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जिस मालेगांव आतंकी हमले में प्रज्ञा ठाकुर आरोपी, उसका गवाह कोर्ट में पलट गया!

धमाके में सात लोगों की मौत हुई थी और 80 लोग घायल हुए थे.

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30 जून 2022 (अपडेटेड: 30 जून 2022, 04:26 PM IST)
Malegaon blast case 2008 and Pragya Thakur
मालेगांव धमाका और प्रज्ञा ठाकुर. (फोटो: आजतक/पीटीआई)
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साल 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में 21वां गवाह पलट गया है. गवाह ने कोर्ट में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को पहचानने से इनकार कर दिया. क्या है मामला? आइए जानते हैं.

तारीख 29 सितंबर 2008. महाराष्ट्र के मालेगांव में भीक्कू चौक के पास एक जोरदार धमाका हुआ. इसके महज कुछ मिनट बाद ही गुजरात के मोडासा में भी धमाका हुआ. इसके तीन दिन पहले नई दिल्ली में भी इसी तरह का धमाका हुआ था. ये सभी घटनाएं एक जैसी थीं, जिसने देश के तमाम शहरों को भयभीत कर दिया कि किसी और जगह भी बम प्लांट किए गए होंगे.

मालेगांव के धमाके में सात लोगों की मौत हुई और मोडासा में एक 15 साल के बच्चे की जान चली गई थी. कुल 80 लोग घायल हुए थे. हमेशा की तरह लोगों और जांच एजेंसियों को लगा कि ये हमेशा की तरह होने वाली एक आतंकवादी घटना है, जिसकी जिम्मेदारी कोई इस्लामी चरमपंथी संगठन लेगा या जांच एजेंसियों के तार वहीं जुड़ेंगे. 

लेकिन इस बार कहानी कुछ और ही निकली. मुंबई एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS) को मालेगांव मामले की जांच में लगाया गया. इस टीम की अगुवाई ATS प्रमुख हेमंत करकरे कर रहे थे, जिनकी मुंबई के 26/11 के हमले में आतंकियों ने हत्या कर दी थी.

मोटरसाइकिल में बम लगाकर धमाका किया गया था. जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि इसके पीछे हिंदू कट्टरपंथियों का हाथ है. 24 अक्टूबर 2008 को पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर शामिल थीं. प्रज्ञा ठाकुर इस समय भोपाल से बीजेपी की सांसद हैं.

जब आगे और जांच हुई तो कड़ी से कड़ी खुलती गई. ATS ने अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों की भी भूमिका का खुलासा किया, जिसमें राष्ट्रीय जागरण मंच, शारदा सर्वज्ञ पीठ, हिंदू राष्ट्र सेना और अभिनव भारत का नाम शामिल था.

ATS ने 4 नवंबर 2008 को लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को गिरफ्तार किया, जो उस समय सेना में काम कर रहे थे. लेकिन तब तक ये मामला राजनीतिक हो गया था. बीजेपी और एटीएस ने आरोप लगाया कि ATS कांग्रेस के इशारे पर राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रही है.

अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल इस मामले की जांच केंद्र की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. इस केस में एक के बाद एक गवाह लगातार पलट रहे हैं. इंडिया टुडे की पत्रकार विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2008 के मालेगांव केस में 21वां गवाह पलट गया है. ये गवाह पुणे का बिजनेसमैन है. इन्होंने कथित तौर पर आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को कुछ हथियार बेचा था. अब गवाह ने प्रसाद पुरोहित को कोर्ट में पहचानने से इनकार कर दिया है.

इस मामले में अभियोजन पक्ष अब तक 252 गवाहों से पूछताछ कर चुका है. इसमें से गवाह संख्या 21 मुकर गया है. गवाह ने स्वीकार किया कि जब वह पहले हथियार और गोला-बारूद बेचता था, तब पुरोहित उसकी दुकान पर आए थे, लेकिन 'लंबा समय बीत जाने के कारण' उन्हें अब कुछ याद नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में मुकर गए ज्यादातर गवाह लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित से ही जुड़े हुए हैं.

हाईकोर्ट ने जवाब मांगा

इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने NIA को निर्देश दिया है कि वे हलफनामा दायर कर बताएं कि साल 2008 के मालेगांव धमाका केस में अब तक क्या किया गया है, केस का स्टेटस क्या है.

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और वीजी बिष्ट की पीठ NIA से पूछा है कि इस केस का ट्रायल कहां पहुंचा है, कितने गवाहों से पूछताछ की गई है और अभी कितने लोगों की पूछताछ की जानी है. NIA को दो हफ्ते के भीतर हाईकोर्ट को ये जानकारी देनी है.

कोर्ट साल 2018 में समीर कुलकर्णी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है. कुलकर्णी इस मामले में आरोपी हैं. उन्होंने कहा है कि इस घटना के 13 सालों बाद भी अभी तक कई गवाहों का परीक्षण नहीं किया गया है और बेवजह इसमें देरी की जा रही है.

बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ इस केस में मामला चल रहा है. हालांकि साल 2016 में NIA की मांग पर NIA कोर्ट ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका एक्ट) के तहत प्रज्ञा के खिलाफ कठोर धाराओं को हटा दिया था. हालांकि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की कई धाराओं के तहत प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ आरोप जारी हैं.

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