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सड़क पार कर रहे व्यक्ति को टक्कर मारी, कोर्ट ने बरी किया, कहा- 'घायल जेब्रा क्रॉसिंग पर नहीं था'

कोर्ट में आरोपी के खिलाफ रैश ड्राइविंग का केस साबित नहीं हो सका.

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10 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 10 अगस्त 2022, 07:52 PM IST)
Mumbai court acquits accused of rash driving case
मुंबई की मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला (सांकेतिक तस्वीर: आजतक)
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महाराष्ट्र की एक अदालत ने सड़क पार करते व्यक्ति को टक्कर मारने के आरोपी को इसलिए बरी कर दिया, क्योंकि पीड़ित जेब्रा क्रॉसिंग पर नहीं था. हालांकि आरोपी तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहा था, लेकिन कोर्ट ने उसे बरी करने का आधार ये दिया कि हादसे में घायल हुआ व्यक्ति ऐसी जगह से सड़क पार कर रहा था, जहां ज़ेब्रा क्रॉसिंग नहीं थी. मुंबई के गिरगांव में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पाया कि घटनास्थल पर कोई सिग्नल भी नहीं था. कोर्ट के मुताबिक इस मामले में गलती पीड़ित की थी. 

मामला क्या था?

इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक घटना 25 जून, 2018 की है. रात करीब साढ़े 9 बजे इमरान खान ओपेरा हाउस जंक्शन फ्रेंच ब्रिज पार कर रहे थे, तभी 31 वर्षीय एक शख्स ने अपनी तेज रफ्तार होंडा एक्टिवा से इमरान को टक्कर मार दी. इससे खान को गंभीर चोट लगी थी और आरोपी चालक पर भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (रैश ड्राइविंग) और 338 (जीवन को खतरे में डालना) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

कोर्ट में सामने आए तथ्य 

हादसे में घायल हुए इमरान, उनके भाई और एक चश्मदीद गवाह ने अदालत को बताया कि उन्हें नहीं पता था कि वे ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार कर रहे थे या नहीं.

वहीं मजिस्ट्रेट केके पाटिल ने कहा कि इस मामले के जांच अधिकारी ने अपनी जिरह में साफ तौर पर स्वीकार किया था कि घटनास्थल पर न तो सिग्नल है और न ही ज़ेब्रा क्रॉसिंग. उन्होंने कहा,

इसलिए, ऐसा लगता है कि दोनों चश्मदीद गवाहों ने उस तथ्य को छिपाने की कोशिश की जो उनके खिलाफ है. इसलिए, यह साफ है कि दुर्घटना में घायल इमरान खान की गलती थी क्योंकि उन्होंने सड़क पार करने के लिए बिना किसी ज़ेब्रा क्रॉसिंग या सिग्नल के सड़क पार की थी. 

कोर्ट ने यह भी पाया कि घटनास्थल जमीन से 30 फीट की ऊंचाई पर है. ऐसे में मजिस्ट्रेट ने घटना में आरोपी की संलिप्तता पर भी संदेह जताया.

अदालत ने यह भी देखा कि घटना के सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में स्वीकार करने योग्य नहीं थे क्योंकि फुटेज तैयार करने वाले व्यक्ति ने अपनी जिरह में कहा था कि उसके पास सीडी में सीसीटीवी फुटेज लेने और तैयार करने का सर्टिफिकेट नहीं था. मजिस्ट्रेट पाटिल ने कहा कि इसलिए सीडी में फुटेज को लेकर पेश किया गया सबूत काफी नहीं है. 

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