है. उस समय अंग्रेज़वायसराय जब भी दक्षिण भारत की विज़िट पर जाते थे तो यहीं रुकते थे. करीब 101 एकड़में फैले राष्ट्रपति निलयम में हर्बल गार्डन भी है जिसमें करीब 116 तरह पौधे हैं.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो भी देखें-https://www.youtube.com/watch?v=QfvdYOzUoQshttps://www.youtube.com/watch?v=pbbI6e9hUXsये भी 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