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बकरीद भूल गए, बस लोगों को बचाने दौड़ पड़े... कंचनजंगा एक्सप्रेस के यात्रियों की इस गांव ने कैसे बचाई जान?

Kanchanjungha Rail Accident, न्यू जलपाईगुड़ी के 'निर्मल जोत' गांव के पास हुआ था. बकरीद मनाने की तैयारी में थे यहां के लोग, लेकिन धमाके की आवाज सुनते ही सब दौड़ पड़े, यात्रियों की जान बचाने. क्या हुआ? कैसे हुआ? गांव वालों ने खुद सब बताया है.

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18 जून 2024 (अपडेटेड: 18 जून 2024, 09:34 AM IST)
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बकरीद मनाने की तैयारी में थे यहां के लोग, लेकिन धमाके की आवाज सुनते ही सब दौड़ पड़े | फोटो: इंडिया टुडे
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किसी ने कहा है कि इंसानियत से बड़ा कुछ भी नहीं. कल यानी 17 जून को बकरीद का त्योहार था. पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी का एक गांव है 'निर्मल जोत'. मुस्लिमों की अच्छी आबादी है यहां. बकरीद का त्योहार था तो गांव वाले सुबह से ही त्योहार की तैयारी में लगे थे. अचानक गांव वालों को एक जोरदार आवाज सुनाई दी. वो आवाज की दिशा में भागे तो देखा कि एक मालगाड़ी की कंचनजंगा एक्सप्रेस से जबरदस्त टक्कर हुई है. मालगाड़ी पीछे से एक्सप्रेस ट्रेन में घुस गई थी. गांव वाले त्योहार को भूल गए, पुलिस और राहत दल का इंतजार नहीं किया, बस लग गए, मदद में, लोगों को बचाने में, अस्पताल पहुंचाने में.

'निर्मल जोत' के रहने वाले 32 साल के मोहम्मद मोमिरुल गांव के लोगों के साथ सुबह की नमाज अदा करके लौटे ही थे कि ट्रेनों के टकराने की आवाज उन्हें सुनाई दी. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं स्वीटी कुमारी को मोमिरुल बताते हैं,

'मैं नमाज पढ़कर लौटा ही था, घर में सभी लोग जश्न मनाने के मूड में थे, तभी अचानक हमें तेज आवाज सुनाई दी. मैं अपने घर के पास रेलवे ट्रैक की ओर भागा और पटरी से उतरे ट्रेन के डिब्बे देखे. मैंने मालगाड़ी के लोको पायलट को यात्री ट्रेन के पहिये के नीचे पड़े देखा. मैं उनके पास पहुंचा, उनकी मौत हो चुकी थी.'

मोमिरुल ने आगे बताया कि उनके गांव के 150 से ज्यादा लोगों ने तुरंत बचाव और राहत कार्य शुरू किया. वो कहते हैं कि सभी ईद का जश्न भूलकर यात्रियों को बचाने और घायलों की देखभाल करने दौड़ पड़े. एम्बुलेंस तब नहीं आई थी, तो गांव में जिसके पास जो वाहन था, वो उससे घायल यात्रियों को लेकर अस्पताल की तरफ भागा. जो यात्री ठीक थे उन्हें गांव वाले अपने घर में आराम करने के लिए लेकर गए.

निर्मल जोत गांव के ही मोहम्मद नजरूल ने कहा कि जब वो दुर्घटनास्थल पर पहुंचे तो छह लोगों के शव उन्हें मिले और उन्होंने लगभग 35 लोगों को बचाया.

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गांव की ही तस्लीमा खातून ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वो त्योहार मनाने के लिए तैयार हो रही थीं, तभी ट्रेन हादसे की खबर आई. तस्लीमा आगे कहती हैं,

'मैं तुरंत एक्सीडेंट वाली जगह पर गई, एक बुजुर्ग घायल महिला मिलीं. वो खड़ी नहीं हो पा रही थीं. मैंने उन्हें पानी दिया, उन्हें सांत्वना दी. बाद में उनके रिश्तेदार सिलीगुड़ी से आए और उन्हें वापस ले गए.'

आपको बताते चलें कि सोमवार 17 जून की सुबह कंचनजंगा एक्सप्रेस सियालदह जा रही थी. तभी सिलीगुड़ी में एक मालगाड़ी उससे टकरा गई. हादसा न्यू जलपाईगुड़ी के पास हुआ. इस टक्कर में कंचनजंगा एक्सप्रेस की कई बोगियां पटरी से उतर गईं. इस हादसे में 9 लोगों की मौत हुई है और 40 लोग घायल हुए हैं.

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