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अडानी ग्रुप में निवेश करने वाली कंपनी का लाइसेंस रद्द हुआ, करोड़ों पैसे लगाए थे

हिंडनबर्ग रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अडानी ग्रुप अपने शेयर्स के दाम में हेरफेर करने के लिए मॉरिशस में बनाई गई फर्ज़ी कंपनियों का इस्तेमाल करती है.

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16 सितंबर 2023 (अपडेटेड: 16 सितंबर 2023, 06:09 PM IST)
Mauritian regulator revokes licenses of firm linked to Adani Group's funds under probe
अडानी ग्रुप ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया (तस्वीर- इंडिया टुडे)
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शेयर में धांधली और अकाउंटिंग फ्रॉड के आरोपों की जांच का सामना कर रहे अडानी ग्रुप से जुड़ी एक और खबर आई है. खबर ये है कि अडानी ग्रुप में निवेश करने वाली मॉरिशस की दो कंपनियों से जुड़े एक फर्म का लाइसेंस मई 2022 में रद्द कर दिया गया. मॉरिशस में वित्तीय कानून के संचालक वित्तीय सेवा आयोग (Financial Services Commission or FSC) ने इमर्जिंग इंडिया फंड मैनेजमेंट लिमिटेड (EIFM) का व्यापार और निवेश लाइसेंस रद्द कर दिया था. EIFM दो विदेशी फंड का संचालन करता है. इन दोनों विदेशी फंड्स ने अडानी ग्रुप की कई कंपनियों में करोड़ों का निवेश किया था. इन दोनों फंड्स पर जांच की जा रही है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉरिशस के वित्तीय सेवा आयोग ने इस कंपनी (EIMF) पर आरोप लगाया है कि इसने वित्तीय कानूनों के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है. जनवरी 2023 में आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट में भी इस कंपनी के नियंत्रण वाले दोनों फंड्स का ज़िक्र था. हिंडनबर्ग रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अडानी ग्रुप अपने शेयर्स के दाम में हेरफेर करने के लिए मॉरिशस में बनाई गई फर्ज़ी कंपनियों का इस्तेमाल करती है.

FSC के मुताबिक, EIFM ने अपने क्लाइंट्स के लेनदेन का हिसाब सही मानकों के मुताबिक नहीं रखा. कंपनी ने डमी (फर्ज़ी) ऑफिसर्स को सुरक्षा भी दी. इस कंपनी ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को फंडिंग के रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों का पालन नहीं किया.

दोनों फंड्स से अडानी ग्रुप में बड़ा निवेश

EIFM के अंतर्गत जो दो फंड्स हैं, उनके नाम हैं- इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स (EIFF) और ईएम रिसर्जेंट फंड (EMRF). इन दोनों फंड्स ने घोषणा कर दी थी कि इनका कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर EIFM है. जिन 13 विदेशी निवेशकों की जांच की जा रही है, उनमें ये दोनों फंड्स भी शामिल हैं. EIFM पर आरोप है कि उसने मॉरिशस के वित्तीय इंटेलीजेंस और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का उल्लंघन किया था.

SEBI ने अगस्त 2013 में इन दो फंड्स के मालिकों के बारे में पता लगाने की कोशिश की थी. हाल में खोजी पत्रकारों की एक संस्था OCCRP की रिपोर्ट में भी इन दोनों फंड्स का नाम आया था. रिपोर्ट में बताया गया था कि इन दोनों फंड्स ने सालों तक अडानी ग्रुप की चार कंपनियों - अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अडानी पावर और बाद में अडानी ट्रांसमिशन के शेयर खरीदे. रिपोर्ट बताती है कि मई 2014 में इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स के पास अडानी ग्रुप की तीन कंपनियों के 1,571 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर थे. जबकि EM रिसर्जेंट फंड ने अपने पूरे पोर्टफोलियो का लगभग दो-तिहाई हिस्से से अडानी समूह की कंपनियों के शेयर ख़रीद रखे थे. जिनका कुल मूल्य क़रीब 578 करोड़ रुपये था.

इन सभी आरोपों पर अडानी ग्रुप से जवाब भी आया था. अडानी ग्रुप के एक प्रवक्ता ने रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था. बताया था कि शेयर मार्केट में उनकी लिस्टेड कंपनियां सभी कानूनों का पालन करती है. नए आरोपों पर अडानी समूह ने कहा था कि नए सबूत और दावे कुछ भी नहीं हैं बल्कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए निराधार आरोपों का दोहराव है.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मार्च-अप्रैल 2018 के दौरान EIFM के दो फंड्स (फोकस और रिसरजेंट) के पास अडानी पावर लिमिटेड के 3.9%, अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड के 3.86% और अडानी इंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड के 1.73% शेयर्स थे.

ये भी पढ़ें - अडानी-हिंडनबर्ग मामले में SEBI की कार्रवाई पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

लाइसेंस रद्द होने का मतलब?

FSC से मिली जानकारी के मुताबिक, EIFM का लाइसेंस रद्द होने का मतलब है कि कंपनी का पूरा काम ही ठप हो गया है. यानी कंपनी को बंद माना जा सकता है. FSC के प्रवक्ता ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा,

“अगर किसी का लाइसेंस रद्द किया जाता है, तो ये स्थायी तौर पर होता है. लाइसेंस रिवोक किए जाने के बाद कंपनियों का काम बंद करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है.”

हालांकि, इस मसले पर अडानी के प्रवक्ता का कहना है,

“हम अपने इंडिपेंडेंट शेयरहोल्डर्स से जुड़े मसलों पर कोई कॉमेंट नहीं कर सकते.”

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में EIFM का कोई ज़िक्र नहीं था. हालांकि, इसमें EM रिसरजेंट फंड और इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड की बात की गई थी. रिसर्जेंट फंड फरवरी 2022 में ही बंद हो गई थी. हालांकि, फोकस फंड अब भी चालू है.

OCCRP की रिपोर्ट में क्या पता चला?

OCCRP ने अगस्त 2023 में अडानी से जुड़ी एक रिपोर्ट पब्लिश की थी. इस रिपोर्ट से पता चला था कि इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स और EM रिसर्जेंट फंड ने अडानी समूह में पैसे लगाए थे. इन दोनों फंड्स में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स स्थित दो शेल कंपनियों के पैसे थे. इन कंपनियों के नाम भी जान लीजिए - गल्फ एशिया ट्रेड और इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और लिंगो इन्वेस्टमेंट लिमिटेड. गल्फ को UAE के नासिर अली शबान चलाते हैं. लिंगो में ताइवान के चांग चुंग लिंग का पैसा है. दोनों व्यक्ति का संबंध बरमुडा की एक निवेश कंपनी Global Opportunities Fund से है.

Global Opportunities Fund ने EIFM के फोकस और रिसर्जेंट, दोनों फंड्स में निवेश कर रखा है. और यही पैसा अडानी की कंपनी के शेयर्स खरीदने में इस्तेमाल किया जाता रहा है. रिपोर्ट में बताया गया था कि नासिर अली शबान और चांग चुंग लिंग का संबंध गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी से है. तीनों साथ काम करते हैं. आरोपों का सार एक पंक्ति में कहें, तो अडानी ग्रुप के शेयर्स में जिन्हें "आम निवेशक" बताया गया, वो असल में अडानी के "इनसाइडर" ही थे. माने उन्होंने अपना ही पैसा किसी और के नाम से लगवाया.

अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग और OCCRP, दोनों ने एक ही आरोप लगाए हैं- अपने शेयर के दाम को अपने ही लोगों से कंट्रोल करवाना, दाम बढ़वाना और इससे उनकी कंपनियों की वैल्यू को बढ़ाना.

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वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: अडानी मामले में अब SEBI की भूमिका पर भी उठे सवाल

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