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रीडर्स की चीख़ें निकाल देने वाले स्टीफन किंग की लिखी ये 6 फिल्में मस्ट वॉच हैं!

'शॉशैंक रिडेंप्शन' से लेकर क्यूब्रिक की 'द शाइनिंग' और सिनेमा इतिहास की सबसे कमाऊ भुतही फिल्म 'इट' भी इन्होंने ही लिखी है.

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'इट' (2017) में खूंखार जोकर की एक झलक; लेखक स्टीफन किंग.
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रुचिका
21 सितंबर 2020 (अपडेटेड: 21 सितंबर 2020, 07:03 PM IST)
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साल 1998 में ज़ी टीवी पर 'वोह' नाम का एक हॉरर शो आता था. इसमें भूत एक जोकर था. मैं उस जोकर से बहुत डरती थी. मुझे अब भी जोकर बने लोगों को देखकर डर लगता है. ऐसा लगता है जैसे इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इनसे हाथ मिलाऊंगी तो ये मेरा हाथ खा जाएंगे.

जो लोग जोकर बनते हैं वो तो हमारी तरह आम इंसान ही होते हैं. इनसे डर लगता है ये हमारी खामी है. ये एक फ़ोबिया है. इसे कॉलरोफ़ोबिया कहते हैं. इसमें लोगों को जोकर से बहुत डर लगता है. ज़ी टीवी का वो शो 1990 में आई अमेरिकी मिनी-सीरीज़ 'इट' से इंस्पायर्ड था. और ये सीरीज स्टीफ़न किंग के इसी नाम वाले नॉवेल पर बेज़्ड थी, जो 1986 में पब्लिश हुई थी.

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2017 और 2019 में 'इट' सीरीज़ की दो फिल्में रिलीज़
हो चुकी हैं,
जो इसी नॉवेल पर बेस्ड थीं. 'इट' सिनेमाई इतिहास की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हॉरर फ़िल्म है.

21 सितंबर को स्टीफन का बर्थडे होता है. वे अमेरिकी राइटर हैं. हॉरर, सस्पेंस, साइंस फ़िक्शन और फ़ैंटेसी पर लिखते हैं. इनकी लिखी शॉर्ट स्टोरीज़ और नॉवेल पर कई फ़िल्में बनी हैं. IMDB पर सबसे ज़्यादा रेटिंग वाली फ़िल्म है 'द शॉशेंक रिडेंप्शन.' उसकी कहानी भी किंग की शॉर्ट स्टोरी 'Rita Hayworth and Shawshank Redemption' से ली गई है.

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नॉर्थ अमेरिका के पोर्टलैंड शहर में 1947 में जन्मे किंग ने अब तक 56 नॉवेल और करीब 200 शॉर्ट स्टोरी लिखी हैं. उनका करियर करीब 41 साल लंबा है. एक समय वो भी था जब पब्लिशर्स को लगता था कि लेखक का साल में एक ही नॉवेल छपना चाहिए क्योंकि शायद पब्लिक स्वीकार न करे. उस समय में किंग ने अपने सात नॉवेल रिचर्ड बाकमन के छद्म नाम से लिखे.

स्टीफ़न किंग एक बेहतरीन कहानिकार हैं. चाहे साहित्यिक तौर पर वे दुनिया के बेस्ट लेखकों में न आते हों लेकिन वो अपने रीडर्स को अपनी बनाई दुनिया में कैद कर लेते हैं. उनके नॉवेल के हरेक किरदार से आप जुड़ते जाते हैं. किंग अपने किरदारों को ऐसी स्थिति में डालते हैं जहां वे जीने के लिए संघर्ष करते हैं. यही संघर्ष उनकी हर कहानी में रोमांच लाता है. इनकी कहानियों में कई बार अच्छे पात्र मर भी जाते हैं क्योंकि स्टीफ़न को पता है कि असल ज़िंदगी में कभी जीत बुराई की भी होती है.


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स्टीफन किंग.

उनकी लिखी कुछ बेहतरीन शॉर्ट स्टोरीज़ और नॉवेल पर ये बेहतरीन फ़िल्में बनी हैं. बहुत एंगेजिंग. अब तक न देखा हो तो जल्द ही देख लें:


#1. कैरी, 1976

स्टीफ़न को पहले अपनी इस कहानी पर उतना भरोसा नहीं था. नॉवेल के शुरुआती पन्ने लिखकर डस्टबिन में डाल दिए थे. उनकी पत्नी टैबिथा ने इन्हें बचाया और पति से कहा नॉवेल पूरा करो. इसी पर 1976 में ये सुपरनेचुरल हॉरर 'कैरी' आई जो मस्ट वॉच है. ब्रायन डी पाल्मा (मिशन इम्पॉसिबल, द अनटचेबल्स) ने डायरेक्ट किया था. 2013 में 'कैरी' का रीमेक भी आया था.


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1976 में आई फ़िल्म कैरी के एक सीन में सिसि स्पेसेक.

ये कहानी एक टीनएज लड़की कैरी की है जिसमें परलौकिक ताकतें हैं. मन की शक्ति से वो चीज़ों को मूव कर सकती है. उसकी मां कट्टर कैथोलिक औरत है और अपनी बेटी को धर्म के नाम से डरा-धमकाकर बहुत मारती-पीटती है.

'कैरी' शायद पहली फ़िल्म थी जिसमें मेंस्ट्रुएशन ग्रैफ़िकली दिखाया गया था. कैरी की मां ने उसे कभी इसकी जानकारी नहीं दी थी. जब कैरी को पीरियड्स शुरू होते हैं तो उसे लगता है वो मर जाएगी. उस सीन में वो नहा रही होती है और बिना कपड़ों के बाथरूम से बाहर निकल आती है. सारी लड़कियां उसका मज़ाक बना देती हैं. कैरी की जिम ट्रेनर को उससे सहानुभूति है. वो उसे शांत करने की कोशिश करती है और कैरी अपनी शक्ति से बाथरूम का बल्ब फोड़ देती है.


#2. द डार्क टावर, 2017

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फिल्म में इदरिस एल्बा और टॉम टेलर अपने किरदारों में.

'द डार्क टावर' की आठ किताबों की सीरीज़ आई थी. किंग के हर नॉवेल की कहानी 'द डार्क टावर' से कनेक्टेड रहती है. 31 जुलाई को इस नाम वाली साइंस फैंटेसी आई. इसमें 11 साल के जैक चैंबर्स को वो सब दिखता है जो दूसरों को नज़र नहीं आता. वो काले कपड़े पहने एक आदमी को देखता है जो एक टावर नष्ट करके दुनिया को अंधेरे में धकेल देना चाहता है.

वहीं एक आदमी है जो पैसे लेकर लोगों की पिस्तौल से हत्या करता है. वो उस काले कपड़े वाले को रोकने में लगा है. जैक की मां, उसका 'सौतेला' पिता और डॉक्टर उसकी बातों को महज़ सपने बताकर खारिज कर देते हैं. वो कहते हैं कि जैक अपने पिता की मृत्यु के कारण ट्रॉमा में है इसलिए उसे ऐसे सपने आ रहे हैं.


#3. जेरल्ड्स गेम, 1992

किंग के इस सस्पेंस नॉवेल पर भी फिल्म बन गई है, जो नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है. इस कहानी में पति-पत्नी एक ऐसी जगह छुट्टी मनाने पहुंचते हैं जहां दूर-दूर तक उनकी आवाज़ सुनने वाले कोई नहीं है. ऐसे में पति जब सेक्स के लिए अपनी पत्नी के हाथ बैड से बांध देता है, तो पत्नी इसका विरोध करती है.

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वो अपने पति को लात मारकर बैड से गिरा देती है जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आ जाती है और वो वहीं मर जाता है. ऐसे में लड़की बिलकुल अकेली है. उसके हाथ बंधे हुए हैं और उसकी चीखें सुनने वाला कोई नहीं. लड़की का बचपन बहुत दुखद था. उसकी स्मृतियां उसे घेर लेती हैं. ऐसे में उसकी अंदर से आती आवाज़ें उसे घेर लेती हैं. आखिर वो बच निकलने में कामयाब होगी या कुछ और सुपरनेचुरल ताकतें उसे घेर लेंगी?


#4. फिल्म 1408, 2007

किंग की ये लघु कथा 1999 में पब्लिश हुई थी. इस पर 2007 में इसी नाम वाली साइकोलॉजिकल थ्रिलर आई थी. उस फ़िल्म में जॉन क्यूज़ैक (सेरेंडिपिटी, 2012) ने माइक नाम के नाकामयाब लेखक का रोल किया था जो सुपरनेचुरल घटनाओं के बारे में लिखता है और उसका कोई भरोसा नहीं करता.


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फ़िल्म 1408 के एक सीन में जॉन क्यूज़ेक.

अपनी बेटी के मरने के बाद से माइक पत्नी से अलग रह रहा होता है. एक दिन उसके पास बिना नाम का एक पोस्टकार्ड आता है जिसमें न्यू यॉर्क के होटल डॉलफ़िन का ज़िक्र होता है कि "इसके रूम नंबर 1408 में मत घुसना." माइक इसे चुनौती की तरह लेता है और होटल वालों से यही रूम देने की ज़िद करता है. होटल का मैनेजर  माइक को समझाने की कोशिश करता है कि बीते 95 सालों से कोई भी इस कमरे में एक घंटे से ज़्यादा ज़िंदा नहीं बचा. इस कमरे में अब तक 56 लोग मर चुके हैं. इस कमरे में पहुंचने के बाद माइक के साथ एक के बाद एक ऐसी घटनाएं होनी शुरू होती हैं जो नामुमकिन है.


#5. द शॉशेंक रिडेंप्शन, 1994

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द शॉशेंक रिडेंप्शन फ़िल्म का एक सीन.

ये एंडी नाम के बैंकर की कहानी है जो किरदार टिम रॉबिन्स ने किया था. वो बेगुनाह होता है फिर भी पत्नी और उसके प्रेमी को मारने के जुर्म में उसे उम्र कैद हो जाती है. उसे शॉशेंक स्टेट जेल में रखा जाता है. ये फ़िल्म और इसकी कहानी इतनी अद्भुत थी कि इसे 7 ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किया गया था. किंग की बाकी कहानियों की तरह ये हॉरर नहीं थी लेकिन इसमें गज़ब का सस्पेंस और जीने के लिए उम्मीद मिलती है. इसकी रेटिंग IMDB पर 9.2 है जो सबसे ज्यादा है.


#6. द शाइनिंग, 1980

स्टीफ़न किंग ने ये नॉवेल 1977 में लिखा था. फिर 1980 में इसी पर आधारित फ़िल्म आई. ये कहानी जैक टॉरेंस नाम के लेखक की होती है जो शराब की लत से रिकवर होने की कोशिश में है. उसे एक होटल में केयरटेकर की नौकरी मिलती है. सर्दी का मौसम होता है. वो अपनी पत्नी और बेटे डैनी के साथ होटल पहुंचता है.


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द शाइनिंग फ़िल्म का एक  दृश्य.

डैनी के पास एक अद्भुत शक्ति होती है जिसे इस फ़िल्म में 'द शाइनिंग' कहा गया है. इस शक्ति के ज़रिए वो होटल के खौफ़नाक अतीत को देख सकता है. होटल के कुक के पास भी डैनी जैसी शक्तियां मौजूद हैं जिसके ज़रिए वो उससे मन में ही बात भी कर सकता है. होटल में जैक से पहले एक ऐसा केयरटेकर हुआ करता था जो बाद में पागल हो गया था. उसने अपनी दोनों बेटियों और पत्नी को मारकर उनके टुकड़े कर दिए थे.

जैक भी धीरे-धीरे पिछले केयरटेकर की तरह पागल हो जाता है. फ़िल्म का अंत कुछ ऐसा है जिसकी गुत्थी लोग आज भी सुलझाने में लगे हैं.



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