वीगन समर्थकों का मोर्चा हुआ मजबूत, CJI चंद्रचूड़ भी हो गए हैं
चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वे अपनी बेटी से प्रेरित होकर इस ओर मुड़े हैं. कहा कि वे या उनकी पत्नी अब सिल्क या चमड़े का कोई सामान भी नहीं खरीदते हैं.

अपने देश में मांसाहार और शाकाहार व्यंजन खाने वालों के बीच बीते सालों में काफी लोग 'वीगनिज्म' की तरफ मुड़े हैं. हिंदी में इसके लिए अब तक कोई '…हार' वाला शब्द नहीं बना है. आए दिन सोशल मीडिया पर वीगन बनने के फायदे और नुकसान की बातें पढ़ते होंगे. इस बीच, देश के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी वीगन हो गए हैं. यानी खान-पान की बहसों के बीच वीगन समर्थकों का मोर्चा थोड़ा मजबूत हो गया है. चंद्रचूड़ ने कहा कि वे अपनी बेटी से प्रेरित होकर इस ओर मुड़े हैं.
वीगन लोग शाकाहार से एक कदम आगे जाकर किसी भी तरह के डेयरी प्रोडक्ट भी नहीं खाते हैं. और सिल्क, लेदर या जानवरों पर टेस्ट किया गया कोई भी प्रोडक्ट भी इस्तेमाल नहीं करते.
5 जुलाई को जस्टिस चंद्रचूड़ दिल्ली हाई कोर्ट के कैंपस में एक रेस्टोरेंट का उद्घाटन करने पहुंचे थे. यहीं पर उन्होंने ये बातें कहीं. ये रेस्टोरेंट पूरी तरह विकलांग लोगों के द्वारा चलाया जाएगा. CJI चंद्रचूड़ ने बताया कि उनकी बेटी ने उनसे "क्रूरता मुक्त जीवन" जीने को कहा और इसी वजह से उन्होंने ये फैसला लिया.
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चीफ जस्टिस दावा करते हैं कि वे या उनकी पत्नी अब सिल्क या चमड़े का कोई भी सामान नहीं खरीदते हैं. उन्होंने बताया कि इस तरह के जो सामान पहले से है उसे वे फेंक नहीं सकते, लेकिन कम से कम वीगन लाइफस्टाइल की तरफ इसे वो एक पहला कदम मानते हैं.
उन्होंने बताया,
"मेरी दो बेटियां हैं, जो विकलांग हैं. मैं जो भी करता हूं, उसमें वे दोनों मुझे हमेशा प्रेरित करती रहती हैं. हाल में मैंने वीगन होने का फैसला लिया क्योंकि मेरी बेटी ने कहा कि हमें क्रूरता मुक्त जीवन जीना चाहिए."
चीफ जस्टिस ने आगे बताया कि उन्होंने सबसे पहले डेयरी प्रोडक्ट, शहद छोड़कर पूरी तरह वीगन डाइट लेकर इसकी शुरुआत की थी. लेकिन उनकी बेटियों ने कहा कि ये काफी नहीं है. बेटियों ने ही सलाह दी कि उन्हें जानवरों से बने किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल बंद करना होगा.
वीगन डाइट किस चिड़िया का नाम है?जो लोग वीगनिज्म अपनाते हैं, वे किसी भी तरीके से जानवरों के जरिए मिलने वाले उत्पादों का सेवन नहीं करते हैं. मतलब मांसाहार खानों जैसे चिकन, मछली तो छोड़ दीजिए, वे दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही, पनीर और क्रीम तक इस्तेमाल नहीं करते हैं. ऐसे लोग पेड़-पौधों से मिलने वाली चीजों, सब्जियों, अनाजों, दालों पर निर्भर हैं.
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भारत में पिछले कुछ सालों वीगन अपनाने का चलन बढ़ा है. सबकी अपनी-अपनी दलीलें हैं. कुछ लोग इसे वजन को नियंत्रित करने, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में फायदेमंद मानते हैं. वहीं, इसके नुकसान में अक्सर इसका जिक्र होता है कि इस डाइट से माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी हो सकती है. दूध से बने उत्पादों और मांसाहार खान-पान की कमी से - विटामिन बी 12, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी की कमी होने का खतरा हो सकता है.
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