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भगोड़े मेहुल चोकसी पर और कसेगा शिकंजा, सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के इस मामले में भी जांच का ऑर्डर दे दिया

गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के प्रमोटर मेहुल चोकसी और उनकी पत्नी प्रीती चोकसी के खिलाफ ये मामला अहमदाबाद में दर्ज हुआ था. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलट दिया. करोड़ों की चीटिंग का ये मामला क्या है? HC ने इस पर क्या आदेश दिया था?

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7 दिसंबर 2023 (अपडेटेड: 7 दिसंबर 2023, 09:44 AM IST)
Mehul Choksi wife preeti supreme court restores 2017 cheating case Ahmedabad
मेहुल चोकसी पर एक और मामला दर्ज | फाइल फोटो: इंडिया टुडे
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सुप्रीम कोर्ट ने मेहुल चोकसी को लेकर गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले को रद्द कर दिया है. चोकसी और उनकी पत्नी प्रीति के खिलाफ ये FIR 2015 में दर्ज की गई थी जिसे 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था. आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे आरोपों से जुड़ा ये मामला दिग्विजय सिंह जाडेजा नाम के व्यवसायी ने अहमदाबाद में दर्ज करवाया था.

दिग्विजय सिंह जाडेजा ने आरोप लगाया गया था कि मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि ज्वैलरी रिटेल (GJRL) ने उन्हें 30 करोड़ रुपए की सोने की ईंटें नहीं दीं. जबकि इनका पूरा भुगतान कंपनी को कर दिया गया था. जाडेजा के मुताबिक चोकसी और उनकी पत्नी ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन और उनका दुरुपयोग किया. GJRL गीतांजलि जेम्स लिमिटेड की सहायक कंपनी है. गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के प्रमोटर मेहुल चोकसी हैं.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में जब ये मामला गुजरात हाईकोर्ट के पास पहुंचा तो कोर्ट ने एफआईआर को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि दिग्विजय जाडेजा की शिकायत सिविल समझौते का उल्लंघन थी, जो दोनों पक्षों के बीच हुआ था. कोर्ट का मानना था कि ऐसे में इस मामले में एक क्रिमिनल केस नहीं बनाया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट में अब क्या हुआ?

अब ये मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट. शीर्ष कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने 29 नवंबर को इस पर आदेश दिया और हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा,

"कोई गलती सिविल गलती हो सकती है… दिए गए मामले में सिविल गलती हो सकती है और समान रूप से इसमें एक क्रिमिनल केस भी बन सकता है."

इसपर मेहुल चोकसी के वकील ने दलील दी कि जो समझौता हुआ था वो गीतांजलि जेम्स लिमिटेड की सहायक कंपनी GJRL पर बाध्यकारी नहीं था. दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि समझौता वैध और बाध्यकारी है. इस पर कोर्ट ने कहा कि वो अभी इन पहलुओं की विस्तार से बात नहीं करने जा रहा, क्योंकि पहले तथ्यों का पता लगाना जरूरी है. कोर्ट ने आगे कहा कि ये सवाल विवादित है, लेकिन तथ्यात्मक है और इसलिए मामले की जांच जारी रखना जरूरी है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया. और भगोड़े मेहुल चोकसी और उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला बहाल कर दिया.

ये भी पढ़ें:- मेहुल चौकसी का रेड कॉर्नर नोटिस हटवा बचाने के पीछे कौन?

बता दें कि जनवरी 2018 की शुरुआत में पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13 हजार करोड़ रुपये का घोटाला होने का खुलासा हुआ था. इस मामले में 30 जनवरी, 2018 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी. लेकिन उससे पहले ही इस घोटाले के दो मुख्य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी भारत छोड़कर भाग गए थे. तब से ही दोनों आरोपियों के प्रत्यर्पण की कोशिश की जा रही है. नीरव मोदी इस समय ब्रिटेन में है. वहीं मेहुल चोकसी मई 2018 से एंटीगुआ में रह रहा है और उसके पास वहां की नागरिकता भी है.

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