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16 साल भूखी रही इरोम शर्मिला के पास नहीं है कोई आइडेंटिटी प्रूफ

10 साल पहले एक टेंपररी आई कार्ड बना था पर उसका कोई अता-पता नहीं.

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24 अगस्त 2016 (अपडेटेड: 24 अगस्त 2016, 09:23 AM IST)
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इरोम शर्मिला, Reuters
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आई कार्ड की इंपॉर्टेंस तब समझ आई, जब एक बार गार्ड ने स्कूल गेट से घर जाने को कह दिया. वो गार्ड नया नहीं था. मुझे अच्छे से जानता-पहचानता था. साइकिल की भीड़ से रोज मेरी साइकिल वही निकालता था. फिर भी वापस जाने को बोल दिया. अपनी आयरन लेडी यानी कि इरोम शर्मिला को भी सब जानते-पहचानते हैं. क्योंकि वो 16 साल से अनशन पर थीं. एक लड़ाई लड़ रही थीं. 9 अगस्त को भूख हड़ताल का द एंड किया. ताकि पॉलिटिक्स में आएं और AFSPA को मणिपुर से उखाड़ फेंके. पर चुनाव लड़ने के लिए तरह-तरह के ढेरों फॉर्म भरने पड़ते हैं. देश का होने के बाद भी अपनी पहचान देनी होती है. फंड के लिए बैंक अकाउंट और PAN कार्ड की जरूरत होती है. पर इरोम के पास इनमें से कुछ भी नहीं है. उनके पास देश की नागरिकता को प्रूफ करने वाला भी कोई सर्टिफिकेट नहीं है. लेकिन उनके फैन लाखों-करोड़ों में हैं. पर चुनाव में पार्ट लेने के लिए ये काफी तो नहीं है. चुनाव में हिस्सा लेना हो न हो, पर आई कार्ड तो जरूरी है न. लेकिन इरोम के पास कुछ नहीं है. हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक मंगलवार को इरोम की पेशी इम्फाल के चीफ मजिस्ट्रेट के सामने हुई. वजह वही पुरानी. अपने भूख हड़ताल के टाइम सुसाइड की कोशिश करने के लिए. मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद इरोम ने मीडिया से बातचीत की. इसी दौरान उन्होंने अपने आई कार्ड और बाकी जरूरी डॉक्यूमेंट के लिए अप्लाई करने की बात कही है. साथ ही वो दिल्ली में AFSPA के खिलाफ कैंपेन में पार्ट लेने की प्लानिंग कर रही हैं. दिल्ली में कैंपेन कर इरोम का इरादा चैन की सांस लेने का नहीं है. वो उसके बाद मणिपुर के उखरुल जाकर वहां भी एंटी AFSPA कैंपेन करने का मन बना रही हैं. शर्मिला के भाई इरोम सिंहजीत ने शर्मिला के पास कोई आईडी प्रूफ न होने की बात को कंफर्म किया है. उनका कहना है, 'अपनी नागरिकता साबित करने के लिए उसके पास कोई प्रूफ नहीं है. लेकिन वो दिल से इंडियन है. अपनी लड़ाई के टाइम भी उसका रवैया अलगाववादी नहीं था.' सिंहजीत ने अपनी बहन का सपोर्ट किया है. और कहा कि वो भी AFSPA के खिलाफ हैं. आयरन लेडी को उनकी पहचान के लिए कागजात जुटाने में उनकी दोस्त भी लगी पड़ी हैं. नंदिनी थोकचोम 30 साल पुरानी दोस्त हैं. वो कहती हैं, 'इरोम के सारे डॉक्यूमेंट्स बनवाने के लिए हम बुधवार को अप्लाई करेंगे. 10 साल पहले जंतर मंतर पर कैंपेन के लिए इरोम का एक टेंपररी आई कार्ड बना था. वो भी हड़बड़ी में.' फिलहाल शर्मिला की तीन दोस्त उनके साथ रह रही हैं. उनके खाने से लेकर बाकी जरूरतों का ख्याल रखती हैं. उनमें से एक का कहना है, 'इरोम को बैंक अकाउंट और पैन कार्ड की जरूरत पड़ेगी. और ढेर सारे फंड्स की भी. बिना वोटर आईडी कार्ड के नेता बनना, ये लोगों की सोच से परे है.' एक दोस्त ने तो फेसबुक पर एक पेज बना दिया है ताकी सपोर्ट मिल सके.

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