एकनाथ खडसे की कुर्सी खड़क चुकी है. और उनका 'रामटेक' भी छूटेगा. रामटेक वो जगह हैजहां वो टेका लगाकर बैठते थे. माने उनका ऑफिशियल रेसीडेंस था. मुंबई के मालाबार में8857 स्क्वायर मीटर में फैला है ये बंगला. खडसे के नप जाने के बाद जाने कितनों कीरामटेक के नाम से सूख गई है. काहे कि उस बंगले को सब मनहूस बता रहे हैं. वहां जो हीजाता है उसके साथ कुछ बुरा हो जाता है. वो किसी स्कैम में या किसी धांधली में फंसजाता है. कुर्सी चली जाती है. पॉलिटिक्स की लंका लग जाती है. खडसे के पहले इससमुंदरमुखी बंगले में छगन भुजबल रहते थे. छगन भुजबल एनसीपी के नेता थे. फिलहाल जेलमें पाए जाते हैं. 15 साल इस बंगले में रहे थे. तीसरा महीना चल रहा है, जेल मेंहोने का. उन पर मनी लांड्रिंग के चार्ज लगे हैं. महाराष्ट्र सदन स्कैम में. इसकेपहले वो अब्दुल करीम तेलगी के 'तेलगी स्टाम्प घोटाले' में भी फंसे थे. उनका नाम इसकेस में आया तो एक टीवी न्यूज चैनल ने उन पर सार्कास्टिक सा शो चला दिया. उनके वालेगए और वहां तोड़-फोड़ कर आए. नतीजा ये हुआ कि बवाल हुआ, मीडिया उनके पीछे पड़ गया औरउनको इस्तीफा देना पड़ गया था. उनके पहले इस बंगले में गोपीनाथ मुंडे रहते थे. तब वोउपमुख्यमंत्री हुआ करते थे. अन्ना हजारे ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उनके खिलाफकरप्शन के आरोप लगे और उनकी पॉलिटिक्स और पर्सनल लाइफ पर बड़ा असर पड़ा था. गोपीनाथमुंडे के पहले वहां विलासराव देशमुख रहते थे. रामटेक में रहने के दौरान उनने अपनेपॉलिटिकल करियर के दुर्दिन देखे थे. ये 1995 की बात है. उनने बाद में विधान परिषदके चुनाव से अपनी पॉलिटिक्स जिलाए रखने की कोशिश की लेकिन सक्सेजफूल न हुए बाद मेंउनने 1999 में राजनीति में अच्छे दिन भी देखे लेकिन तब वो रामटेक छोड़ चुके थे. वैसेएक बात कहें. खडसे अपने ऊपर लगे इल्जामों के कारण गए हैं. भुजबल अपने कर्मों से जेलमें हैं. विलासराव देशमुख चुनाव हारे क्योंकि लोगों ने उनको वोट नहीं दिए होंगे.इसमें उस घर का थोड़े कोई फर्क पड़ता है. हमको नहीं लगता कि गोपीनाथ मुंडे से लेकरखडसे तक जो भी इस घर में रहने के दौरान मुसीबतों में आए, इस घर की वजह से आए.मनहूस-वनहूस कुछ नहीं होता. लल्लन को ऐसी बातें बस अफवाह लगती हैं.