ब्रज मंडल यात्रा से पहले नूंह में इंटरनेट और SMS सेवा बंद, हरियाणा पुलिस को इस बात का है डर!
बीते साल नूंह ज़िले में ही Braj Mandal Jalabhishek Yatra के दौरान हिंसा हुई थी. ये हिंसा आसपास के ज़िलों में भी फैल गई थी. जिसमें एक मौलवी समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी. साथ ही, 15 लोग घायल हो गए थे.

हरियाणा (Haryana) सरकार ने नूंह ज़िले में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया है. साथ ही, बल्क SMS (एक साथ बहुत सारे मैसेज) भेजने पर भी रोक लगाई गई है (suspension of mobile internet and bulk SMS services in Nuh district). ये तैयारी ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा के मद्देनज़र की गई है, जो 22 जुलाई को होनी है. बीते साल इस यात्रा में जमकर हिंसा हुई थी. इस हिंसा में 7 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मियों समेत कम से कम 15 दूसरे लोग घायल हो गए थे.
हरियाणा सरकार के आदेश के मुताबिक़, नूंह ज़िले में 21 जुलाई की शाम 6 बजे से 22 जुलाई की शाम 6 बजे तक मोबाइल इंटरनेट बंद रहेगा. बताया गया कि नूंह ज़िले में तनाव, परेशानी, आंदोलन, सार्वजनिक और निज़ी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सार्वजनिक शांति और सौहार्द्र बिगड़ने की आशंका है. इसीलिए वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए 'ग़लत सूचना और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए' ये आदेश दिया गया है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़, पुलिस ने तैयारियों को लेकर बताया कि ड्रोन के ज़रिए कड़ी निगरानी की जा रही है. पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लगभग 2,500 जवानों को तैनात किया गया है. 100 स्वयंसेवक तैयार हैं, जो यात्रा के रास्ते पर आवाजाही के समन्वय में पुलिस की मदद करेंगे. SP की मौजूदगी में 21 जुलाई को ज़िले में फ्लैग मार्च भी निकाला गया. ज़िले में जगह-जगह घुड़सवार पुलिस की मौजूदगी भी दिख रही है. यात्रा वाले रास्ते पर स्थित मंदिरों से सटे अरावली पर्वतों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. यात्रा पूरी होने तक शराब की दुकानें भी बंद ही रहेंगी.
पुलिस ने गौरक्षक बिट्टू बजरंगी को भी यात्रा में शामिल होने की मंजूरी देने से मना कर दिया है. गोरक्षा बजरंग फ़ोर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बजरंगी को बीते साल उनके विभाजनकारी बयानों के लिए गिरफ़्तार किया गया था. उनके बयान से ही कथित तौर पर नूंह जिले में सांप्रदायिक झड़पें भड़क उठी थीं.
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बताते चलें, बीते साल 31 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद के जुलूस को रोकने की कोशिश में भीड़ द्वारा कथित तौर पथराव किया गया था और कारों में आग भी लगा दिए गए थे. इस हिंसा से दो होमगार्ड समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी. कई पुलिसकर्मियों समेत 15 दूसरे लोग घायल भी हो गए थे. उसी रात गुरुग्राम में एक मस्जिद में मौलवी पर हमला कर दिया गया था, जिसमें उनकी जान चली गई थी. राज्य में तत्कालीन मनोहर खट्टर के नेतृत्व वाली BJP की सरकार को विपक्षी दलों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था.
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