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रेलवे के कर्मचारियों ने ही रची थी सूरत में ट्रैक के साथ गड़बड़ी की झूठी साजिश, इनाम पाने का था लालच

Gujarat के Surat में रेलवे ट्रैक के साथ हुई कथित गड़बड़ी का खुलासा हो गया है. Railway के तीन कर्मचारियों ने प्रशंसा और पुरस्कार पाने को लेकर इन लोगों ने ट्रैक के साथ गड़बड़ी की झूठी साजिश रची थी. पुलिस ने इस मामले में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

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24 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 24 सितंबर 2024, 09:25 AM IST)
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सूरत में रेलवे ट्रैक पर हुई कथित गड़बड़ी का खुलासा हो गया है.
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गुजरात (Gujarat) के सूरत जिले में रेलवे ट्रैक पर कथित तोड़फोड़ के मामले का खुलासा हो गया है. जांच में पता चला है कि रेलवे के तीन कर्मचारियों ने तोड़फोड़ की झूठी कहानी रची थी. दुर्घटना टालने के लिए वाहवाही लूटने और पुरस्कार पाने की नीयत से इन लोगों ने ट्रैक के कुछ हिस्से को हटा दिया. वीडियो और तस्वीरें ली. और फिर फिश प्लेट और हटाए गए दूसरे हिस्सों को वापस से लगा दिया. यह घटना 20 सितंबर की है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में से दो सुभाष पोद्दारा और मनीष मिस्त्री ट्रैकमैन हैं. और तीसरा आरोपी शुभम जायसवाल एक कांट्रैक्ट वर्कर है. सुभाष पोद्दार नौ साल से रेलवे में काम कर रहा है. और बिहार के भागलपुर का रहने वाला है. वहीं मनीष मिस्त्री पटना के अंकुरी गांव का रहने वाला है. जबकि शुभम जायसवाल उत्तर प्रदेश के चंदौली का रहने वाला है.

पुलिस ने 21 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) (सामान्य इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा आपराधिक कृत्य), 61(2)(a) (आपराधिक साजिश), 125 (उतावलेपन या लापरवाही से किए गए कार्य जो मानव जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालते हैं) के तहत पटरियों को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया था. इसके अलावा आरोपियों पर रेलवे अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

20 सितंबर को इन आरोपियों ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब सवा 5 बजे उन्होंने किम और कोसांबा गांव के बीच तीन लोगों को पटरियों से भागते हुए देखा. जिसके बाद उन्होंने पटरियों की जांच की. जिसमें उन्हें 71 इलास्टिक 'रेल क्लिप की' और 'दो फिश प्लेट' हटाई हुई मिली. जिसे उन्होंने 25 मिनट में वापस लगा दिया.

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सूरत के एसपी हितेश जॉयसर ने बताया, 

पुलिस को संदेह हुआ कि इतने कम समय में ट्रैक के साथ हुई गड़बड़ी को ठीक कैसे किया जा सकता है. उन्होंने आगे बताया कि आरोपियों के फोन की जांच करते समय हमें उनके रीसायकल बिन से हटाए गए हिस्सों की कुछ तस्वीरें और वीडियो मिले. जो 2 से 5 बजे के बीच शूट किए गए थे. वे इसका स्पष्टीकरण नहीं दे सके. जिससे उनकी संलिप्तता के बारे में हमारा संदेह और मजबूत हो गया.

इस मामले में आगे की जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को सौंप दिया गया है. पुलिस 24 सितंबर को आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश करेगी.

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