भगवान राम के पोस्टर पर जूते मारने वाले की ऐक्सिडेंट में मौत का सच क्या है
फेसबुक पर वायरल है ये फोटो, सच्चाई जानकर मन खराब हो जाता है.
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सोशल मीडिया पर ये पोस्ट खूब वायरल हो रही है. इसके मुताबिक, एक आदमी ने भगवान राम का अपमान किया. उसके किए की उसे सजा मिली. वो एक दुर्घटना में मारा गया.
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राम का अपमान करोगे, तो मारे जाओगे!25 मार्च को रामनवमी थी. इसी दिन हमारी नजर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक रामनामी पोस्ट पर गई. इस पोस्ट को सैकड़ों लोग शेयर कर रहे हैं. इस पोस्ट के मुताबिक - कुछ दिनों पहले केरल में कुछ खास तरह की विचारधारा से जुड़े लोगों ने राम की तस्वीर को चप्पल मारा. उनमें से एक की ऐक्सिडेंट में मौत हो गई. राम का अपमान करने वाले के साथ कुदरत इसी तरह से न्याय करती है. जो भी राम का अपमान करने की हिमाकत करता है, उसका 'राम नाम सत्य' हो जाता है.
क्योंकि जो राम का अपमान करता है, उसे इस पाप का फल भुगतना पड़ता है. वो मारा जाता है.
इस वायरल पोस्ट में क्या है? इस वायरल पोस्ट में तीन तस्वीरों का कॉम्बो है. एक फोटो में कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं. ऐसे लग रहा है कि कोई प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से कुछ के हाथ में राम की फोटो है. सबसे बाईं ओर काले रंग की कमीज पहने हुए एक आदमी चल रहा है. उसके भी हाथ में राम का पोस्टर है. इस पोस्टर के ऊपर उसने एक चप्पल रखी हुई है. लाल रंग का घेरा बनाकर इस आदमी को हाइलाइट किया गया है. इस पोस्ट में क्लब्ड दूसरी तस्वीर में एक कार है. कार को देखकर लगता है कि उसका बुरी तरह ऐक्सिडेंट हुआ है. कार के आगे का हिस्सा टूटकर जमीन पर गिर गया है. कार बुरी तरह पिचक गई है. तीसरी तस्वीर में एक शख्स नजर आता है. उसके सिर पर पट्टी बंधी है. उसकी आंखें बंद हैं और मुंह खुला हुआ है. लोग कह रहे हैं कि ये वो ही पहली फोटो में लाल घेरे के अंदर नजर आ रहा इंसान है. जिसने राम की फोटो को चप्पल से मारा था. लोग लिख रहे हैं कि उसको राम का अपमान करने की सजा मिली. एक दुर्घटना में उसकी मौत हो गई.

लोग लिख रहे हैं कि पहली पोस्ट में लाल गोले के अंदर दिखने वाला शख्स ही तीसरी फोटो में मरा पड़ा है. उसे राम का अपमान करने की सजा मिली है.
अलग-अलग जगह अलग-अलग बात इससे जुड़ी कई पोस्ट्स हैं. उनकी भाषा अलग-अलग है. कहीं लिखा है कि ये घटना केरल की है. जहां राम की तस्वीर को कांग्रेसी और वामपंथी चप्पल मार रहे थे. किसी पोस्ट में गाली देते हुए चेतावनी दी गई है. कि जो भी राम का अपमान करेगा, उसे 'कुत्ते की मौत' मिलेगी. उसका वो ही अंजाम होगा, जैसे पोस्ट में बताए गए शख्स का हुआ. किसी-किसी पोस्ट में घटना को तमिलनाडु का भी बताया गया है.

कुछ पोस्ट्स में इसे केरल की घटना बताया गया है. कुछ पोस्ट्स में इसे तमिलनाडु की घटना बता रहे हैं.
इस वायरल पोस्ट का सच क्या है? हमने पड़ताल की तो हमें तीसरी फोटो में दिख रहे शख्स की असलियत मालूम चली. ये खबर भारत समेत नाइजीरिया की कई न्यूज़वेबसाइट्स पर है. जिनमें से एक को आप यहां क्लिक करके
देख सकते हैं. इनके मुताबिक, भारत में रह रहे एक नाइजीरियाई मूल के शख्स की मौत हो गई. मरने वाले का नाम इफेयानी माडू था. 13 मार्च, 2017 को एक रोड ऐक्सिडेंट में उनकी मौत हो गई. माडू बेंगलुरु में रहते थे. उनकी बाइक सड़क पर फिसल गई. यहां रह रहे अफ्रीकी मूल के लोगों ने कहा कि माडू मरे नहीं, बल्कि उन्हें मारा गया. उनके मुताबिक, ठीक एक दिन पहले रात के करीब 10 बजे माडू कुछ लोगों के साथ देखे गए थे. सादे कपड़े पहने हुए पुलिसवालों के साथ. बेंगलुरु में रहने वाले नाइजीरियाई मूल के लोगों ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास को चिट्ठी भी लिखी थी. उन्होंने माडू की मौत का केस सीआईडी को सौंपने की मांग की थी. उधर पुलिस का दावा था कि उन्होंने माडू को हिरासत में लिया ही नहीं कभी. इसी खबर के नीचे हमें माडू की कुछ तस्वीरें मिलीं. ऐक्सिडेंट के बाद की तस्वीरें. जिस वायरल पोस्ट का हम पोस्टमॉर्टम कर रहे हैं, उसमें यहीं से ली गई एक तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है. राम के अपमान वाली बात का सच? छानबीन के दौरान हमें एक वेबसाइट नजर आई. इसमें 23 मार्च, 2018 की एक खबर दिखी. खबर में जो फोटो है, वो वही फोटो है जो वायरल हो रही पोस्ट में इस्तेमाल हुई है. कुछ लोग राम का पोस्टर लेकर कुछ मोर्चा सा निकाल रहे हैं. इनमें से कुछ के हाथ में चप्पल भी है. जो उन्होंने पोस्टर के ऊपर रखी हुई है. इस खबर के मुताबिक, ये तमिलनाडु के माइलादुदुराई की घटना है. तमिलनाडु के ही पुधुकोट्टाई नाम की जगह पर किसी ने पेरियार की मूर्ति तोड़ दी थी. इसके विरोध में पेरियार संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया. पेरियार की मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में इन लोगों ने भगवान राम की फोटो को चप्पल से मारा.

सत्यविजयी.कॉम नाम की वेबसाइट पर हमें इस खबर का लिंक मिला. वहीं पर ये तस्वीर भी मिली.
20 मार्च, 2018 को निकला था ये राम-विरोधी मोर्चा माइलादुदुराई के बारे में सर्च करते हुए हमें एनडीटीवी की एक खबर का लिंक मिला. ये 23 मार्च, 2018 की खबर थी. इसके मुताबिक, तमिलनाडु के माइलादुदुराई में राम के पोस्टर्स के साथ हुए अपमान के खिलाफ बंद बुलाया गया. शहर में 2,000 से ऊपर दुकानें बंद रहीं. ज्यादातर सड़कें सुनसान नजर आईं. ये बंद हिंदू संगठनों ने बुलाया था. इसी खबर में आगे जिक्र है. कि 20 मार्च, 2018 को किसी प्रफेसर जयरमण नाम के शख्स की अगुवाई में कुछ लोगों ने एक जुलूस निकाला. और जुलूस में राम के फोटो का अपमान किया. इसी के विरोध में बंद बुलाया गया था. लोगों की शिकायत पर पुलिस ने प्रफेसर जयरमण सहित 14 लोगों को गिरफ्तार भी किया. इस खबर को पढ़कर लगता है कि यहां उसी राम-विरोधी जुलूस का जिक्र हो रहा है.

नाइजीरिया वाली जिस खबर के बारे में आपको बताया, वहां माडू की ये तस्वीर भी मिली.
वायरल पोस्ट की तफ्तीश के बाद क्या मालूम चला? पोस्ट में राम की तस्वीर के अपमान की बात की गई थी. ये आरोप सच निकला. लेकिन ये दावा कि ऐसा करने वाले की सड़क हादसे में मौत हो गई, झूठ है. जिस शख्स को राम के अपमान की सजा मिलने का दावा किया जा रहा है, वो असल में एक अफ्रीकी मूल का व्यक्ति है. 2017 में एक बाइक ऐक्सिडेंट की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई थी. उसकी फोटो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.

ये उस मोर्चे की ऑरिजनल तस्वीर है. खबरों के मुताबिक, इस मोर्चे के विरोध में हिंदू संगठनों ने शहर बंद बुलाया था.
किसी की भी आस्था का अपमान नहीं करना चाहिए राम हों या कोई भी और धार्मिक प्रतीक, किसी की आस्था का अपमान नहीं किया जाना चाहिए. विरोध जताने के कई और क्रिएटिव तरीके हो सकते हैं. किसी ने पेरियार की मूर्ति तोड़ी. उसने बहुत गलत किया. लेकिन उस गलत के जवाब में राम की तस्वीर को चप्पल मारना कौन सा सही है? गलत के जवाब में गलत करना तो और भी बुरा है. बाकी बात रही कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा मिलाकर झूठ गढ़ने वालों की, तो उनका क्या कहें. ऐसे लोगों की पोल खोलने पर ही तो इतनी मेहनत करनी पड़ रही है.
अगर आपको भी ऐसी ही कोई वायरल पोस्ट दिखी है और आप उसका सच जानना चाहते हैं, तो हमें lallantopmail@gmail.com पर मेल करके बताइए. हम उसका पूरा पोस्टमॉर्टम करके आपको सच-झूठ बताएंगे.
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