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यूक्रेन के 4 शहर रूस में मिलाने के खिलाफ UN में आया प्रस्ताव, भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई

वोटिंग से दूरी बनाते हुए भारत ने यूक्रेन में जारी हिंसा को तुरंत बंद करने की भी वकालत की है.

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India on Ukraine
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो- रॉयटर्स)
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साकेत आनंद
1 अक्तूबर 2022 (अपडेटेड: 1 अक्तूबर 2022, 11:49 AM IST)
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने रूस के खिलाफ वोटिंग से एक बार फिर खुद को दूर कर लिया. ये वोटिंग यूक्रेन के चार नए इलाकों पर रूस के कब्जे और वहां "अवैध जनमत संग्रह" कराने के खिलाफ पेश निंदा प्रस्ताव पर हुई थी. हालांकि सुरक्षा परिषद (UNSC) में पेश प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया क्योंकि रूस ने वीटो का इस्तेमाल कर दिया. सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य देशों में 10 देशों ने रूस के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर वोटिंग की, वहीं भारत, चीन, ब्राजील और गेबन वोटिंग से दूर रहे. यूक्रेन मामले पर भारत पहले भी UN में वोटिंग से दूरी बना चुका है.

रूस ने चार इलाकों पर किया कब्जा

रूस के कब्जे के खिलाफ मौजूदा प्रस्ताव 30 सितंबर को अमेरिका और अल्बानिया ने पेश किया था. प्रस्ताव में "यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर कथित अवैध जनमत संग्रह करवाने" की निंदा की गई है. प्रस्ताव रूस के यूक्रेन के लुहांस्क, दोनेत्स्क, खेरसोन और जेपोरिज्जिया इलाके पर कब्जे को अवैध बताया गया. कहा गया कि ये इलाके अस्थायी रूप से रूस के नियंत्रण में हैं इसलिए रूस की किसी कार्रवाई को मान्यता नहीं दी जा सकती है.

भारत ने UN में क्या कहा?

वोटिंग से दूरी बनाते हुए भारत ने यूक्रेन में जारी हिंसा को तुरंत बंद करने की भी वकालत की है. भारत ने कहा कि विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत की ओर लौटने की जरूरत है. संयुक्त राष्ट्र में भारत की राजदूत रुचिका कम्बोज ने कहा कि यूक्रेन में हालिया घटनाक्रमों से भारत काफी चिंतित है. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने हमेशा इसकी वकालत की है कि लोगों की जिंदगी की कीमत पर इस संकट का कोई समाधान नहीं निकल सकता है.

रुचिका कम्बोज ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा, 

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इससे पहले 24 अगस्त 2022 को भारत ने यूक्रेन के मसले पर पहली बार रूस के खिलाफ वोट किया था. हालांकि इससे पहले सुरक्षा परिषद में हर मौके पर उसने रूस के खिलाफ वोटिंग से दूरी बनाई थी.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 30 सितंबर को यूक्रेन के चार इलाकों को रूस में शामिल कराने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे. रूस का कहना है कि यह 'जनमत संग्रह' के जरिये करवाया गया है. पुतिन के मुताबिक लुहांस्क, दोनेत्स्क, खेरसोन और जेपोरिज्जिया के लोगों ने इस पर अपनी पसंद जाहिर की है. हालांकि अमेरिका सहित पश्चिमी देश रूस के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं.

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