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  • Delhi Police held three people for selling fake mineral water refill jars of a leading company

अगर आप भी 70 रुपए में 20 लीटर पानी वाली बोतल खरीदते हैं, तो सावधान हो जाइए

आपके घर में जो वो मिनरल वॉटर कहकर पानी का जार दे जाता है, उसमें बड़ा झोल है.

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22 जून 2018 (अपडेटेड: 21 जून 2018, 05:11 AM IST)
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वो 15-20 लीटर वाला मिनरल वॉटर का जार होता है न. जिसका सिस्टम सिलेंडर की तरह होता है. आपसे एक बार जार की कीमत ले ली जाती है. फिर पानी वाला आपकी जरूरत के मुताबिक भरा हुआ जार दे जाता है. जब पानी खत्म हो जाता है, तो वो खाली जार ले जाता है. नया दे जाता है. घर में, ऑफिस में, होटलों और रेस्तरांओं में, शादी-पार्टी में. ये पानी तमाम जगहों पर इस्तेमाल होता है. अभी दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है. एक जानी-मानी कंपनी का नकली लोगो लगाकर पानी बेचने के जुर्म में. ये लोग उस कंपनी के रिफिल जार को कबाड़ी के यहां से 8-10 रुपये में खरीदते थे. उसको साफ करते थे. उसके ऊपर कंपनी का ढक्कन और लोगो चिपकाते थे. उसमें नल का पानी भरते थे. और फिर वो जार 70 रुपये में बेच आते थे.
पुलिस को शिकायत मिली थी ये खबर इंडियन एक्स्प्रेस की है. मैरिज हॉल. छोटे-छोटे रेस्तरां. ढाबे. दफ्तर. गेस्ट हाउस. इन तमाम जगहों पर वो ये पानी बेचते थे. आशीष लूथरा नाम के एक शख्स ने पुलिस में शिकायत की. आशीष ने पुलिस को बताया कि कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से पानी बेच रहे हैं. शिकायत मिली, तो पुलिस ने कार्रवाई की. जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम हैं- सतपाल मीणा. कमलेश कुमार. और राजेश कुमार. ये तीनों गिरफ्तारियां 20 जून को हुईं. करोल बाग पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. फिलहाल कॉपीराइट ऐक्ट के सेक्शन 63 के तहत मामला दर्ज हुआ है. पुलिस आगे की जांच कर रही है.
ये लोग कबाड़ी की दुकान से एक नामी कंपनी का जार 8-10 रुपये में खरीदते थे. उसको साफ करके उसमें नल का पानी भरते और लोगों को 70 रुपये में बेच देते थे.
ये लोग कबाड़ी की दुकान से एक नामी कंपनी का जार 8-10 रुपये में खरीदते थे. उसको साफ करके उसमें नल का पानी भरते और लोगों को 70 रुपये में बेच देते थे.

धोखाधड़ी तो थी ही, पानी भी खराब होता था जार में भरा हुआ पानी खराब क्वॉलिटी का होता था. लोग ये सोचकर पैसे खर्च करते थे कि चलो, साफ पानी पीने को मिलेगा. जानी-मानी कंपनी का लोगो लगा होता था. इस वजह से पानी की क्वॉलिटी पर भी भरोसा रहता था. खराब पानी पीने की वजह से दर्जनों बीमारियां होती हैं. हैजा, डायरिया, पीलिया. और भी सौ बीमारियां.
ये पानी के जार वाला धंधा खूब चल निकला है न केवल बड़े शहरों, बल्कि छोटे-छोटे शहरों में भी ये पानी के जार वाला धंधा खूब चलता है. सप्लाई का पानी पीने लायक नहीं होता. कई जगहों पर पानी खारा आता है. फिल्टर लगवाना कई बार लोगों को ज्यादा खर्च का काम लगता है. इस वजह से लोग ऐसे पीने के जार का खूब इस्तेमाल करते हैं. मिनरल वॉटर कहकर बेचा जाने वाला वो पानी असल में कैसा है, कहां से भरा जा रहा है, इसकी तफ्तीश का कोई जरिया नहीं होता. ऐसे में ये जार वाला धंधा खूब चल रहा है. लोगों का पैसा भी जाता है. और सेहत भी जाती है. कायदे से तो इन सबको पानी बेचने से पहले लाइसेंस लेना होता है. लेकिन बिजनस करने वालों में से ज्यादातर अवैध तरीके से, बिना किसी लाइसेंस या परमिट के ही कारोबार कर रहे हैं.


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