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जंक्शन, सेंट्रल और टर्मिनल में क्या फर्क होता है? हाल्ट स्टेशनों पर कब रुकती हैं ट्रेन?

स्टेशनों के नाम के आगे 'रोड' क्यों लगा होता है? ट्रेन का रोड से क्या कनेक्शन?

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Difference between junction, central and terminus
सेंट्रल स्टेशन किसी शहर का सबसे पुराना स्टेशन हो सकता है. फाइल फोटो-आजतक
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श्वेता सिंह
21 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 21 अप्रैल 2023, 05:40 PM IST)
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पटना जंक्शन पर कुछ समय पहले एक आपत्तिजनक वीडियो चलने (Patna Station Porn) का मामला सामने आया था. उसके बाद अब भागलपुर जंक्शन पर एक भद्दा मैसेज फ्लैश हुआ. ये खबर बताते हुए न्यूज़रूम में मैं बार-बार भागलपुर टर्मिनल कह रही थी और मेरे कलीग मुझे सही करते हुए बता रहे थे कि वो टर्मिनल नहीं जंक्शन है. मैंने सोचा, भला क्या ही फर्क है. लेकिन है. काफी फर्क है. किसी स्टेशन के पीछे जंक्शन, टर्मिनल, सेंट्रल या कैंट ऐसे ही नहीं लिखा होता है. उसके पीछे वजह होती है. सबकुछ विस्तार से जानते हैं.

टर्मिनल

पहले-पहल तो उसी से शुरू करते हैं, जहां से ये सारी बात शुरू हुई थी. यानी टर्मिनस या टर्मिनल. जैसा कि अंग्रेजी शब्द टर्मिनेट का मतलब होता है, खत्म. ऐसे ही टर्मिनल उन स्टेशनों को कहा जाता है, जहां से ट्रेन आगे नहीं जाती है. आप कहेंगे कि ऐसे तो हर स्टेशन पर किसी न किसी ट्रेन की यात्रा खत्म ही होती है. ऐसे में टर्मिनल बाकियों से अलग कैसे होते हैं? दरअसल, टर्मिनल वो स्टेशन होते हैं जहां से ट्रेन एक ही दिशा में यात्रा करती हैं. ट्रेन जिस दिशा से स्टेशन में एंट्री लेती है, एग्जिट भी उसी दिशा से करती है. क्योंकि ट्रैक उसी स्टेशन पर खत्म हो जाता है. आनंद विहार टर्मिनस, राजेंद्र नगर टर्मिनस, बांद्रा टर्मिनस, हावड़ा टर्मिनस, भावनगर टर्मिनस, कोचिन हार्बर टर्मिनस जैसे स्टेशन टर्मिनल या टर्मिनस वाले स्टेशनों के कुछ उदाहरण हैं.

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छत्रपति शिवाजी टर्मिनस: फोटो- आजतक

सेंट्रल

अगला टाइप है सेंट्रल वाला. किसी शहर में एक से ज्यादा स्टेशन हो सकते हैं. ऐसे में सेंट्रल स्टेशन वहां का सबसे बिजी और अहम स्टेशन माना जाता है. यहां सबसे ज्यादा ट्रेनों का आगमन और प्रस्थान होता है. ऐसा भी हो सकता है कि सेंट्रल स्टेशन किसी भी शहर का सबसे पुराना स्टेशन हो.

देश के पांच सेंट्रल स्टेशन हैं-

- मुंबई सेंट्रल
- चेन्नई सेंट्रल
- तिरुवनंतपुरम सेंट्रल
- मैंगलोर सेंट्रल 
- कानपुर सेंट्रल

जंक्शन

जंक्शन यानी मेल यानी संगम. नाम की तरह ही जंक्शन नाम वाले स्टेशन वो होते हैं, जहां से कम से कम 3 रुट्स की ट्रेनें आती-जाती हों. इसका सिंगल लाइन या डबल लाइन से कुछ लेना देना नहीं है. आमतौर पर जंक्शन वो रेलवे स्टेशन होते हैं, जो उस शहर के सबसे बड़े स्टेशन होते हैं और वहां मल्टीपल प्लेटफॉर्म होते हैं.

 मथुरा रेलवे जंक्शन देश का सबसे बड़ा जंक्शन है. इस स्टेशन से सबसे ज्यादा, 7 रुट्स शुरू होते हैं. इसके अलावा कल्याण जंक्शन, दिल्ली जंक्शन, बरेली जंक्शन और विजयवाड़ा जंक्शन देश के कुछ फेमस जंक्शन रेलवे स्टेशन हैं.

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मथुरा जंक्शन. फोटो-आजतक
कैंट

कैंट शब्द 'कैंटोनमेंट' से आया है. ये वो जगहें हैं, जहां सेना के लोग रहते हैं. आमतौर पर ऐसी जगहों पर जो स्टेशन होते हैं, उनके नाम के आखिर में कैंट होता है. ये स्टेशन मुख्य रूप से रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए होता है. हालांकि, आम लोग भी इस स्टेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन. ये दिल्ली के छावनी यानी कैंट एरिया में स्थित है. इसके अलावा आगरा कैंट, वाराणसी कैंट और बेंगलुरु कैंट भी ऐसे ही स्टेशन हैं.

रोड

आपने कुछ स्टेशनों के नाम के आगे 'रोड' लिखा देखा होगा. सोचा भी होगा कि ट्रेन और स्टेशन के बीच 'रोड' शब्द की क्या जरुरत है? दरअसल, रोड वो स्टेशन होते हैं जो एग्जैक्टली उसी शहर में ना होकर वहां जाने वाली नजदीकी रोड पर होते हैं. जैसे नासिक रोड स्टेशन, बिलासपुर रोड स्टेशन, ज्ञानपुर रोड स्टेशन और डलहौजी रोड स्टेशन.

हाल्ट

इन सब के अलावा कुछ हाल्ट स्टेशन भी होते हैं. इन्हें स्टेशन का सबसे छोटा प्रकार समझा जाए. 

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महेश नगर हाल्ट. फोटो-आजतक

वहीं, कुछ ऐसे स्टेशन भी हैं जिनके नाम के आगे इनमें से कोई टाइटल नहीं लगा हुआ है. लेकिन वो भी स्टेशन होते हैं. ट्रेनें वहां रुकती हैं, सवारियों को चढ़ाती हैं और आगे बढ़ती हैं. 

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (फोटो: आजतक)

जाते-जाते एक फन फैक्ट जानते जाइए. दिल्ली में 2-4 या 5-10 नहीं, बल्कि टोटल 46 रेलवे स्टेशन हैं. एरिया के हिसाब से ये संख्या काफी रोचक है. हालांकि, इनमें छोटे-बड़े हर तरह के स्टेशन शामिल हैं. 

वीडियो: ट्रेन के पीछे X क्यों बनाया जाता है, जानकर दिमाग झन्ना जाएगा

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