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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को मिली दिल्ली के LG जैसी शक्तियां, उमर अब्दुल्ला बोले-'... भीख मांगनी पड़ेगी'

Jammu-Kasmir Lieutenant Governor (LG) पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन करके उपराज्यपाल ज्यादा ताकत दी गई है. सरकार का ये फैसला विधानसभा चुनाव को लेकर अहम माना जा रहा है.

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13 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 13 जुलाई 2024, 03:51 PM IST)
J&K Lieutenant Governor Manoj Sinka (PHOTO-AAJTAK)
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा. (आजतक)
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केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) की प्रशासनिक शक्तियां बढ़ा दी हैं. इस साल जम्मू-कश्मीर में संभावित चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन करके उपराज्यपाल की शक्ति में बढ़ोतरी की है. ऐसे में जम्मू कश्मीर के LG को अब दिल्ली के उपराज्यपाल की तरह की प्रशासनिक शक्तियां दी जाएंगी.

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 में संशोधन किया है. इसके नए नियमों को अधिसूचित किया गया है. इसमें उपराज्यपाल को अधिक शक्ति प्रदान करने वाले नियम जोड़े गए हैं. ऐसे में पुलिस से लेकर सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित मामलों में LG को ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे और उनके काम करने का दायरा भी बढ़ेगा. सरकार बिना उपराज्यपाल की अनुमति के ट्रांसफर पोस्टिंग नहीं कर सकेगी.

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हालांकि जब से जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन हुआ है तब से वहां चुनाव नहीं हुए हैं. नए नियम के मुताबिक जब भी चुनाव होंगे और सरकार का गठन होगा तो चुनी हुई सरकार से ज्यादा शक्तियां LG के पास रहेंगी. ये शक्तियां ठीक वैसी ही हैं जैसे दिल्ली के LG के पास हैं. केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलावों के बाद राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में LG को अधिकार मिल जाएंगे.

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 में संशोधन के बाद जोड़े गए ये नियम:

42ए- कोई भी प्रस्ताव जिसके लिए अधिनियम के तहत ‘पुलिस’, ‘सार्वजनिक व्यवस्था’, ‘अखिल भारतीय सेवा’ और ‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ (ACB) के संबंध में वित्त विभाग की पूर्व सहमति जरूरी है तब तक स्वीकृत या अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि इसे मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष नहीं रखा जाता है.

42बी- अभियोजन स्वीकृति देने या अस्वीकार करने या अपील दायर करने के संबंध में कोई भी प्रस्ताव विधि विभाग द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष रखा जाएगा.

उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया

केंद्र के इस फैसले पर जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, 

‘एक और संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव नजदीक हैं. यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण, अविभाजित राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए समय सीमा निर्धारित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता इन चुनावों के लिए एक शर्त है. जम्मू-कश्मीर के लोग शक्तिहीन, रबर स्टैम्प सीएम से बेहतर के हकदार हैं, जिन्हें अपने चपरासी की नियुक्ति के लिए एलजी से भीख मांगनी पड़ेगी.’

मनोज सिन्हा अगस्त 2020 से जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हैं. 5 अगस्त 2019 को, जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत दिए गए विशेष दर्जे को खत्म कर दिया गया था. पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था. जिसमें लद्दाख में विधानसभा नहीं है. जून 2018 से जम्मू और कश्मीर केंद्र सरकार के शासन के अधीन है. सरकार ने कहा है कि विधानसभा चुनाव होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा.  सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर 2024 से पहले जम्मू और कश्मीर विधानसभा के लिए चुनाव कराने का आदेश दिया है.
 

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