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पैगंबर पर विवादित टिप्पणी मामले में बोले विदेश मंत्री, 'दूसरे देश जानते हैं BJP ऐसा नहीं सोचती'

एस जयशंकर ने कहा कि ना केवल अरब देशों बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों ने भी इस बात को सराहा कि भारत सरकार पैगंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणियों का समर्थन नहीं करती है.

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19 जून 2022 (अपडेटेड: 19 जून 2022, 12:32 PM IST)
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विदेश मंत्री एस जयशंकर (फोटो: पीटीआई)
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पैगंबर मोहम्मद (Prophet Mohammed) पर विवादित टिप्पणियों को लेकर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपना रुख साफ रखा और कहा कि पार्टी किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों का समर्थन नहीं करती. उन्होंने ये भी कहा कि ना केवल अरब देशों बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों ने भी इस बात को सराहा कि भारत सरकार पैगंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणियों का समर्थन नहीं करती है.

विदेश मंत्री का बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले बीजेपी से सस्पेंड हो चुकीं प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की पैगंबर पर विवादित टिप्पणियों का पुरजोर विरोध हुआ था. एक तरफ जहां देश के अंदर इसका विरोध हुआ, वहीं दूसरी तरफ कई इस्लामिक देशों ने आधिकारिक तौर पर नूपुर के बयान पर आपत्ति जताई. इन देशों में भारत के साथ अच्छे संबंध रखने वाले कई अरब देश भी शामिल रहे. साथ ही साथ दक्षिण पूर्व एशिया के भी कई देशों ने आपत्ति जताई. नूपुर शर्मा के अलावा बीजेपी से निकाले जा चुके नवीन जिंदल ने भी पैगंबर पर विवादित सोशल मीडिया पोस्ट किया था.

विदेश मंत्री ने क्या कहा?

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मसले पर विदेश मंत्री ने कहा कि बीजेपी कभी भी ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करती और पार्टी के एक्शन से ये साफ भी हो गया है. उन्होंने आगे कहा, 

"सिर्फ खाड़ी देश ही नहीं बल्कि दक्षिण-पूर्वी एशिया के कुछ देशों ने भी, जिन्होंने आपत्ति जताई थी, उन्होंने इस बात को सराहा कि भारत सरकार का ये रुख नहीं है. उन देशों के हमारे साथ अच्छे संबंध हैं और वे ये जानते हैं कि इस तरह के विचार हमारे नहीं हो सकते."

एस जयशंकर ने कहा कि है पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया है और अब उम्मीद है कि लोग भी इसे समझ पाएंगे. उन्होंने आगे कहा, 

"ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जो उथल पुथल का फायदा उठाना चाहते हैं. बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश करते हैं. अंतरराष्ट्रीय संबंध बहुत ही पेचीदा होते हैं. ये कोई बच्चों का खेल नहीं है. ऐसे बहुत से लोग होंगे जो अपना फायदा ढूंढने की कोशिश करेंगे."

“हमें अपनी बात रखने की जरूरत है और हम इसे कर रहे हैं. यहां तक ​​कि पिछले कुछ दिनों में, आप देख सकते हैं कि लोग समझते हैं कि भारत में सही तस्वीर क्या है.”

और क्या कहा? 

जब विदेश मंत्री से ये पूछा गया कि क्या उन देशों को भी भारत को नसीहत देनी चाहिए, जो खुद लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं करते हैं. इसपर उन्होंने कहा कि अगर कोई उपदेश दे, तो ये उन्हें ज्यादा पसंद नहीं है, लेकिन इस मुद्दे को वो वैसे नहीं देखते हैं. इस मुद्दे के साथ उन्हें लगता है कि लोगों की संवेदनशीलता और समझ प्रभावित हुई है. इसीलिए वो इसे जाहिर कर रहे हैं.

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