असम के 10वीं के रिजल्ट आ गए हैं. सरफराज हुसैन ने टॉप किया है. उसे दसवीं में 600में से 590 नंबर मिले हैं. खास ये है कि सरफराज ने अपनी पढ़ाई शंकरदेव शिशु निकेतनसे की है. इस स्कूल को आरएसएस से जुड़ी एक संस्था 'विद्याभारती' चलाती है.--------------------------------------------------------------------------------घर पहुंचे एजुकेशन मिनिस्टर हेमंत बिस्व सरमाअसम के एजुकेशन मिनिस्टर हेमंत बिस्व सरमा ने उसको घर जाकर बधाई दी. उन्होंने उसे 5लाख का इनाम दिया और 10 लाख रुपये स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने को दिए. हेमंतबिस्व सर्मा PWD को स्कूल तक एक अच्छी सड़क बनाने का भी आदेश दिया है.असम सरकार 5लाख रुपये सरफराज के नाम फिक्स डिपाजिट कराएगी.--------------------------------------------------------------------------------तगड़ी संस्कृत जानता है लड़कासरफराज पहले भी संस्कृत निबंध और डिबेट कम्पटीशन जीतता रहा है. दो साल पहले सरफराजने ऑल गुवाहाटी गीता-पाठ कॉम्पिटीशन भी जीता था. सरफराज कहता है मुझे गीता के श्लोकया गायत्री मन्त्र पढ़ने में कोई परेशानी नहीं है. सरफाज को आठवीं तक संस्कृत मेंहमेशा 100 में से 100 नंबर मिले हैं.--------------------------------------------------------------------------------इंजीनियर बनेगा सरफराजसरफराज आगे की पढ़ाई वहां के फेमस कॉटन कॉलेज से करना चाहता है. सरकार उसकी सारीपढ़ाई का बोझ उठाएगी. 16 साल का सरफराज आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है.--------------------------------------------------------------------------------पढ़ाई धर्म से ज्यादा जरूरी हैसरफराज के पिता अजमल हुसैन कहते हैं उन्हें कभी नहीं लगा कि उनको अपने बेटे को संघके स्कूल में डालने में कोई परेशानी है. क्योंकि वहां की पढ़ाई बहुत अच्छी है. बहुतसारे लोग मेरे बेटे के संघ परिवार के स्कूल से पढ़े होने के बारे में बात कर रहे हैंपर मैं पूछता हूं कि इसमें परेशानी क्या है? सबसे पहले हम असमिया हैं. मेरी बेटी नेभी इसी स्कूल से 3 साल पहले ग्रेजुएशन किया है.--------------------------------------------------------------------------------कूल हैं पापा, चाहते हैं बस लड़का अच्छा इंसान बनेपहली बार जब मैं अपने दोनों बच्चों को उस स्कूल में लेकर आया था तो यहां हेडमास्टरने मुझसे पूछा था आप इस कदम के बारे में अच्छे से सोच चुके हैं? क्योंकि यहां पढ़ाईके दौरान कई बार गायत्री मन्त्र या सरस्वती वंदना जैसे श्लोक पढ़वाए जाते हैं. हुसैनकहते हैं मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि मैं अपने बच्चों के लिए अच्छीपढ़ाई चाहता था. ताकि उनका चरित्र अच्छा हो सके.---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- होटल में काम करते हैं पापाहुसैन गुवाहाटी के एक होटल में काम करते हैं. हुसैन कहते हैं कि वो दर्रांग जिले केपथारूघाट से आते हैं. जहां 1894 में हिंदू और मुसलमान किसानों ने मिलकर अंग्रेजोंके खिलाफ आंदोलन किया था. हुसैन कहते हैं हमारे पूर्वज मिलकर अंग्रेजों के खिलाफमिलकर लड़ सकते हैं. तो मुझे कोई कारण नहीं समझ आता, क्यों हम साथ पढ़ भी नहीं सकते?क्या अलग-अलग धर्मों के लोग क्रिश्चियन स्कूलों में नहीं पढ़ते?--------------------------------------------------------------------------------स्कूल में क्रिश्चियन और मुस्लिम लड़के और भी हैंअसम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निर्मल बरुआ कहते हैं कि सरफराज टॉप करनेवाला पहला लड़का नहीं है. इससे पहले भी मुस्लिम और क्रिश्चियन लड़के स्कूल से टॉपकरते रहे हैं. इस स्कूल में बहुत से दूसरे धर्मों के स्टूडेंट भी हैं.--------------------------------------------------------------------------------धांसू रिकॉर्ड रहा है स्कूल काइस एग्जाम में 3.8 लाख स्टूडेंट बैठे थे. जिसमें से 2.39 लाख पास हुए हैं. और मात्र54,197 को ही फर्स्ट डिवीजन मिली है. समिति के असम में 231 स्कूल हैं. टॉप 20 मेंजो 232 स्टूडेंट हैं. उसमें इस स्कूल से 39 हैं.