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दीपा, इन लोगों के लिए मेडल कीमती है, तुम्हारी जान नहीं

एक लड़की ने ट्वीट किया कि खिलाड़ियों को जान जोखिम में क्यों डालनी पड़ती है और लोग उसे गालियां देने लगे. सुषमा स्वराज को दखल देना पड़ा.

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17 अगस्त 2016 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2016, 05:01 AM IST)
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26 साल की सौदामिनी ने दीपा कर्मकार को लेकर ट्विटर पर अपने विचार लिखे. और ट्विटर जनता ऐसी भड़की कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को दखल देना पड़ा. पहले देखिए सौदामिनी ने क्या लिखा. saudamini tweet

"दीपा ने जो किया वो अतुलनीय है. लेकिन अमीर देशों से आए जिमनास्ट के लिए ओलंपिक में पॉइंट जुटाना इतना मुश्किल नहीं होता. उन्हें जानलेवा प्रोदुनोवा वॉल्ट नहीं करना पड़ता. वो आसान वॉल्ट करते हैं. क्योंकि उनके देश में बेहतर सुविधाएं हैं, बेहतर ट्रेनिंग है, सब कुछ बेहतर है. आज रात वो मेडल जीतने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाली है. किसी भी जान की कीमत इतनी कम नहीं होती कि उसे किसी कमबख्त देश के लिए मेडल लाने में खर्च कर दिया जाए."

('कमबख्त' damned का ढीला अनुवाद है.) बस इतना कहने की देर थी, सौदामिनी पर गालियों की बौछार होने लगी. sa1 sa2 sa3 जब ये मैसेज बढ़ते गए, तो सौदामिनी ने राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे को ट्वीट कर मदद मांगी. sa rajnath singh सुषमा स्वराज ने फ़ौरन एक्शन लिया. और उसी दिन सौदामिनी के घर पुलिस पहुंच गई. saudamini helped पुलिस के जाने के बाद सौदामिनी ने लिखा, 'पुलिस चली गई है. ऑनलाइन अब्यूज की शिकायत दर्ज हुई है. लेकिन मुझसे पूछा गया कि मैंने 'डैम' का इस्तेमाल क्यों किया. मैंने बताया कि मैंने ये शब्द मैंने इंडिया के लिए नहीं इस्तेमाल किया था. इसलिए उन्होंने जाने दिया. पर इंडिया के लिए कहा भी होता तो क्या मुझे अपने देश में इतनी भी आजादी नहीं है?' ठंडे दिमाग से पढ़िए, सौदामिनी के ट्वीट में कोई बुरी बात नहीं दिखती. वो ट्वीट न दीपा के खिलाफ है, न भारत के. वो बस इतना कह रही थीं कि दीपा की जान किसी भी मेडल से ज्यादा कीमती है. और आप भी इस बात से इत्तेफाक रखते होंगे. अंग्रेजी का शब्द 'डैम्ड' एक बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला शब्द है. इसका मतलब देश को गाली देना नहीं है. पर सोशल मीडिया के खखोरुओं के पास समझ कम है और फुरसत ज्यादा!

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